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होर्मुज संकट के बीच कच्चे तेल में उछाल, ब्रेंट $111 के पार

नई दिल्ली, 23 मार्च (कृषि भूमि ब्यूरो): स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स जुलाई 2022 के बाद के उच्चतम स्तर को छूने के बाद मामूली गिरावट के साथ $112.11 प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है।

वहीं US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) भी पिछले सत्र की 2.27% तेजी के बाद $98.17 प्रति बैरल पर स्थिर बना हुआ है।

ब्रेंट और WTI के बीच अंतर $14 प्रति बैरल से अधिक पहुंच गया है, जो कई वर्षों में सबसे ज्यादा है।

होर्मुज पर तनाव ने बढ़ाई चिंता

तेल बाजार में अस्थिरता की सबसे बड़ी वजह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर बढ़ती तनातनी है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के लगभग 20% तेल और LNG सप्लाई के लिए बेहद अहम है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है कि यदि 48 घंटे में होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह नहीं खोला गया, तो ईरान के पावर प्लांट्स को निशाना बनाया जाएगा।

इसके जवाब में ईरान ने भी कड़ा रुख अपनाया है और चेताया है कि किसी भी हमले की स्थिति में पश्चिम एशिया का ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर गंभीर रूप से प्रभावित हो सकता है।

सप्लाई पर बड़ा असर, उत्पादन में भारी गिरावट

संघर्ष के चलते तेल सप्लाई पर सीधा असर पड़ रहा है। एनालिस्ट्स के मुताबिक, पश्चिम एशिया में रोजाना 7 से 10 मिलियन बैरल तेल उत्पादन प्रभावित हो सकता है।

इराक ने भी सभी विदेशी कंपनियों के ऑयलफील्ड्स पर फोर्स मेज्योर घोषित कर दिया है। बसरा ऑयल कंपनी का उत्पादन 3.3 मिलियन बैरल प्रति दिन से घटकर सिर्फ 900,000 बैरल रह गया है।

प्रमुख तेल बेंचमार्क की स्थिति

बेंचमार्ककीमत (प्रति बैरल)बदलाव
ब्रेंट क्रूड$112.11हल्की गिरावट (-0.08)
WTI$98.17हल्की गिरावट (-0.06)
स्प्रेड$14+कई सालों का उच्च स्तर

क्या $120 तक जा सकता है तेल

मूमू ऑस्ट्रेलिया के CEO माइकल मैकार्थी के अनुसार, कम लिक्विडिटी और शॉर्ट-टर्म प्रॉफिट बुकिंग के कारण कीमतों में हल्की गिरावट दिख रही है, लेकिन ट्रेंड अभी भी तेजी का है।

उनका मानना है कि इस सप्ताह तेल की कीमतें $120 प्रति बैरल के स्तर को टेस्ट कर सकती हैं। एनर्जी एक्सपर्ट अमृता सेन ने भी चेतावनी दी है कि हालात और बिगड़ सकते हैं और कीमतों में और तेजी संभव है।

सप्लाई की कमी को कम करने के लिए अमेरिका ने अस्थायी रूप से ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंधों में ढील दी है। ट्रेडर्स के मुताबिक, भारतीय रिफाइनर दोबारा ईरानी तेल खरीदने की योजना बना रहे हैं, जबकि एशिया के अन्य देश भी इस विकल्प पर विचार कर रहे हैं।

आगे क्या?

तेल बाजार फिलहाल पूरी तरह भू-राजनीतिक घटनाओं पर निर्भर है। यदि होर्मुज स्ट्रेट पर तनाव और बढ़ता है, तो कीमतों में तेज उछाल आ सकता है।

हालांकि, अगर कूटनीतिक समाधान निकलता है, तो बाजार में स्थिरता लौट सकती है। फिलहाल निवेशकों और देशों के लिए यह स्थिति सतर्क रहने की है, क्योंकि वैश्विक ऊर्जा संकट गहराने के संकेत मिल रहे हैं।

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