मुंबई, 13 नवंबर (कृषि भूमि ब्यूरो): कर्नाटक में गन्ना किसानों (Ganna Kisan) का गुस्सा अब चरम पर है। बागलकोट (Bagalkot) जिले के प्रमुख चीनी उत्पादक क्षेत्रों में गन्ना किसान महासंघ (Ganna Kisan Mahasangh) के नेतृत्व में बड़ा विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया है। इन किसानों की मांग है की, उन्हें अपनी फसल के लिए ₹3500 प्रति टन का उचित और लाभकारी मूल्य (FRP – Fair and Remunerative Price) मिलना चाहिए। वर्तमान गन्ना मूल्य (Ganna Mulya) से काफी अधिक है। चीनी मिलों (Suger Mills) और राज्य सरकार के बीच फंसे किसान अब सड़कों पर उतर आए हैं, जिससे कर्नाटक किसान आंदोलन (Karnataka Kisan Andolan) एक बार फिर सुर्खियों में है।

FRP क्या है और किसान ₹3500 क्यों मांग रहे हैं?

FRP (Fair and Remunerative Price) वह न्यूनतम मूल्य है जो केंद्र सरकार चीनी मिलों को गन्ना किसानों को देने के लिए अनिवार्य करती है। हालांकि, किसान संगठन तर्क दे रहे हैं कि केंद्र द्वारा निर्धारित मौजूदा FRP उनके उत्पादन लागत (Production Cost) को देखते हुए बहुत कम है। गन्ना किसान का कहना है कि वर्तमान दरों पर गन्ना उगाना अब घाटे का सौदा बन चुका है।

  • बढ़ती लागत का दबाव: पिछले कुछ वर्षों में गन्ना उगाने की लागत (जैसे डीजल, खाद, कीटनाशक, और कृषि श्रमिकों की मजदूरी) में भारी वृद्धि हुई है। किसान कहते हैं कि गन्ना मूल्य में उस अनुपात में वृद्धि नहीं हुई है। इसलिए, अपनी आर्थिक स्थिरता बनाए रखने और परिवार का भरण-पोषण करने के लिए उन्हें कम से कम ₹3500 प्रति टन की आवश्यकता है।
  • अन्य राज्यों से तुलना: कई किसान यह भी बताते हैं कि, पड़ोसी राज्यों जैसे महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में राज्य सरकारें अक्सर FRP के ऊपर SAP (State Advised Price) के माध्यम से अतिरिक्त भुगतान सुनिश्चित करती हैं। जिससे वहाँ के गन्ना किसानों को बेहतर मूल्य मिलता है। कर्नाटक के किसान भी अपने लिए ऐसी ही सरकारी नीति और समर्थन की मांग कर रहे हैं।
  • चीनी मिलों पर आरोप: किसानों का आरोप है कि चीनी मिलें (Sugar Mills) बाजार में चीनी को ऊंचे दामों पर बेचकर और इथेनॉल (Ethanol) उत्पादन से भारी मुनाफा कमा रही हैं। लेकिन उस मुनाफे का उचित हिस्सा किसानों तक नहीं पहुंच रहा है। इसलिए ₹3500 प्रति टन की मांग गन्ना किसान के लिए आर्थिक न्याय का सवाल है।

बागलकोट बना केंद्र:

बागलकोट, जो कर्नाटक के सबसे बड़े गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में से एक है, इस विरोध का केंद्र बना हुआ है। किसान महासंघ ने अपनी मांगों को मनवाने के लिए आक्रामक रणनीति अपनाई है, जिससे क्षेत्र में कानून व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है:

  1. मिलों का घेराव: बागलकोट और आसपास के जिलों की कई चीनी मिलों के गेट पर किसानों ने बड़ी संख्या में विरोध प्रदर्शन किया है। गन्ना आपूर्ति को रोक दिया गया है। जिससे मिलों का संचालन बुरी तरह प्रभावित हुआ है और चीनी उद्योग (Cheeni Udhyog) में तनाव है।
  2. सड़क जाम और अवरोध: किसानों ने अपनी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और मानव श्रृंखला के माध्यम से प्रमुख राजमार्गों और एक्सप्रेसवे पर अवरोध (Blockade) डालकर सड़क जाम किया है। उनका लक्ष्य राज्य सरकार और जनता का ध्यान अपनी गंभीर मांगों की ओर आकर्षित करना है।
  3. आर-पार की लड़ाई: किसान नेताओं ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक सरकार उन्हें लिखित में ₹3500 प्रति टन FRP या कोई उचित वैकल्पिक मूल्य देने का ठोस आश्वासन नहीं देती, तब तक आंदोलन और विरोध जारी रहेगा।

इस विरोध के कारण चीनी उद्योग के इस महत्वपूर्ण क्रशिंग सीजन में उत्पादन (Utpadan) पर गंभीर संकट मंडरा रहा है।

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