डीएपी महंगा: अंतरराष्ट्रीय बाजार में 730 डॉलर प्रति टन, खरीफ से पहले किसानों की चिंता बढ़ी

नई दिल्ली, 27 फरवरी (कृषि भूमि ब्यूरो): खेती में उपयोग होने वाले प्रमुख फॉस्फेट उर्वरक डाई अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बीते दो सप्ताह के दौरान 50 डॉलर प्रति टन से अधिक की तेजी दर्ज की गई है। वैश्विक बाजार में डीएपी के भाव 720 से 730 डॉलर प्रति टन के बीच पहुंच गए हैं, जिससे खरीफ सीजन से पहले भारत सहित कई देशों की चिंता बढ़ गई है।

करीब पंद्रह दिन पहले डीएपी की कीमतें 665–670 डॉलर प्रति टन के स्तर पर थीं, लेकिन अब मांग और आपूर्ति के असंतुलन ने बाजार को गर्म कर दिया है।

ब्राजील की बड़ी खरीद और चीन के प्रतिबंध का असर

कीमतों में तेजी की एक बड़ी वजह ब्राजील की आक्रामक खरीद है। ब्राजील ने Ma’aden से 740 डॉलर प्रति टन तक के सौदे किए हैं। इसके अलावा चीन  द्वारा डीएपी निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंध ने वैश्विक आपूर्ति को और सीमित कर दिया है।

भारत में सालाना लगभग 100 लाख टन डीएपी की खपत होती है, जिसमें बड़ा हिस्सा आयात पर निर्भर है। करीब 60 प्रतिशत डीएपी तैयार उर्वरक के रूप में आयात होता है, जबकि शेष कच्चे माल के जरिये घरेलू उत्पादन में इस्तेमाल होता है।

भारत की आपूर्ति पर दबाव

भारत ने दीर्घकालिक आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए रूस और सऊदी अरब की कंपनी मादेन के साथ समझौते किए हैं। रूस के साथ छह लाख टन डीएपी आपूर्ति का करार हुआ है, लेकिन फरवरी में आपूर्ति न हो पाने से स्थिति जटिल हो गई है। अब रूस अप्रैल के मध्य में आपूर्ति करना चाहता है, जो खरीफ सीजन की तैयारियों के लिहाज से चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।

एनबीएस नीति और सब्सिडी की भूमिका

भारत में डीएपी की अधिकतम खुदरा कीमत पिछले तीन वर्षों से 1350 रुपये प्रति 50 किलो बैग पर स्थिर है। यह कीमत और बढ़ती आयात लागत के बीच का अंतर सरकार सब्सिडी के जरिए भरती है। यह सब्सिडी न्यूट्रिएंट आधारित सब्सिडी (एनबीएस) योजना के तहत दी जाती है, जिसमें नाइट्रोजन, फॉस्फेट, पोटाश और सल्फर के लिए प्रति किलो दरें तय होती हैं।

उद्योग फिलहाल अप्रैल 2026 से लागू होने वाली एनबीएस दरों के ऐलान का इंतजार कर रहा है। अनिश्चितता के कारण आयातक फिलहाल बड़े सौदे करने से बच रहे हैं, जिससे समय पर उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।

डीएपी की कीमत: वैश्विक बनाम घरेलू स्थिति

पहलूस्थिति
अंतरराष्ट्रीय कीमत720–730 डॉलर/टन
हालिया बढ़ोतरी50 डॉलर/टन से अधिक
भारत में एमआरपी₹1350 प्रति 50 किलो बैग
वार्षिक खपत (भारत)~100 लाख टन
आयात निर्भरतालगभग 60%

किसानों पर सीधा असर नहीं, लेकिन चुनौती बनी

फिलहाल सरकार के आश्वासन के चलते किसानों के लिए डीएपी की खुदरा कीमत बढ़ने की संभावना कम है। हालांकि डीएपी की उपलब्धता सीमित होने से अन्य कॉम्प्लेक्स उर्वरकों की मांग बढ़ी है, जिनकी कीमतों में पिछले वर्षों में इजाफा देखा गया है।

सरकार के सामने एक और बड़ी चुनौती उर्वरकों के संतुलित उपयोग की है। हालिया आंकड़ों के मुताबिक नाइट्रोजन, फॉस्फेट और पोटाश के उपयोग का अनुपात बिगड़ा हुआ है और यूरिया की खपत आदर्श स्तर से कहीं अधिक बनी हुई है। ऐसे में डीएपी की बढ़ती वैश्विक कीमतें नीति निर्धारण के लिए नई परीक्षा बनकर उभरी हैं।

===
हमारे लेटेस्ट अपडेट्स और खास जानकारियों के लिए अभी जुड़ें — बस इस लिंक पर क्लिक करें:
https://whatsapp.com/channel/0029Vb0T9JQ29759LPXk1C45

शेयर :

Facebook
Twitter
LinkedIn
WhatsApp

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हमारे न्यूज़लेटर की सदस्यता लें

ताज़ा न्यूज़

विज्ञापन

विशेष न्यूज़

Stay with us!

Subscribe to our newsletter and get notification to stay update.

राज्यों की सूची

SL888