[polylang_langswitcher]

सोना: $35 से $850 तक की सनसनीखेज उड़ान… और फिर ऐसा गिरा कि दुनिया चौंक गई

नई दिल्ली, 23 मार्च (कृषि भूमि ब्यूरो): हाल के वर्षों में सोना जिस तेजी से बढ़ा, उसने निवेशकों को हैरान कर दिया – भारत में ₹63,000 से बढ़कर ₹1.8 लाख प्रति 10 ग्राम तक। लेकिन हालिया गिरावट, खासकर ईरान युद्ध के बाद लगभग 20% की कमजोरी, यह संकेत देती है कि सोने की चाल हमेशा सीधी नहीं होती।

ऐसा पहले भी हुआ है। 1970 का दशक इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जब सोने ने इतिहास की सबसे बड़ी तेजी और फिर लंबी गिरावट दोनों देखीं।

एक फैसले ने बदल दी दुनिया: Nixon Shock

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद वैश्विक अर्थव्यवस्था Bretton Woods System पर टिकी थी, जहां डॉलर सीधे सोने से जुड़ा था। लेकिन 15 अगस्त 1971 को Richard Nixon ने इस संबंध को खत्म कर दिया।

इस फैसले, जिसे Nixon Shock कहा गया, ने सोने को सरकारी नियंत्रण से मुक्त कर दिया। अब इसकी कीमत बाजार तय करने लगा—और यहीं से शुरू हुई असली उथल-पुथल।

एक दशक में 24 गुना उछाल—लेकिन रास्ता सीधा नहीं था

1970 में करीब $35 प्रति औंस पर स्थिर सोना अचानक निवेशकों का पसंदीदा एसेट बन गया। 1974 तक इसकी कीमत $180 तक पहुंच गई। फिर एक झटका आया—1976 तक यह $100 के आसपास गिर गया। लेकिन इसके बाद जो हुआ, वह इतिहास बन गया।

1978 के बाद तेजी इतनी तेज हुई कि जनवरी 1980 में सोना $850 प्रति औंस तक पहुंच गया। यह सिर्फ तेजी नहीं, बल्कि “फाइनेंशियल एक्सप्लोजन” था।

संकटों ने बनाया सोने को सुपरस्टार

1970 का दशक आर्थिक और राजनीतिक उथल-पुथल से भरा था। 1973 Oil Crisis ने वैश्विक महंगाई को हवा दी, जबकि Iranian Revolution ने अनिश्चितता को चरम पर पहुंचा दिया।

अमेरिका और यूरोप में महंगाई दो अंकों में पहुंच गई थी। डॉलर कमजोर हो रहा था और निवेशकों का भरोसा डगमगा रहा था। ऐसे माहौल में सोना सिर्फ एक धातु नहीं, बल्कि “सुरक्षा की गारंटी” बन गया।

फिर अचानक क्यों टूटा सोना?

जब सोना अपने शिखर पर था, उसी समय एक और बड़ा बदलाव हुआ। Paul Volcker ने महंगाई को काबू करने के लिए ब्याज दरों को आक्रामक तरीके से बढ़ा दिया।

ब्याज दरें करीब 20% तक पहुंचीं, जिससे डॉलर मजबूत हुआ और निवेशकों ने सोने से दूरी बनानी शुरू कर दी। परिणाम यह हुआ कि सोना $850 से गिरकर $300–$400 के दायरे में आ गया और लंबे समय तक वहीं फंसा रहा।

डेटा में छिपा बड़ा सच

वर्षकीमत ($/oz)ट्रेंड
197035स्थिर
1974180तेज उछाल
1976100गिरावट
1980850ऐतिहासिक पीक
1982+300–400लंबी कमजोरी

यह आंकड़े बताते हैं कि सोने का बुल रन भी लगातार नहीं चलता—इसमें तेज गिरावटें भी शामिल होती हैं।

आज के बाजार से क्या कनेक्शन?

आज की स्थिति कई मायनों में 1970s जैसी दिखती है—महंगाई, भू-राजनीतिक तनाव और केंद्रीय बैंकों की सख्त नीतियां। हालांकि आज का बाजार ज्यादा जटिल और ग्लोबल है, लेकिन एक बात नहीं बदली—सोना अभी भी संकट के समय निवेशकों का पसंदीदा विकल्प है, लेकिन यह हमेशा सुरक्षित या स्थिर नहीं रहता।

सोना चमकता है, लेकिन सीधी लाइन में नहीं

1970s की कहानी यह सिखाती है कि सोने की सबसे बड़ी ताकत उसकी अस्थिरता में ही छिपी है। जब दुनिया अनिश्चित होती है, तो सोना चमकता है। लेकिन जैसे ही हालात बदलते हैं, उसकी चमक फीकी भी पड़ सकती है।

इसलिए निवेश के नजरिए से सोना एक “भावनात्मक” नहीं, बल्कि “रणनीतिक” एसेट है—और इतिहास इसे बार-बार साबित करता है।

===
हमारे लेटेस्ट अपडेट्स और खास जानकारियों के लिए अभी जुड़ें — बस इस लिंक पर क्लिक करें:
https://whatsapp.com/channel/0029Vb0T9JQ29759LPXk1C45

शेयर :

Facebook
Twitter
LinkedIn
WhatsApp

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हमारे न्यूज़लेटर की सदस्यता लें

ताज़ा न्यूज़

विज्ञापन

विशेष न्यूज़

Stay with us!

Subscribe to our newsletter and get notification to stay update.

राज्यों की सूची