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सुपर अल नीनो के खतरे के बीच थमा मानसून, देशभर में बारिश 32% कम; अगले सप्ताह तक बढ़ सकती है चिंता

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मानसून

नई दिल्ली (कृषि भूमि ब्यूरो): देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की शुरुआत इस वर्ष उम्मीद के अनुरूप नहीं रही है। सुपर अल नीनो के संभावित प्रभावों के बीच मानसून की प्रगति धीमी पड़ गई है, जिससे कई राज्यों में बारिश की कमी चिंता का विषय बनती जा रही है। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 1 जून से 15 जून के बीच देशभर में केवल 42.4 मिमी वर्षा दर्ज की गई है, जो इस अवधि के सामान्य औसत 62.1 मिमी की तुलना में 32 प्रतिशत कम है।

इस वर्ष मानसून 4 जून को केरल पहुंचा था, जो सामान्य तिथि से तीन दिन देरी से था। शुरुआती प्रगति के बाद इसकी गति कमजोर पड़ गई और पिछले एक सप्ताह से यह कर्नाटक तथा आंध्र प्रदेश के आगे विशेष रूप से नहीं बढ़ पाया है। सामान्य परिस्थितियों में 15 जून तक मानसून महाराष्ट्र को पार कर गुजरात और मध्य प्रदेश के कई हिस्सों तक पहुंच जाता है।

कई क्षेत्रों में बारिश का इंतजार

हालांकि उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में प्री-मानसून गतिविधियों के कारण मौसम सुहावना बना हुआ है, लेकिन मध्य भारत, पूर्वी भारत और दक्षिण भारत के बड़े भूभाग अभी भी पर्याप्त बारिश का इंतजार कर रहे हैं। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अब तक हुई कुल वर्षा में उत्तर भारत में हुई प्री-मानसून बारिश का महत्वपूर्ण योगदान रहा है, जबकि देश के अन्य हिस्सों में बारिश की स्थिति अपेक्षाकृत कमजोर बनी हुई है।

विशेष रूप से मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा, झारखंड, बिहार, महाराष्ट्र के कई क्षेत्र और दक्षिण भारत के कुछ हिस्से सामान्य से कम वर्षा का सामना कर रहे हैं। इससे कृषि गतिविधियों और खरीफ फसलों की बुवाई पर भी असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।

उपग्रह चित्रों में दिख रही मानसून की कमजोरी

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार हालिया उपग्रह चित्र मानसून की कमजोर सक्रियता की ओर संकेत कर रहे हैं। दक्षिणी, मध्य और पूर्वी भारत के विस्तृत क्षेत्रों में बादलों का घनत्व सामान्य से कम दिखाई दे रहा है। आमतौर पर जून के मध्य तक मानसूनी बादलों का व्यापक विस्तार देखने को मिलता है, लेकिन इस बार स्थिति अपेक्षाकृत कमजोर बनी हुई है।

आईएमडी के वर्षा विचलन मानचित्र में भी मध्य, दक्षिण और पूर्वी भारत के बड़े हिस्से पीले तथा लाल रंग से चिह्नित हैं, जो सामान्य से कम और अत्यधिक कम वर्षा की स्थिति को दर्शाते हैं। जिन क्षेत्रों में मानसून ने प्रवेश किया है, वहां भी व्यापक और लगातार बारिश दर्ज नहीं की जा रही है।

अगले सप्ताह बढ़ सकता है वर्षा घाटा

मौसम विभाग का अनुमान है कि यदि मानसून की गति जल्द नहीं बढ़ी तो अगले सप्ताह तक देशभर में वर्षा घाटा बढ़कर 40 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। यह स्थिति कृषि, जलाशयों के जलस्तर और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का कारण बन सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जून के दूसरे पखवाड़े में मानसून की सक्रियता बढ़ना अत्यंत आवश्यक होगा ताकि शुरुआती कमी की भरपाई हो सके और खरीफ सीजन पर अधिक प्रभाव न पड़े।

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अगले 4-5 दिनों में प्रगति की संभावना

आईएमडी के अनुसार अगले चार से पांच दिनों के दौरान मानसून के मध्य अरब सागर के कुछ और हिस्सों, महाराष्ट्र, कर्नाटक के शेष क्षेत्रों, तेलंगाना, छत्तीसगढ़ के कुछ भागों तथा ओडिशा, झारखंड और बिहार में आगे बढ़ने की परिस्थितियां बन रही हैं। यदि अनुकूल मौसमीय परिस्थितियां बनी रहीं तो मानसून की रफ्तार में सुधार देखने को मिल सकता है।

उत्तर भारत को प्री-मानसून बारिश से राहत

दूसरी ओर पश्चिमी उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान के कई हिस्सों में हाल के दिनों में हुई प्री-मानसून बारिश ने लोगों को भीषण गर्मी से राहत दी है। तापमान में गिरावट दर्ज की गई है और मौसम अपेक्षाकृत सुहावना बना हुआ है।

मौसम विभाग ने यह भी संकेत दिया है कि 18 जून के आसपास एक नया पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टर्बेंस) उत्तर-पश्चिम भारत को प्रभावित कर सकता है। इसके प्रभाव से क्षेत्र में फिर से बारिश और बादल छाने की संभावना बन सकती है।

कुलमिलाकर, मानसून की धीमी प्रगति और लगातार बढ़ते वर्षा घाटे ने मौसम वैज्ञानिकों तथा कृषि क्षेत्र की चिंताओं को बढ़ा दिया है। आने वाले एक सप्ताह में मानसून की सक्रियता और उसकी प्रगति पर पूरे देश की नजर रहेगी, क्योंकि यही तय करेगा कि खरीफ सीजन और जल संसाधनों की स्थिति किस दिशा में आगे बढ़ेगी।

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