नई दिल्ली (कृषि भूमि ब्यूरो): Crude Oil Price: वैश्विक तेल बाजार में सोमवार को मजबूती देखने को मिली। छह हफ्तों के निचले स्तर पर पहुंचने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेज़ उछाल दर्ज किया गया। निवेशकों ने अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते की संभावनाओं का पुनर्मूल्यांकन किया, जिसके चलते बाजार में खरीदारी बढ़ी और तेल कीमतों को समर्थन मिला।
Crude Oil Price: अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड और अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) दोनों में दो फीसदी से अधिक की तेजी दर्ज की गई। 0028 GMT तक WTI क्रूड फ्यूचर्स 2.71 फीसदी यानी 2.37 डॉलर बढ़कर 89.73 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 2.37 फीसदी या 2.16 डॉलर की बढ़त के साथ 93.28 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखाई दिया।
Crude Oil Price: US-ईरान बातचीत पर टिकी बाजार की नजर
तेल कीमतों में यह तेजी ऐसे समय आई है जब वॉशिंगटन और तेहरान के बीच चल रही वार्ताओं को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। सप्ताहांत के दौरान दोनों देशों ने एक प्रस्तावित ड्राफ्ट समझौते में बदलावों पर चर्चा की। इस समझौते का उद्देश्य मौजूदा संघर्ष विराम को आगे बढ़ाना और होर्मुज स्ट्रेट को फिर से पूरी तरह खोलने का रास्ता तैयार करना है।
हालांकि बातचीत जारी है, लेकिन अभी तक किसी अंतिम समझौते के संकेत नहीं मिले हैं। यही कारण है कि बाजार में जोखिम प्रीमियम बना हुआ है और निवेशक सतर्क रुख अपनाए हुए हैं।
होर्मुज स्ट्रेट बना बाजार का सबसे बड़ा फैक्टर
हाल के महीनों में तेल बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखा गया है। एक ओर जहां सप्लाई बाधित होने की आशंकाएं कीमतों को ऊपर धकेल रही हैं, वहीं दूसरी ओर कूटनीतिक समाधान की उम्मीदें दबाव भी बना रही हैं।
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है। वैश्विक समुद्री तेल निर्यात का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। इस मार्ग के लगभग बंद होने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई है और तेल की कीमतों में भू-राजनीतिक जोखिम प्रीमियम जुड़ गया है।
विश्लेषकों का मानना है कि जब तक इस क्षेत्र में स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं होती, तब तक तेल बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है।
ट्रंप ने संघर्ष विराम बढ़ने की जताई उम्मीद
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस सिचुएशन रूम में हुई बैठक के बाद कहा कि उन्हें मौजूदा संघर्ष विराम के विस्तार की घोषणा होने की उम्मीद है। उन्होंने ईरान से अपने परमाणु कार्यक्रम को निलंबित करने और होर्मुज स्ट्रेट को अंतरराष्ट्रीय नौवहन मार्ग के रूप में पूरी तरह बहाल करने की मांग भी दोहराई।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि यदि दोनों देशों के बीच समझौता होता है तो तेल आपूर्ति सामान्य होने लगेगी, जिससे कीमतों पर दबाव आ सकता है। लेकिन फिलहाल किसी ठोस प्रगति की कमी ने निवेशकों को सतर्क बनाए रखा है।
क्षेत्रीय तनाव भी बढ़ा रहा चिंता
तेल बाजार की चिंताओं को और बढ़ाते हुए इज़राइल और लेबनान सीमा पर तनाव भी बढ़ गया है। सप्ताहांत में इज़राइल ने लेबनान में सैन्य अभियानों का विस्तार किया, जबकि हिज़्बुल्लाह ने उत्तरी इज़राइल पर हमले तेज कर दिए।
हालांकि यह संघर्ष सीधे तौर पर अमेरिका-ईरान वार्ता से जुड़ा नहीं है, लेकिन व्यापक क्षेत्रीय अस्थिरता मध्य-पूर्व की ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित कर सकती है। यही वजह है कि निवेशक किसी भी नए घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।
सप्लाई में सुधार के शुरुआती संकेत
इस बीच तेल आपूर्ति को लेकर कुछ सकारात्मक संकेत भी सामने आए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, संघर्ष शुरू होने के बाद फारस की खाड़ी में फंसे गैर-ईरानी तेल टैंकरों में से लगभग एक-चौथाई अब क्षेत्र से बाहर निकलने में सफल रहे हैं।

यह संकेत देता है कि यदि कूटनीतिक प्रयास आगे बढ़ते हैं और सुरक्षा हालात में सुधार होता है, तो तेल आपूर्ति में आई बाधाएं धीरे-धीरे कम हो सकती हैं। हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि स्थिति पूरी तरह सामान्य होने में अभी समय लग सकता है।
Crude Oil Price: बाजार विश्लेषकों के अनुसार, आने वाले दिनों में तेल की कीमतों की दिशा काफी हद तक अमेरिका-ईरान वार्ता, होर्मुज स्ट्रेट की स्थिति और मध्य-पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव पर निर्भर करेगी।
यदि समझौते में देरी होती है या क्षेत्रीय संघर्ष और बढ़ता है, तो कच्चे तेल की कीमतों में एक और उछाल देखने को मिल सकता है। वहीं किसी सकारात्मक कूटनीतिक प्रगति से बाजार में राहत आ सकती है।
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