नई दिल्ली (कृषि भूमि ब्यूरो): न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) बढ़ाने की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए Supreme Court of India ने केंद्र और राज्य सरकारों से जवाब मांगा है। यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब किसानों की आय, कृषि लाभप्रदता और ग्रामीण संकट पर बहस तेज हो रही है।
याचिका में मांग की गई है कि MSP को इस स्तर तक बढ़ाया जाए, जिससे किसानों को उनकी लागत का उचित मूल्य मिल सके और आर्थिक तंगी के कारण उन्हें आत्महत्या जैसे कदम उठाने से रोका जा सके।
कोर्ट की टिप्पणी: नीति में हस्तक्षेप आसान नहीं
सुनवाई के दौरान पीठ में शामिल Justice Surya Kant और Justice Joymalya Bagchi ने संकेत दिया कि इस मामले में सीधा हस्तक्षेप करना न्यायपालिका के लिए जटिल हो सकता है।
अदालत ने कहा कि MSP तय करने जैसे मुद्दों पर निर्देश देना “सरकार की आर्थिक नीति को दोबारा लिखने जैसा” होगा। कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि देश की बड़ी आबादी को मुफ्त राशन देने जैसी योजनाएं पहले से ही व्यापक आर्थिक ढांचे का हिस्सा हैं।
किसानों की हालत पर गंभीर सवाल
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश होते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता Prashant Bhushan ने अदालत के सामने किसानों की आर्थिक स्थिति पर गंभीर चिंता जताई।
उन्होंने कहा कि देश के किसान अपनी उपज को उत्पादन लागत के बराबर कीमत पर भी नहीं बेच पा रहे हैं, जिससे वे गहरे वित्तीय संकट में हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि पिछले पांच वर्षों में केवल महाराष्ट्र में ही 17,000 से अधिक किसानों ने आत्महत्या की है, जो कृषि संकट की गंभीरता को दर्शाता है।
स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों का मुद्दा
याचिका में M. S. Swaminathan आयोग की सिफारिशों का भी हवाला दिया गया है। आयोग ने सुझाव दिया था कि किसानों को उनकी लागत (C2) पर कम से कम 50% मुनाफा जोड़कर MSP तय किया जाना चाहिए।
हालांकि याचिकाकर्ताओं का कहना है कि वर्तमान में तय MSP अक्सर औसत उत्पादन लागत से कम रहता है, जिससे किसानों को उचित लाभ नहीं मिल पाता।
खरीद व्यवस्था और फसल विविधता पर चिंता
याचिका में यह भी कहा गया है कि सरकार मुख्य रूप से गेहूं और चावल की खरीद MSP पर करती है, जबकि अन्य फसलों की खरीद बेहद सीमित है। इससे कृषि बाजार में असंतुलन पैदा हो रहा है।
इसके साथ ही National Food Security Act के तहत मुफ्त राशन वितरण को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि इससे गेहूं और चावल की मांग कृत्रिम रूप से बढ़ गई है, जबकि मोटे अनाज (मिलेट्स) की खपत घट रही है।
उनका मानना है कि यदि मुफ्त अनाज देने के बजाय नकद हस्तांतरण किया जाए, तो इससे बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और पोषक अनाजों की खपत को बढ़ावा मिलेगा।
वैश्विक व्यापार और MSP का संबंध
याचिका में भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का भी उल्लेख किया गया है, जिसके तहत कृषि उत्पादों के शुल्क-मुक्त आयात की संभावना जताई गई है। इससे घरेलू किसानों पर दबाव बढ़ सकता है।
ऐसे में याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि सरकार न केवल MSP को आकर्षक बनाए, बल्कि गेहूं और चावल के अलावा अन्य फसलों की भी प्रभावी खरीद सुनिश्चित करे।
MSP पर आगे की सुनवाई
यह मामला अब केंद्र और राज्यों के जवाब के बाद आगे बढ़ेगा। MSP का मुद्दा लंबे समय से राजनीतिक और आर्थिक बहस का केंद्र रहा है, और सुप्रीम कोर्ट में इसकी सुनवाई से इस पर नई दिशा में चर्चा शुरू होने की संभावना है।
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