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Kila Raipur Rural Olympics 2026: 12 साल बाद ग्रामीण ओलंपिक में लौटी बैलगाड़ी दौड़, पंजाब की ग्रामीण विरासत हुई जीवंत

चंडीगढ़, 18 फरवरी (कृषि भूमि ब्यूरो): पंजाब की लोक-संस्कृति और ग्रामीण खेलों की पहचान माने जाने वाले किला रायपुर ग्रामीण ओलंपिक-2026 की मंगलवार को भव्य शुरुआत हुई। इस आयोजन का सबसे बड़ा आकर्षण 12 साल के लंबे अंतराल के बाद बैलगाड़ी दौड़ों की ऐतिहासिक वापसी रही, जिसने दर्शकों में जबरदस्त उत्साह भर दिया। लुधियाना जिले के किला रायपुर गांव स्थित खेल स्टेडियम में सुबह से ही भीड़ उमड़ पड़ी, जहां पंजाब ही नहीं, बल्कि आसपास के राज्यों और विदेशों से आए दर्शकों ने भी इस पारंपरिक खेल का आनंद लिया।

ग्रामीण ओलंपिक का उद्घाटन पंजाब के कैबिनेट मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने किया। इस अवसर पर विधायक जीवन सिंह संगोवाल और डॉ. के.एन.एस. कंग भी मौजूद रहे। मंत्री खुड्डियां ने कहा कि बैलगाड़ी दौड़ पंजाब की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न हिस्सा रही है, जिसका ग्रामीण जीवन से गहरा संबंध है। उन्होंने इसे केवल खेल नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा बताया।

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कानून संशोधन से खुला रास्ता

बैलगाड़ी दौड़ों की वापसी को संभव बनाने का श्रेय मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान को देते हुए मंत्री खुड्डियां ने कहा कि ‘पंजाब प्रिवेंशन ऑफ क्रुएल्टी टू एनिमल्स (पंजाब संशोधन) अधिनियम, 2025’ को विधानसभा में सर्वसम्मति से पारित कर कानूनी अड़चनों को दूर किया गया। इस कानून में पशुओं की सुरक्षा के लिए स्पष्ट मानक तय किए गए, जिससे बैलगाड़ी दौड़ों का सुरक्षित और वैधानिक आयोजन संभव हो सका।

कार्यक्रम के दौरान कैबिनेट मंत्री ने किला रायपुर क्षेत्र में पशुओं के बेहतर इलाज के लिए 30 लाख रुपये की ग्रांट देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि खेलों के साथ-साथ पशुओं के स्वास्थ्य और सुरक्षा को प्राथमिकता देना सरकार की जिम्मेदारी है।

पारंपरिक खेलों का संगम

19 फरवरी तक चलने वाले किला रायपुर ग्रामीण ओलंपिक में बैलगाड़ी दौड़ के साथ-साथ कबड्डी, हॉकी, एथलेटिक्स, साइक्लिंग, रस्साकशी और अन्य पारंपरिक खेलों का आयोजन किया जा रहा है। बड़ी संख्या में बैलगाड़ी मालिक और खिलाड़ी प्रदेश भर से यहां पहुंचे हैं, जबकि बुजुर्गों, युवाओं और बच्चों की मौजूदगी ने आयोजन को उत्सव का रूप दे दिया।

ग्रामीण खेल संस्कृति को नई ऊर्जा

ग्रामीण ओलंपिक में बैलगाड़ी दौड़ की वापसी को पंजाब की ग्रामीण खेल संस्कृति के पुनर्जीवन के रूप में देखा जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह आयोजन न केवल छिपी हुई प्रतिभाओं को मंच देता है, बल्कि युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का भी काम कर रहा है।

किला रायपुर ग्रामीण ओलंपिक-2026 ने यह साबित कर दिया कि परंपरा और आधुनिकता साथ-साथ चल सकती हैं। बैलगाड़ी दौड़ों की वापसी ने न केवल खेल प्रेमियों को रोमांचित किया है, बल्कि पंजाब की समृद्ध ग्रामीण विरासत को भी एक नई पहचान दी है।

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