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भारत ने गेहूं आटा निर्यात का रास्ता खोला, 5 लाख टन निर्यात की अनुमति

नई दिल्ली, 19 जनवरी (कृषि भूमि ब्यूरो): भारत सरकार ने घरेलू बाजार में भरपूर उपलब्धता और रिकॉर्ड उत्पादन के अनुमान को देखते हुए गेहूं आटा और उससे जुड़े उत्पादों के सीमित निर्यात की अनुमति दे दी है। केंद्र सरकार ने कुल 5 लाख टन गेहूं आटा और संबंधित उत्पादों के निर्यात को मंजूरी दी है। हालांकि, गेहूं का सीधा निर्यात अब भी प्रतिबंधित श्रेणी में रहेगा।

इस संबंध में विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने शुक्रवार को अधिसूचना जारी कर पात्रता, आवेदन प्रक्रिया और कोटा आवंटन से जुड़े दिशा-निर्देश स्पष्ट किए।

गेहूं अब भी प्रतिबंधित, लेकिन उत्पादों को छूट

सरकार ने स्पष्ट किया है कि गेहूं और उससे जुड़े उत्पाद नीति के तहत अभी भी “प्रतिबंधित” श्रेणी में रहेंगे। हालांकि, कड़े नियंत्रण और निगरानी व्यवस्था के तहत गेहूं आटा, मैदा, सूजी/रवा, होलमील आटा और मेस्लिन आटा जैसे उत्पादों के निर्यात की अनुमति दी गई है।

निर्यात केवल DGFT की विशेष अनुमति के माध्यम से ही किया जा सकेगा और यह छूट मौजूदा निर्यात नीति से अलग शर्तों के तहत लागू होगी।

आवेदन प्रक्रिया और समय-सीमा तय

DGFT की अधिसूचना के अनुसार, गेहूं उत्पादों के निर्यात के लिए आवेदन ऑनलाइन पोर्टल के जरिए किए जाएंगे। पहली आवेदन अवधि 21 जनवरी से 31 जनवरी 2026 तक खुली रहेगी। इसके बाद हर महीने के अंतिम 10 दिनों में आवेदन आमंत्रित किए जाएंगे, जब तक कि 5 लाख टन का कुल स्वीकृत कोटा पूरा नहीं हो जाता।

विशेष समिति करेगी कोटा आवंटन

निर्यात कोटे का आवंटन एक विशेष निर्यात सुविधा समिति द्वारा किया जाएगा। यह समिति निर्यातकों के ट्रैक रिकॉर्ड, प्रसंस्करण क्षमता, वैध निर्यात अनुबंधों और अन्य तकनीकी मानकों के आधार पर निर्णय लेगी। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि निर्यात से घरेलू आपूर्ति और कीमतों पर कोई नकारात्मक असर न पड़े।

पहले क्यों लगा था प्रतिबंध

गौरतलब है कि मई 2022 में भीषण गर्मी के कारण गेहूं उत्पादन घट गया था और घरेलू कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थीं। इसके बाद सरकार ने गेहूं निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था। अगस्त 2022 में मैदा, सूजी और आटा जैसे गेहूं उत्पादों के निर्यात पर भी रोक लगा दी गई थी।

इन उत्पादों की मांग खासतौर पर उन देशों में ज्यादा है जहां बड़ी भारतीय प्रवासी आबादी रहती है, जैसे अमेरिका, ब्रिटेन, खाड़ी देश, अफ्रीका के कुछ हिस्से और दक्षिण-पूर्व एशिया।

मिलों और निर्यातकों को मिलेगी राहत

सीमित निर्यात की अनुमति से आटा मिलों और निर्यातकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि नियंत्रित तरीके से निर्यात शुरू होने से घरेलू कीमतें स्थिर रहेंगी और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारत की मौजूदगी भी बनी रहेगी।

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