नई दिल्ली (कृषि भूमि ब्यूरो): खेत बचाओ अभियान: केंद्र सरकार 1 जून से देशभर में “खेत बचाओ अभियान” शुरू करने जा रही है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग, मिट्टी की सेहत सुधारने और टिकाऊ खेती के प्रति जागरूक करना है। केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने मंगलवार को भुवनेश्वर में आयोजित पूर्वी क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन में इसकी घोषणा की।
उन्होंने कहा कि 1 जून से 15 जून तक चलने वाले इस विशेष अभियान के तहत किसानों को वैज्ञानिक खेती, मृदा परीक्षण, आधुनिक कृषि तकनीकों और सरकारी योजनाओं की जानकारी दी जाएगी। सरकार का फोकस इस बात पर रहेगा कि उर्वरकों का संतुलित उपयोग हो और सब्सिडी वाला खाद केवल खेती के कार्यों में ही इस्तेमाल किया जाए।
खेत बचाओ अभियान: मिट्टी की सेहत बचाने पर रहेगा फोकस
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि बिना मृदा परीक्षण के अंधाधुंध खाद का उपयोग किसानों की लागत बढ़ाने के साथ-साथ जमीन की उर्वरता को भी नुकसान पहुंचाता है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे जरूरत के अनुसार ही उर्वरकों का इस्तेमाल करें और अपनी जमीन के एक हिस्से में प्राकृतिक खेती अपनाएं।
उन्होंने यह भी कहा कि टिकाऊ कृषि के लिए मृदा स्वास्थ्य सबसे महत्वपूर्ण है। यदि मिट्टी की गुणवत्ता खराब होगी तो भविष्य में उत्पादन पर असर पड़ सकता है। इसलिए संतुलित खाद उपयोग को लेकर व्यापक जनजागरूकता जरूरी है।
बढ़ती उर्वरक कीमतों के बीच खेत बचाओ अभियान की शुरुआत
सरकार का यह अभियान ऐसे समय शुरू हो रहा है जब पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण वैश्विक बाजार में उर्वरकों की कीमतों में तेजी आई है। अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन प्रभावित होने से उर्वरकों के आयात में भी दिक्कतें बढ़ रही हैं।
अनुमान है कि इस वर्ष सरकार पर उर्वरक सब्सिडी का अतिरिक्त बोझ करीब 70 हजार करोड़ रुपये तक बढ़ सकता है। ऐसे में केंद्र सरकार उर्वरकों की अनावश्यक खपत को कम करने पर जोर दे रही है।
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि खाद उपयोग में अचानक बड़ी कटौती होती है तो इसका असर कृषि उत्पादन पर भी पड़ सकता है। इसी वजह से सरकार संतुलित और वैज्ञानिक उपयोग की रणनीति पर काम कर रही है।
नकली खाद और बीज के खिलाफ होगी सख्ती
कृषि मंत्री ने नकली खाद, घटिया बीज और फर्जी कीटनाशकों को किसानों के खिलाफ गंभीर अपराध बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों पर रोक लगाने के लिए व्यापक अभियान चलाया जाएगा और राज्यों को सख्त कार्रवाई करनी होगी।
उन्होंने कहा कि किसानों को गुणवत्तापूर्ण कृषि आदान उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। इसके लिए कड़े कानूनों की जरूरत है ताकि किसानों की लागत न बढ़े और उन्हें बेहतर उत्पादन मिल सके।
पूर्वी भारत को बताया कृषि विकास का ग्रोथ इंजन
भुवनेश्वर में आयोजित पूर्वी क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन में ओडिशा, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल के कृषि विकास से जुड़े मुद्दों पर व्यापक चर्चा हुई। सम्मेलन में दलहन-तिलहन उत्पादन, प्राकृतिक खेती, कृषि ऋण, किसान आय वृद्धि, बागवानी और इंटीग्रेटेड फार्मिंग जैसे विषयों पर मंथन किया गया।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि पूर्वी भारत की उर्वरा भूमि, जल संसाधन और विविध जलवायु इस क्षेत्र की सबसे बड़ी ताकत हैं। उन्होंने कहा कि यदि सही रणनीति अपनाई जाए तो पूर्वी भारत देश के कृषि विकास का सबसे बड़ा केंद्र बन सकता है।
उन्होंने छोटी जोत वाले किसानों के लिए इंटीग्रेटेड फार्मिंग मॉडल को व्यवहारिक समाधान बताया और कहा कि इससे किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी ने क्या कहा?
ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कहा कि यह सम्मेलन पूर्वी भारत के लिए कृषि विकास का साझा रोडमैप तैयार करने का बड़ा अवसर है। उन्होंने कहा कि इससे “पूर्वोदय” की परिकल्पना को मजबूती मिलेगी और जलवायु-अनुकूल खेती को नई दिशा मिलेगी।
खेत बचाओ अभियान: सम्मेलन में केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी और रामनाथ ठाकुर, विभिन्न राज्यों के कृषि मंत्री, कृषि वैज्ञानिक, किसान प्रतिनिधि, नाबार्ड, एफपीओ और कृषि स्टार्टअप्स से जुड़े विशेषज्ञ भी शामिल हुए।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि “खेत बचाओ अभियान” प्रभावी ढंग से लागू हुआ तो इससे न केवल मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार होगा बल्कि किसानों की लागत घटाने और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने में भी मदद मिलेगी।
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