[polylang_langswitcher]

India-America Tariff News : भारत‑अमेरिका व्यापार वार्ता फिसली, खेती और डेयरी उत्पादों पर अड़ा अमेरिका

India & America Tariff News

नई दिल्ली, 31 जुलाई (कृषि भूमि डेस्क):

भारत (India) और (America) अमेरिका के बीच लंबे समय से प्रतीक्षित व्यापार समझौते पर वार्ता एक बार फिर बिना किसी ठोस परिणाम के समाप्त हो गई। विशेषज्ञों के अनुसार, कृषि (Agriculture) और डेयरी (Dairy) उत्पादों पर मतभेदों के चलते यह बातचीत अधर में लटक गई है। अमेरिका, विशेष रूप से ट्रंप (Trump) प्रशासन के प्रभाव वाले व्यापार लॉबी गुट (Tariff) , इन क्षेत्रों में भारत से बड़ी रियायतें चाहता था, जिसे नई दिल्ली ने “अहितकारी” मानते हुए सिरे से खारिज कर दिया।

वार्ता विफल होने के पीछे सबसे बड़ा कारण अमेरिका की यह मांग थी कि भारत अपने कृषि और डेयरी सेक्टर को अमेरिकी निर्यातकों के लिए खोल दे। अमेरिका का तर्क है कि इससे भारत को उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों की आपूर्ति सुनिश्चित होगी और उपभोक्ताओं को विकल्प मिलेंगे। लेकिन भारत का पक्ष है कि इससे उसके करोड़ों लघु और सीमांत किसान प्रभावित होंगे, जिनकी आजीविका पहले से संकट में है।

 ट्रंप की नीतियों की छाया

हालांकि वर्तमान में अमेरिका में ट्रंप सत्ता में नहीं हैं, फिर भी उनकी व्यापार नीतियों की छाया अब भी स्पष्ट रूप से मौजूद है। ट्रंप ने अपने कार्यकाल में “अमेरिका फर्स्ट” नीति के तहत भारत पर दबाव बनाया था कि वह अपने बाजारों को अमेरिकी डेयरी उत्पादों और कृषि वस्तुओं के लिए खोले। वर्तमान अमेरिकी प्रशासन इस नीति को पूर्णतः त्याग नहीं पाया है।

कमोडिटी एक्सपर्ट अजय केडिया कहते हैं, “भारत की ओर से यह एक रणनीतिक निर्णय था कि वह घरेलू खाद्य सुरक्षा और किसान हितों को प्राथमिकता दे। अमेरिकी शर्तें स्वीकार करना भारत के कृषि ढांचे के लिए जोखिमपूर्ण होता।”

व्यापार घाटा और रणनीतिक साझेदारी

भारत का अमेरिका के साथ व्यापार घाटा पिछले कुछ वर्षों में घटा है, लेकिन अमेरिका अब भी चाहता है कि भारत आयात शुल्क कम करे, खासतौर पर एग्रो और डेयरी सेक्टर में। भारत, दूसरी ओर, तकनीकी उत्पादों और प्रोफेशनल सर्विसेज में ज्यादा पहुंच की मांग कर रहा है – एक ऐसा संतुलन जो अब तक नहीं बन पाया है।

आगे की राह

भारतीय वाणिज्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “संवाद बंद नहीं हुआ है। हम अमेरिका के साथ मजबूत रणनीतिक साझेदारी चाहते हैं, लेकिन यह किसानों की कीमत पर नहीं हो सकता।” वहीं, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधियों ने कहा है कि वार्ता आगे भी जारी रहेगी लेकिन “भारत को बाजार खोलने के लिए साहसिक निर्णय लेने होंगे।”

भारत‑अमेरिका व्यापार वार्ता की यह असफलता केवल एक व्यापारिक मुद्दा नहीं, बल्कि एक रणनीतिक असहमति भी है – जहां दोनों देश अपने घरेलू हितों को प्राथमिकता दे रहे हैं। कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील मुद्दों पर सहमति बनाना आसान नहीं होगा, लेकिन अगर दोनों देश दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाएं, तो एक संतुलन संभव है।

====

हमारे साथ जुड़ने के लिए लिंक पर क्लिक करें : https://whatsapp.com/channel/0029Vb0T9JQ29759LPXk1C45

====

आपूर्ति के लिए पर्याप्त है स्टॉक किसानो को msp के रूप में 57000 करोड़ का भुगतान : सरकार

भारत में गेहूं की खरीद तीन साल के सबसे उच्चतम लेवल पर होने के बाद भी नहीं पूरा हुआ टारगेट

 

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हमारे न्यूज़लेटर की सदस्यता लें

ताज़ा न्यूज़

विज्ञापन

विशेष न्यूज़

Stay with us!

Subscribe to our newsletter and get notification to stay update.

राज्यों की सूची