नई दिल्ली, 18 मार्च (कृषि भूमि ब्यूरो): वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की तेजी का असर अब खाद्य तेलों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। सोयाबीन तेल की कीमतें $1,100 प्रति टन के पार पहुंच गई हैं, जबकि मौजूदा सौदे $1,080 से $1,150 प्रति टन के बीच हो रहे हैं।
साल की शुरुआत में ये कीमतें $1,000 प्रति टन से नीचे थीं, जिससे हालिया उछाल काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, यह स्तर अभी भी मई 2022 के $1,800 प्रति टन के रिकॉर्ड से काफी नीचे है।
होर्मुज तनाव बना बड़ी वजह
सोयाबीन तेल की इस तेजी के पीछे पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव अहम भूमिका निभा रहा है, खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास। यह क्षेत्र वैश्विक तेल सप्लाई का प्रमुख मार्ग है और यहां शिपिंग जोखिम बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है।
कच्चे तेल की इसी मजबूती का असर ऊर्जा से जुड़े अन्य कमोडिटी बाजारों पर पड़ा है, जिसमें सोयाबीन तेल प्रमुख रूप से शामिल है।
बायोडीजल डिमांड से मिला सपोर्ट
सोयाबीन तेल बायोडीजल के लिए एक प्रमुख कच्चा माल है, इसलिए इसकी कीमतें अक्सर कच्चे तेल के साथ चलती हैं। जब ऊर्जा की कीमतें बढ़ती हैं, तो वैकल्पिक ईंधनों की मांग भी मजबूत हो जाती है।
मौजूदा हालात में यही ट्रेंड देखने को मिल रहा है, जिससे सोयाबीन तेल को अतिरिक्त सपोर्ट मिला है और तिलहन बाजार में भी मजबूती आई है।
तिलहन बाजार पर व्यापक असर
| फैक्टर | असर |
|---|---|
| कच्चे तेल की तेजी | सोयाबीन तेल की कीमतों में उछाल |
| बायोडीजल मांग | अतिरिक्त सपोर्ट |
| वैश्विक भंडार | तेजी पर दबाव |
| चीन की मांग | सुस्ती का असर |
हाल के हफ्तों में सोयाबीन की बेंचमार्क कीमतों में भी तेजी देखी गई है। कच्चे तेल से मिली मजबूती ने बड़े वैश्विक भंडार जैसे कारकों के असर को फिलहाल सीमित कर दिया है, जिससे बाजार में सकारात्मक रुख बना हुआ है।
आगे अनिश्चितता बरकरार
हालांकि मौजूदा तेजी मजबूत दिख रही है, लेकिन इसकी स्थिरता को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। वैश्विक स्तर पर सोयाबीन का पर्याप्त भंडार मौजूद है और चीन जैसे बड़े खरीदारों की मांग में सुस्ती भी चिंता का विषय बनी हुई है।
इसके अलावा, यदि पश्चिम एशिया में तनाव कम होता है और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आती है, तो सोयाबीन तेल में आई तेजी भी तेजी से पलट सकती है।
फिलहाल सोयाबीन तेल की कीमतें कच्चे तेल और भू-राजनीतिक परिस्थितियों से प्रभावित होकर मजबूत बनी हुई हैं। लेकिन बाजार की दिशा आने वाले समय में वैश्विक मांग और ऊर्जा कीमतों पर निर्भर करेगी, जिससे निवेशकों और कारोबारियों को सतर्क रहना जरूरी है।
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