नई दिल्ली, 20 फरवरी (कृषि भूमि ब्यूरो): मिलावटी नारियल तेल पर SHRC का दखल – उत्तरी केरल में मिलावटी नारियल तेल के कथित बड़े पैमाने पर निर्माण और बिक्री के आरोपों के बीच State Human Rights Commission (SHRC) के हस्तक्षेप से किसानों में राहत और उम्मीद जगी है।
कमीशन ने फूड सेफ्टी कमिश्नर को तत्काल जांच के निर्देश देते हुए 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है। मामले पर अगली सुनवाई कोझिकोड में PWD रेस्ट हाउस में निर्धारित की गई है।
किन इलाकों में उठी शिकायत?
याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि Kozhikode, Wayanad और वडकारा क्षेत्र में कुछ डिस्ट्रीब्यूटर शुद्ध नारियल तेल के बाजार मूल्य (करीब ₹400 प्रति किलोग्राम) से काफी कम दर पर घटिया और मिलावटी तेल बेच रहे हैं।
किसानों का कहना है कि कम कीमत पर बिकने वाले इन उत्पादों से न केवल उपभोक्ताओं की सेहत को खतरा है, बल्कि असली उत्पाद की साख भी प्रभावित हो रही है।
किसानों की मांग: सख्त कार्रवाई और अचानक निरीक्षण
कुट्टियाडी के नारियल किसान विजयन और अन्य किसानों ने मांग की है कि मिलावटी तेल बनाने वाली इकाइयों पर अचानक निरीक्षण किया जाए और गैर-कानूनी ब्रांड्स पर स्थायी प्रतिबंध लगाया जाए।
SHRC के न्यायिक सदस्य के. बैजुनाथ ने अपने आदेश में कहा कि असली नारियल तेल से काफी कम कीमत पर बिक रहे उत्पादों की जांच विशेषज्ञ टीम से कराई जानी चाहिए।
किसानों का कहना है कि यदि ऐसे मामलों पर समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो नारियल आधारित पारंपरिक आजीविका और स्थानीय कृषि अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है।
सप्लाई चेन पर भी सवाल
शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि संदिग्ध उत्पादों की सप्लाई चेन केरल के बाहर तक फैली हो सकती है। कुछ होटल और सड़क किनारे खाने के प्रतिष्ठानों पर भी सस्ते, मिलावटी तेल के इस्तेमाल के आरोप लगाए गए हैं।
कुट्टियाडी के किसान वी. फिलिप ने दावा किया कि कुछ होटल संचालक नारियल तेल की ऊंची कीमत का हवाला देकर खाद्य पदार्थों के दाम बढ़ा देते हैं, जबकि वास्तविकता में वे मिलावटी तेल का इस्तेमाल कर रहे होते हैं।
पहले भी हुई थी कार्रवाई
फूड सेफ्टी विभाग ने हाल के महीनों में निरीक्षण तेज किए हैं और कई संदिग्ध कंसाइनमेंट जब्त किए हैं। किसानों ने याद दिलाया कि लगभग पांच साल पहले विभागीय कार्रवाई के दौरान राज्य में 40 से अधिक गैर-कानूनी तेल ब्रांड्स पर प्रतिबंध लगाया गया था।
हालांकि किसानों का मानना है कि SHRC के निर्देश से निगरानी और जवाबदेही दोनों बढ़ेंगी, जिससे भविष्य में इस तरह की गलत व्यापारिक प्रथाओं पर अंकुश लगाया जा सकेगा।
जानकारों का मानना है कि यदि जांच समयबद्ध और पारदर्शी ढंग से पूरी होती है, तो इससे उपभोक्ताओं का भरोसा बहाल होगा और नारियल किसानों को भी उचित बाजार मूल्य मिल सकेगा। अब निगाहें 15 दिनों में आने वाली रिपोर्ट और अगली सुनवाई पर टिकी हैं।
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