नई दिल्ली (कृषि भूमि ब्यूरो): बासमती चावल निर्यात : खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब भारत के कृषि निर्यात पर भी साफ दिखाई देने लगा है। ताजा सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मार्च और अप्रैल 2026 के दौरान भारतीय बासमती चावल निर्यात में करीब 25 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। इस गिरावट का मुख्य कारण इराक, ईरान, कतर और बहरीन जैसे प्रमुख खाड़ी देशों को भारतीय बासमती चावल निर्यात में आई भारी कमी को माना जा रहा है।
आंकड़ों के मुताबिक, मार्च और अप्रैल के दौरान भारत का कुल बासमती चावल निर्यात मूल्य घटकर 838.34 मिलियन डॉलर रह गया, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 1,105.36 मिलियन डॉलर था। यानी केवल दो महीनों में भारतीय बासमती चावल निर्यात मूल्य में लगभग 267 मिलियन डॉलर की कमी दर्ज की गई।
बासमती चावल निर्यात: खाड़ी देशों पर निर्भरता बनी बड़ी चुनौती
भारत दुनिया का सबसे बड़ा बासमती चावल निर्यातक है और खाड़ी क्षेत्र लंबे समय से इसके सबसे महत्वपूर्ण बाजारों में शामिल रहा है। उद्योग से जुड़े जानकारों के अनुसार, भारत हर वर्ष लगभग 60 लाख टन बासमती चावल निर्यात करता है, जिसमें से करीब 40 लाख टन खाड़ी देशों को भेजा जाता है।
ऐसे में क्षेत्रीय अस्थिरता और व्यापारिक अनिश्चितताओं का सीधा असर भारतीय निर्यातकों पर पड़ना स्वाभाविक है। सरकारी आंकड़े बताते हैं कि मार्च-अप्रैल के दौरान इराक, ईरान, कतर और बहरीन को होने वाले बासमती चावल निर्यात में 50 प्रतिशत से लेकर 90 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, सऊदी अरब और इजराइल को होने वाले निर्यात में कुछ सुधार के संकेत भी मिले हैं।
नए बाजारों की ओर रुख कर रहे निर्यातक
खाड़ी देशों में मांग कमजोर पड़ने के बाद भारतीय निर्यातकों ने नए बाजारों की तलाश तेज कर दी है। इसका सबसे बड़ा लाभ जॉर्डन को मिला है, जो अब भारतीय बासमती चावल का दूसरा सबसे बड़ा आयातक बनकर उभरा है।
उद्योग आंकड़ों के अनुसार, भारत के कुल बासमती चावल निर्यात में जॉर्डन की हिस्सेदारी बढ़कर करीब 15 प्रतिशत तक पहुंच गई है। सऊदी अरब अभी भी सबसे बड़ा बाजार बना हुआ है, लेकिन जॉर्डन की तेजी से बढ़ती मांग निर्यातकों के लिए नई उम्मीद लेकर आई है।
यूरोप में बढ़ी भारतीय बासमती की मांग
यूरोपीय देशों में भी भारतीय बासमती चावल की मांग मजबूत हुई है। अप्रैल महीने के आंकड़ों के अनुसार, ब्रिटेन को होने वाले भारतीय बासमती चावल निर्यात में 80 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इसी अवधि में इटली को निर्यात 67 प्रतिशत और नीदरलैंड को निर्यात 18 प्रतिशत बढ़ा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बदलाव और भारतीय बासमती की बढ़ती स्वीकार्यता यूरोपीय बाजारों में मांग बढ़ाने में मदद कर रही है।
वहीं ओमान को होने वाले भारतीय बासमती चावल निर्यात में भी 65 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। इसका एक प्रमुख कारण यह माना जा रहा है कि ओमान के अधिकांश प्रमुख बंदरगाह होर्मुज जलडमरूमध्य के संवेदनशील और विवादित क्षेत्र से बाहर स्थित हैं, जिससे व्यापार अपेक्षाकृत सुचारु बना हुआ है।

बासमती चावल निर्यात: चीन और हांगकांग से मिली राहत
चीन भी भारतीय बासमती चावल के लिए तेजी से उभरता हुआ बाजार बन रहा है। अप्रैल महीने में चीन को बासमती चावल निर्यात में 155 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि हांगकांग को निर्यात 150 प्रतिशत से अधिक बढ़ा।
हालांकि, इस अवसर के साथ नई चुनौतियां भी सामने आई हैं। हाल के महीनों में चीन ने कुछ भारतीय चावल खेपों में जेनेटिकली मॉडिफाइड (GMO) तत्व पाए जाने का दावा करते हुए उन्हें वापस लौटा दिया था।
APEDA ने लागू किए नए गुणवत्ता मानक
चीन की आपत्तियों के बाद कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) ने निर्यातकों के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अब बासमती चावल निर्यात करने वाली कंपनियों को APEDA द्वारा मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं से पांच विशिष्ट जेनेटिक तत्वों की अनिवार्य जांच करानी होगी।
सरकार और उद्योग जगत को उम्मीद है कि इन गुणवत्ता मानकों से भारतीय बासमती की विश्वसनीयता मजबूत होगी और चीन सहित अन्य संवेदनशील बाजारों में निर्यात बढ़ाने में मदद मिलेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि खाड़ी क्षेत्र में तनाव लंबे समय तक बना रहता है तो भारतीय बासमती निर्यातकों को अपने बाजारों में और अधिक विविधता लानी होगी। फिलहाल जॉर्डन, यूरोप, चीन और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों से बढ़ती मांग कुछ राहत जरूर दे रही है, लेकिन खाड़ी देशों में आई गिरावट की पूरी भरपाई अभी भी चुनौती बनी हुई है।
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