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नई दिल्ली, 15 फरवरी (कृषि भूमि ब्यूरो): चालू पेराई सीजन (2025-26) में देश का चीनी उत्पादन अनुमान से करीब 26 लाख टन कम होकर लगभग 290 लाख टन रहने की संभावना है। इसकी मुख्य वजह उत्तर प्रदेश में गन्ने की उत्पादकता में भारी गिरावट और महाराष्ट्र में सीजन के शुरुआती चरण में ही फ्लावरिंग की स्थिति बनना बताया जा रहा है।

चीनी उद्योग संगठनों ने शुरुआत में इस सीजन में करीब 349 लाख टन चीनी उत्पादन का अनुमान लगाया था। इसमें से लगभग 34 लाख टन चीनी के एथेनॉल में डायवर्जन के बाद शुद्ध उत्पादन 316 लाख टन रहने का अनुमान था। निजी चीनी उद्योग संगठन इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) ने भी 349.01 लाख टन का शुरुआती आकलन किया था।

उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र से कम उत्पादन के संकेत

सबसे बड़े चीनी उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र से आ रही सूचनाओं के मुताबिक दोनों ही राज्यों में उत्पादन अनुमान से कम रहेगा। उद्योग सूत्रों के अनुसार सबसे अधिक गिरावट उत्तर प्रदेश में देखने को मिलेगी।

उत्तर प्रदेश में चालू सीजन में चीनी उत्पादन करीब 95 लाख टन पर अटक सकता है, जबकि राज्य के लिए 110 लाख टन का अनुमान लगाया गया था। यह उत्पादन पिछले साल के 92.76 लाख टन से सिर्फ मामूली अधिक होगा।

महाराष्ट्र में उत्पादन करीब 102 लाख टन रहने की संभावना है, जो पिछले साल के 80.96 लाख टन से लगभग 12 लाख टन अधिक है, लेकिन यहां भी अनुमान 110 लाख टन का था।

ISMA ने पहले ही घटाया था अनुमान

ISMA ने दिसंबर में ही अपने अनुमान को 349.01 लाख टन से घटाकर 343.5 लाख टन कर दिया था। इस संशोधित आंकड़े में एथेनॉल के लिए किया गया डायवर्जन भी शामिल था, जिससे बाजार में उपलब्ध चीनी की मात्रा और कम हो सकती है।

यूपी में गन्ना उत्पादकता पर संकट

उत्तर प्रदेश की एक बड़ी चीनी मिल समूह के वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक राज्य में इस साल गन्ने की उत्पादकता 15 से 20 फीसदी तक कम है। पिछले साल भी गन्ने की फसल कमजोर रही थी और किसान लगातार बीमारी व कम पैदावार की समस्या से जूझ रहे हैं।

इसका सीधा असर चीनी मिलों की पेराई अवधि पर पड़ रहा है। जहां बेहतर फसल के वर्षों में मई तक पेराई चलती थी, वहीं इस बार कई मिलों में फरवरी के अंत से मार्च तक ही पेराई बंद होने की संभावना है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसानों से बातचीत में भी गन्ना उत्पादकता में तेज गिरावट की पुष्टि हो रही है।

महाराष्ट्र में अर्ली फ्लावरिंग और तेज पेराई

महाराष्ट्र में गन्ने की फसल पर अर्ली फ्लावरिंग का असर दिख रहा है। किसान नेता, पूर्व सांसद और स्वाभिमानी शेतकरी संघठना के अध्यक्ष राजू शेट्टी के अनुसार पश्चिमी महाराष्ट्र में इस वजह से उत्पादन प्रभावित हुआ है।

राज्य में चीनी मिलों ने पेराई क्षमता बढ़ाई है और मैकेनिकल हार्वेस्टिंग के कारण कटाई भी तेज हुई है। उद्योग सूत्रों के मुताबिक इस सीजन में महाराष्ट्र में करीब 25 फीसदी गन्ने की कटाई मशीनों से होगी, जिससे कई मिलों में पेराई अपेक्षाकृत जल्दी समाप्त हो सकती है।

कर्नाटक का हाल

तीसरे बड़े चीनी उत्पादक राज्य कर्नाटक में इस सीजन में करीब 42 लाख टन चीनी उत्पादन का अनुमान है, जबकि उद्योग ने यहां 50 लाख टन का आकलन किया था। यह आंकड़ा भी कुल राष्ट्रीय उत्पादन को नीचे खींच रहा है।

विभिन्न अनुमानों की तुलना

स्रोत / राज्य अनुमानित उत्पादन (लाख टन)
ISMA (शुरुआती) 349.01
ISMA (संशोधित) 343.5
AISTA का अनुमान 296
उत्तर प्रदेश 95
महाराष्ट्र 102
कर्नाटक 42

AISTA का आकलन और बाजार संकेत

29 जनवरी 2026 को ऑल इंडिया शुगर ट्रेडर्स एसोसिएशन (AISTA) ने भी चालू सीजन में चीनी उत्पादन 296 लाख टन रहने की संभावना जताई थी। यह आंकड़ा बाजार की मौजूदा धारणा से मेल खाता दिख रहा है।

निर्यात अनुमति से कीमतों को सहारा

उद्योग के लिए राहत की खबर यह है कि केंद्र सरकार ने 13 फरवरी को 5 लाख टन अतिरिक्त चीनी निर्यात की अनुमति दी। इसके तुरंत बाद 14 फरवरी को चीनी की एक्स-फैक्टरी कीमत में 50 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

महाराष्ट्र में चीनी की एक्स-फैक्टरी कीमत बढ़कर 3750 रुपये प्रति क्विंटल और उत्तर प्रदेश में 3950 रुपये प्रति क्विंटल हो गई है। मिलों का मानना है कि दामों में सुधार से वे गन्ना किसानों के भुगतान में तेजी ला सकेंगी, जो लंबे समय से किसानों की बड़ी मांग रही है।

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