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West Asia Crisis: डेयरी सेक्टर पर संकट, जल्द महंगे हो सकते हैं दूध, दही और पनीर

नई दिल्ली, 04 अप्रैल (कृषि भूमि ब्यूरो): West Asia Crisis Impact: पश्चिम एशिया में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव का असर अब भारत के डेयरी सेक्टर पर साफ दिखने लगा है। सप्लाई चेन में व्यवधान, पैकेजिंग लागत में भारी बढ़ोतरी, मांग में गिरावट और मजदूरों की कमी ने प्राइवेट डेयरी कंपनियों के मुनाफे पर सीधा असर डाला है।

उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि कंपनियां फिलहाल इस बढ़ी हुई लागत को खुद वहन कर रही हैं, लेकिन यदि स्थिति जल्द नहीं सुधरी तो आने वाले 3 से 4 हफ्तों में उपभोक्ताओं को दूध, दही और पनीर महंगे दामों पर खरीदने पड़ सकते हैं।

लागत का बड़ा हिस्सा दूध खरीद में

India Dairy Sector Impact West Asia Crisis -KBडेयरी उद्योग की लागत संरचना पहले से ही संवेदनशील रही है। कंपनियों की कुल आय का लगभग 70% हिस्सा किसानों से दूध खरीदने में खर्च होता है। शेष 25 से 30 प्रतिशत में पैकेजिंग, प्रोसेसिंग, परिवहन और अन्य परिचालन खर्च शामिल होते हैं।

West Asia Crisis- उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार यदि दूध की लागत 50 रुपये है, तो लगभग 44 से 44.50 रुपये सीधे किसानों को जाते हैं, जबकि 5.50 रुपये लॉजिस्टिक्स और कोल्ड स्टोरेज पर खर्च होते हैं। कंपनियों का मुनाफा इसी सीमित हिस्से में आता है, जो अब तेजी से घट रहा है।

पैकेजिंग लागत बनी सबसे बड़ी चुनौती

डेयरी कंपनियों के लिए सबसे बड़ा संकट पैकेजिंग लागत में तेज उछाल है। जहां पहले पैकेजिंग का खर्च कुल कीमत का लगभग 5% होता था, वहीं अब छोटे पैकेट वाले उत्पादों में यह बढ़कर 20 से 30% तक पहुंच गया है।

हालिया आंकड़ों के अनुसार:

  • पॉलीमर पैकेजिंग की कीमत 47% तक बढ़ी है
  • केमिकल और लुब्रिकेंट्स 23% महंगे हुए हैं
  • लोहे और टिन कंटेनरों के दाम 35-40% तक बढ़े हैं
  • ग्लास पैकेजिंग 45% तक महंगी हो गई है

West Asia Crisis के बीच सप्लाई में देरी भी एक बड़ी समस्या बन गई है, जिससे उत्पादन चक्र प्रभावित हो रहा है।

मांग में गिरावट से बढ़ी परेशानी

होटल, रेस्टोरेंट और कैटरिंग सेक्टर से आने वाली मांग में भारी गिरावट दर्ज की गई है। खासकर छोटे ढाबों और कमर्शियल गैस पर निर्भर व्यवसायों ने डेयरी उत्पादों की खरीद कम कर दी है।

West Asia Crisis के बीच कुछ कंपनियों ने बताया है कि:

  • होटल और कैटरिंग सेक्टर में बिक्री 50% से ज्यादा गिर गई
  • बेकरी सप्लाई लगभग पूरी तरह ठप हो गई
  • कुल बिक्री पर 20-25% तक असर पड़ा

इसका सीधा असर किसानों पर भी पड़ रहा है, जिन्हें बढ़ती लागत के बावजूद दूध का उचित दाम नहीं मिल रहा।

मजदूरों की कमी ने बढ़ाई चुनौती

होली और ईद के बाद बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर काम पर वापस नहीं लौटे हैं। कोविड काल की पुरानी आशंकाओं के चलते श्रमिकों में अभी भी असुरक्षा की भावना बनी हुई है।

कंपनियां अब मजदूरों को वापस लाने के लिए मुफ्त आवास और भोजन जैसी सुविधाएं देने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन स्थिति अभी भी सामान्य नहीं हो पाई है।

West Asia Crisis:क्या होगा महंगा?

नीचे दी गई तालिका संभावित मूल्य वृद्धि को दर्शाती है:

उत्पादसंभावित बढ़ोतरी
पनीर4% – 5%
दही7% – 9%
छाछ/लस्सी7% – 9%
दूधसीमित लेकिन संभव

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लागत का दबाव जारी रहता है, तो कंपनियां जल्द ही कीमतों में बढ़ोतरी करने को मजबूर होंगी।

आम उपभोक्ताओं पर असर तय

फिलहाल डेयरी कंपनियां नुकसान सहते हुए कीमतें स्थिर रखने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन यह स्थिति ज्यादा समय तक नहीं टिकेगी। अगले कुछ हफ्तों में उपभोक्ताओं की जेब पर इसका असर दिखना तय माना जा रहा है।

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