मुंबई, 24 मार्च (कृषि भूमि ब्यूरो): मुंबई में आयोजित ‘एग्री एक्सपोर्ट कॉन्क्लेव 2026’ के समापन अवसर पर महाराष्ट्र के विपणन मंत्री जयकुमार रावल ने राज्य के कृषि उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए ‘मेड इन महाराष्ट्र’ ब्रांड विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि राज्य के फल, फूल, सब्जियां और अनाज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने की पूरी क्षमता रखते हैं, लेकिन इसके लिए गुणवत्ता मानकों का पालन अनिवार्य है।
वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा के लिए जरूरी मानक

मंत्री रावल ने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सफल होने के लिए कृषि उत्पादों को रेसिड्यू फ्री, केमिकल फ्री और GAP (गुड एग्रीकल्चरल प्रैक्टिसेज) प्रमाणन जैसे मानकों को अपनाना होगा। उन्होंने निर्यातकों से अपील की कि वे उत्पादन से लेकर पैकेजिंग और परिवहन तक हर स्तर पर गुणवत्ता सुनिश्चित करें।
उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ के तहत निर्यातकों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि महाराष्ट्र के उत्पाद अधिक देशों तक पहुंच सकें।
‘लोकल टू ग्लोबल’ रणनीति पर जोर
नरेंद्र मोदी और देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व का उल्लेख करते हुए मंत्री ने बताया कि ‘लोकल टू ग्लोबल’ दृष्टिकोण के तहत नए अंतरराष्ट्रीय बाजारों की खोज की जा रही है। इसके साथ ही ‘फार्म टू फॉरेन मार्केट’ की अवधारणा को मजबूत करने के लिए पूरी कृषि मूल्य श्रृंखला को विकसित किया जा रहा है।
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मेड इन महाराष्ट्र कॉन्क्लेव: प्रमुख भागीदारी
इस कॉन्क्लेव में कुल 89 निर्यातकों ने भाग लिया, जो विभिन्न देशों में फल, फूल, सब्जियां और अनाज का निर्यात करते हैं। कार्यक्रम में कई महत्वपूर्ण प्रतिनिधियों की उपस्थिति रही। इस अवसर पर विधायक चरणसिंह ठाकूर, महाराष्ट्र राज्य कृषि विपणन मंडल के कार्यकारी संचालक संजय कदम, सरव्यवस्थापक एवं महाराष्ट्र एग्रीबिजनेस नेटवर्क (मैग्नेट) प्रोजेक्ट के निदेशक विनायक कोकरे, अतिरिक्त प्रकल्प संचालक डॉ. अमोल यादव, एपीडा मुंबई कार्यालय के क्षेत्रीय प्रमुख प्रशांत वाघमारे, नेशनल प्लांट प्रोटेक्शन ऑर्गनाइजेशन के सहनिदेशक डॉ. जी. पी. सिंह, मलेशिया के कॉन्सुलेट जनरल अहमद युसुफ तथा श्रीलंका की कॉन्सुलेट जनरल शिरानी अरियारत्ने सहित कई गणमान्य उपस्थित रहे।
मेड इन महाराष्ट्र: मंत्री रावल ने क्या कहा?
कॉन्क्लेव में आम, अंगूर, प्याज और केले के निर्यातकों सहित कई प्रतिनिधियों ने अपने अनुभव साझा किए। इनमें इकराम हुसैन, कैलास भोसले, अजित शाह और किरण डोके जैसे प्रमुख नाम शामिल रहे। मंत्री रावल ने जोर देकर कहा कि अगर उत्पादन, संरक्षण और लॉजिस्टिक्स को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उन्नत किया जाए, तो महाराष्ट्र देश का अग्रणी कृषि निर्यात केंद्र बन सकता है।
राज्य सरकार का फोकस अब कृषि निर्यात को संगठित और ब्रांडेड स्वरूप देने पर है। ‘मेड इन महाराष्ट्र’ पहल न केवल किसानों की आय बढ़ाने में मदद करेगी, बल्कि राज्य को वैश्विक कृषि मानचित्र पर मजबूत पहचान भी दिलाएगी।
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