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Petrol-Diesel Prices: क्या 15 मई से पहले महंगा होगा पेट्रोल-डीजल? क्रूड ऑयल में उछाल से बढ़ा दबाव

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नई दिल्ली (कृषि भूमि ब्यूरो): Petrol-Diesel Prices: देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल यानी क्रूड ऑयल की कीमतों में लगातार उछाल के बाद यह आशंका बढ़ रही है कि सरकार जल्द ही ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी कर सकती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक 15 मई से पहले पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाए जा सकते हैं।

फिलहाल भारत उन बड़े देशों में शामिल है जहां सरकार ने अब तक पेट्रोल और डीजल की रिटेल कीमतों में बड़ा इजाफा नहीं किया है। लेकिन लगातार बढ़ते घाटे ने सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों पर दबाव बढ़ा दिया है।

100 डॉलर के पार पहुंचा क्रूड ऑयल

अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव के बाद वैश्विक तेल बाजार में तेजी आई है। 27 फरवरी को जहां कच्चा तेल करीब 72 डॉलर प्रति बैरल था, वहीं अब इसमें भारी उछाल दर्ज किया गया है।

ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि वैश्विक तनाव लंबे समय तक जारी रहता है तो क्रूड ऑयल की कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है। इसका सीधा असर भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर पड़ेगा।

Petrol-Diesel Prices: 15 मई से पहले बढ़ सकते हैं दाम

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार राज्यों के विधानसभा चुनाव खत्म होने के बाद सरकार कुछ कठिन आर्थिक फैसले ले सकती है। सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 15 मई से पहले बढ़ोतरी संभव है।

Petrol-Diesel Prices – सरकारी तेल कंपनियों को पिछले करीब 70 दिनों से रोजाना लगभग 1,000 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है। कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार से महंगा तेल खरीद रही हैं, लेकिन घरेलू बाजार में कीमतें नियंत्रित होने के कारण उन्हें घाटे में बिक्री करनी पड़ रही है।

सरकारी तेल कंपनियों का बढ़ता घाटा

विशेषज्ञों के मुताबिक अप्रैल के अंत तक सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों का कुल घाटा 30,000 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका था। अनुमान है कि जून के अंत तक यह आंकड़ा 50,000 करोड़ रुपये के करीब जा सकता है।

डीजल पर कंपनियों को प्रति लीटर करीब ₹30 और पेट्रोल पर लगभग ₹24 का नुकसान हो रहा है। इसके अलावा एलपीजी गैस को लागत से कम कीमत पर बेचने के कारण भी करीब 20,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ बढ़ा है।

Petrol-Diesel Pricesसरकार ने पहले राहत देने के लिए पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में कटौती की थी। इससे सरकारी खजाने पर लगभग 1.7 लाख करोड़ रुपये का असर पड़ा था।

दूसरे देशों में पहले ही बढ़ चुके हैं दाम

Petrol-Diesel Prices-भारत के मुकाबले कई देशों ने पहले ही ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है। चीन, ब्रिटेन, जर्मनी, नार्वे और नीदरलैंड्स जैसे देशों में पेट्रोल की कीमतें करीब 27 फीसदी तक बढ़ चुकी हैं।

वहीं जापान, दक्षिण कोरिया, स्पेन और इटली में पेट्रोल के दाम 30 फीसदी से ज्यादा बढ़ाए गए हैं। भारत में अब तक कीमतों को स्थिर रखने की कोशिश की गई, लेकिन लगातार बढ़ते अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण यह रणनीति लंबे समय तक टिकना मुश्किल माना जा रहा है।

भारत के पेट्रोलियम रिजर्व पर भी नजर

भारत के पास फिलहाल करीब 53.3 लाख टन का रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व मौजूद है, जो लगभग 15 दिनों की जरूरत पूरी कर सकता है। सरकार भविष्य में इस रिजर्व को और बढ़ाने की योजना पर काम कर रही है।

देश को अपनी जरूरत पूरी करने के लिए रोजाना लगभग 20,000 टन कच्चे तेल का आयात करना पड़ता है। ऐसे में वैश्विक बाजार में हर बड़ा उतार-चढ़ाव सीधे घरेलू अर्थव्यवस्था और आम जनता की जेब पर असर डालता है।

क्या आम जनता पर बढ़ेगा बोझ?

यदि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी होती है तो इसका असर केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहेगा। परिवहन लागत बढ़ने से खाद्य पदार्थों, रोजमर्रा की वस्तुओं और लॉजिस्टिक्स सेक्टर पर भी असर पड़ सकता है। इससे महंगाई बढ़ने की आशंका भी तेज हो सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले कुछ दिन ईंधन बाजार के लिए बेहद अहम साबित हो सकते हैं। सरकार को एक तरफ आम जनता को राहत देने और दूसरी तरफ तेल कंपनियों के बढ़ते घाटे के बीच संतुलन बनाना होगा।

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