मुंबई, 29 सितंबर (कृषि भूमि ब्यूरो):
महाराष्ट्र के ठाणे जिले में 548 किसान आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं क्योंकि उन्हें अभी तक अपनी बेची गई धान की फसल का भुगतान नहीं मिला है। इन किसानों ने सरकारी खरीद केंद्रों पर महीनों पहले धान की बिक्री की थी, लेकिन भुगतान अब तक उनके खातों में नहीं पहुंचा है।
किसानों का कहना है कि उन्होंने सभी ज़रूरी दस्तावेज़ समय पर जमा किए थे, लेकिन फिर भी भुगतान में अनावश्यक देरी हो रही है। कृषि उपज मंडी समिति (APMC) और स्थानीय खरीद एजेंसियों ने अब तक स्पष्ट जवाब नहीं दिया है।
“हमने धान बेचकर उम्मीद की थी कि त्योहार से पहले घर के खर्च पूरे होंगे, लेकिन अब उधारी लेकर काम चला रहे हैं,” – सुभाष पाटिल, किसान, भिवंडी तहसील।
इस मुद्दे को लेकर किसानों ने ठाणे ज़िला कलेक्ट्रेट और APMC दफ्तर के बाहर प्रदर्शन भी किया। कुछ किसान संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि 7 दिन के भीतर भुगतान नहीं हुआ, तो वे रेल रोको और सड़क जाम जैसे आंदोलन करेंगे। स्थानीय विधायक और जनप्रतिनिधियों पर भी इस मामले में हस्तक्षेप का दबाव बढ़ रहा है।
राज्य सरकार के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि तकनीकी त्रुटियों और खातों के सत्यापन में देरी के कारण भुगतान रोका गया है, लेकिन इसे जल्द सुलझा लिया जाएगा।
धान की फसल पर किसानों की सालभर की मेहनत टिकी होती है। भुगतान में देरी के कारण किसान कर्ज़ चुकाने में असमर्थ हैं और परिवार के रोज़मर्रा के खर्च पूरे करना भी मुश्किल हो रहा है।
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