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भारत–अमेरिका ट्रेड डील: दालों पर आयात शुल्क घटाने के संकेत, किसानों की चिंता बढ़ी

नई दिल्ली, 11 फरवरी (कृषि भूमि ब्यूरो): भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार को लेकर एक महत्वपूर्ण लेकिन विवादास्पद घटनाक्रम सामने आया है। व्हाइट हाउस की ओर से 9 फरवरी को जारी फैक्ट शीट में दावा किया गया है कि भारत अमेरिकी कृषि उत्पादों पर आयात शुल्क घटाने या समाप्त करने पर सहमत हुआ है। इस सूची में “कुछ दालें (certain pulses)” भी शामिल हैं, जो अब तक भारत–अमेरिका वार्ताओं में सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई थीं।

यह घटनाक्रम इसलिए अहम है क्योंकि 6 फरवरी को जारी भारत–अमेरिका के संयुक्त बयान में दालों जैसे संवेदनशील कृषि उत्पादों का कोई उल्लेख नहीं था। संयुक्त बयान डोनाल्ड ट्रंप और नरेंद्र मोदी के बीच बातचीत के बाद जारी किया गया था।

व्हाइट हाउस फैक्ट शीट में क्या कहा गया

व्हाइट हाउस की फैक्ट शीट के अनुसार, भारत अमेरिका से आने वाले औद्योगिक और खाद्य एवं कृषि उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला पर शुल्क कम या समाप्त करेगा। इसमें सूखे डिस्टिलर्स अनाज (DDGs), लाल ज्वार, ट्री नट्स, ताजे और प्रसंस्कृत फल, चुनिंदा दालें, सोयाबीन तेल, वाइन और स्पिरिट जैसे उत्पाद शामिल हैं।

फैक्ट शीट में शामिल प्रमुख कृषि उत्पाद

श्रेणीउत्पाद
अनाजलाल ज्वार, DDGs
दलहनकुछ चुनिंदा दालें
खाद्य तेलसोयाबीन तेल
फलताजे व प्रसंस्कृत
अन्यट्री नट्स, वाइन, स्पिरिट

500 बिलियन डॉलर की खरीद में कृषि उत्पाद भी शामिल

फैक्ट शीट में एक और अहम संकेत यह है कि भारत द्वारा अमेरिका से की जाने वाली संभावित 500 बिलियन डॉलर की खरीद में अब कृषि उत्पादों को भी शामिल बताया गया है। इससे पहले इस बड़े व्यापार लक्ष्य में कृषि उत्पादों का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया था।

इसी दस्तावेज़ में यह भी कहा गया है कि भारत ने रूस से तेल खरीद बंद करने की प्रतिबद्धता जताई है, जिसके बाद 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ हटाया गया। यानी रूस से तेल आयात का मुद्दा भी इस व्यापार समझौते से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ दिखाई देता है।

विरोधाभास और किसानों की चिंता

एक ओर व्हाइट हाउस की फैक्ट शीट दालों और कृषि उत्पादों पर शुल्क कटौती की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर भारत सरकार के मंत्रियों के सार्वजनिक बयानों में इस पर स्पष्टता नहीं है। इसी विरोधाभास ने घरेलू किसानों और कृषि संगठनों की चिंता बढ़ा दी है।

भारत में दालें केवल एक कृषि उत्पाद नहीं, बल्कि खाद्य सुरक्षा और किसानों की आय से सीधे जुड़ा विषय हैं। सस्ती आयातित दालें आने से घरेलू बाजार में कीमतों पर दबाव पड़ सकता है, जिसका असर सीधे दलहन किसानों पर पड़ेगा।

औपचारिक स्पष्टीकरण कब?

फिलहाल दालों के आयात को लेकर दोनों देशों के बीच शर्तों और मात्रा की बारीकियां पूरी तरह साफ नहीं हैं। आने वाले दिनों में भारत सरकार की ओर से इस मुद्दे पर औपचारिक स्पष्टीकरण आने की संभावना है।

कृषि क्षेत्र से जुड़े संगठनों की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या दालों को वास्तव में व्यापार समझौते में शामिल किया गया है, या यह केवल अमेरिकी पक्ष की व्याख्या है।

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