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बिहार में लीची संकट: स्टिंग बग से फसल तबाह, केंद्रीय कृषि मंत्री के निर्देश पर विशेषज्ञ टास्क फोर्स गठित

नई दिल्ली (कृषि भूमि ब्यूरो): बिहार में लीची की खेती इस समय बड़े संकट से गुजर रही है। राज्य के कई इलाकों में लीची स्टिंग बग के बढ़ते प्रकोप ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। इस कीट के कारण फसल को भारी नुकसान हो रहा है, जिससे लीची उत्पादकों को आर्थिक झटका लग रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने तुरंत विशेषज्ञ टास्क फोर्स गठित करने के निर्देश दिए हैं।

केंद्रीय मंत्री के निर्देश के बाद भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के अंतर्गत राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र, मुजफ्फरपुर ने विशेषज्ञों की टीम का गठन कर दिया है। यह टीम प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करेगी और एक सप्ताह के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी।

किसानों ने उठाया था नुकसान का मुद्दा

7 मई को लखनऊ स्थित आईसीएआर के केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान में आयोजित कृषक संवाद कार्यक्रम के दौरान किसानों ने लीची स्टिंग बग से हो रहे नुकसान का मुद्दा केंद्रीय कृषि मंत्री के सामने रखा था। किसानों ने बताया कि इस कीट के हमले से लीची के फल और पेड़ों को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है, जिससे उत्पादन में भारी गिरावट आने की आशंका है।

किसानों के अनुसार, कई बागानों में फल समय से पहले खराब हो रहे हैं और बाजार योग्य उत्पादन कम होता जा रहा है। इससे किसानों की आय पर सीधा असर पड़ रहा है।

क्या करेगी विशेषज्ञ टास्क फोर्स?

राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र द्वारा जारी आदेश के मुताबिक यह टास्क फोर्स लीची स्टिंग बग की मौजूदा स्थिति का वैज्ञानिक आकलन करेगी। टीम प्रभावित जिलों और बागानों का निरीक्षण कर फसल क्षति का विस्तृत अध्ययन करेगी।

इसके साथ ही विशेषज्ञ किसानों को राहत देने के लिए तात्कालिक और दीर्घकालिक उपाय सुझाएंगे। रिपोर्ट में कीट नियंत्रण, फसल सुरक्षा और भविष्य में ऐसे प्रकोप से बचाव के उपायों पर भी सिफारिशें दी जाएंगी।

विशेषज्ञों की टीम किसानों के लिए तकनीकी परामर्श और जागरूकता कार्यक्रमों की रूपरेखा भी तैयार करेगी ताकि समय रहते संक्रमण को रोका जा सके।

किन विशेषज्ञों को किया गया शामिल

टास्क फोर्स में विभिन्न कृषि संस्थानों और विभागों के वैज्ञानिकों तथा अधिकारियों को शामिल किया गया है। राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र, मुजफ्फरपुर के निदेशक को टीम का अध्यक्ष बनाया गया है।

इसके अलावा बिहार सरकार के उद्यान विभाग और पौधा संरक्षण विभाग के प्रतिनिधि भी इसमें शामिल हैं। डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के कीट वैज्ञानिक, बिहार कृषि विश्वविद्यालय के प्रधान वैज्ञानिक (कीट विज्ञान), एकीकृत बागवानी विकास मिशन के विशेषज्ञ तथा अन्य कृषि अनुसंधान संस्थानों के वैज्ञानिक भी इस टीम का हिस्सा हैं।

लीचीबिहार की लीची अर्थव्यवस्था पर असर

बिहार देश का सबसे बड़ा लीची उत्पादक राज्य माना जाता है। खासकर मुजफ्फरपुर की लीची देश और विदेश दोनों बाजारों में अपनी गुणवत्ता और स्वाद के लिए प्रसिद्ध है। ऐसे में स्टिंग बग का बढ़ता प्रकोप केवल किसानों ही नहीं बल्कि पूरे लीची उद्योग के लिए चिंता का विषय बन गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते प्रभावी नियंत्रण उपाय नहीं किए गए तो इस साल लीची उत्पादन में बड़ी गिरावट दर्ज की जा सकती है। इसका असर निर्यात और स्थानीय बाजार दोनों पर पड़ेगा।

किसानों को राहत की उम्मीद

केंद्रीय कृषि मंत्री के हस्तक्षेप के बाद किसानों को अब राहत की उम्मीद जगी है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि वैज्ञानिक तरीके से निगरानी और कीट प्रबंधन अपनाने से नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

सरकार की ओर से जल्द राहत और तकनीकी सहायता मिलने पर किसानों को आर्थिक नुकसान से बचाने में मदद मिल सकती है। आने वाले दिनों में विशेषज्ञ टीम की रिपोर्ट के आधार पर राज्य और केंद्र सरकार आगे की रणनीति तय करेंगी।

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