नई दिल्ली, 16 फरवरी (कृषि भूमि ब्यूरो): गोल्ड को दशकों से सेफ हेवन एसेट माना जाता रहा है, लेकिन हालिया घटनाक्रम ने इसकी इस पहचान पर सवाल खड़े कर दिए हैं। 29 जनवरी को सोने के भाव प्रति औंस $5,594 के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचे, लेकिन अगले ही सत्र में करीब 10% की गिरावट दर्ज की गई। इतना तेज उतार-चढ़ाव आमतौर पर उन एसेट्स में नहीं देखा जाता जिन्हें जोखिम से बचाव का जरिया माना जाता है।
निवेशकों और पॉलिसी मेकर्स के बीच अब यह चर्चा तेज है कि क्या गोल्ड में स्पेक्युलेटिव फ्लो हावी हो गया है और क्या इसकी कीमतें अब पारंपरिक फंडामेंटल्स से ज्यादा ट्रेडिंग बिहेवियर से तय हो रही हैं। गोल्ड में रिकॉर्ड तेजी के बाद संशय की स्थिति क्यों बढ़ रही है?

अमेरिका की चिंता: गोल्ड में अव्यवस्थित मूवमेंट
अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी Scott Bessent ने फॉक्स न्यूज के कार्यक्रम Sunday Morning Futures में गोल्ड की कीमतों में आई तेज उठा-पटक को “अव्यवस्थित” करार दिया। उनके अनुसार यह उतार-चढ़ाव चीन के फाइनेंशियल मार्केट्स में बढ़ती अस्थिरता को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि चीन में गोल्ड ट्रेडिंग के दौरान मार्जिन की जरूरतों को बार-बार सख्त करना पड़ रहा है, जो इस बात का संकेत है कि बाजार में हद से ज्यादा लीवरेज और सट्टेबाजी बढ़ गई है। उनके मुताबिक मौजूदा हालात एक क्लासिकल स्पेक्युलेटिव ब्लो-ऑफ जैसे नजर आते हैं।
चीन बना तेजी का सबसे बड़ा इंजन
एमकेएकस पैम्प की प्रमुख (रिसर्च और मेटल्स स्ट्रैटेजी) Nicky Shiels ने कहा है कि इस चक्र में गोल्ड की तेजी का सबसे बड़ा कारण चीन की मांग है। यह मांग केवल ज्वेलरी या रिजर्व तक सीमित नहीं है, बल्कि ईटीएफ, फ्यूचर्स और फिजिकल बार के जरिए बड़े पैमाने पर स्पेक्युलेटिव इनफ्लो देखने को मिल रहा है।
कैपिटल इकोनॉमिक्स के अनुसार 2025 की शुरुआत से अब तक चाइनीज गोल्ड ETF होल्डिंग्स दोगुनी से ज्यादा हो चुकी हैं। इसके साथ ही सोने के फ्यूचर्स में ओपन इंटरेस्ट और ट्रेडिंग एक्टिविटी भी तेजी से बढ़ी है।
शंघाई फ्यूचर्स एक्सचेंज पर असाधारण गतिविधि
चीन के गोल्ड मार्केट की हलचल का अंदाजा शंघाई फ्यूचर्स एक्सचेंज (SHFE) के आंकड़ों से लगाया जा सकता है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के रे जिया के मुताबिक 2025 में औसतन रोजाना 457 टन का ट्रेड होता था, जबकि मौजूदा साल में यह बढ़कर 540 टन प्रतिदिन तक पहुंच गया है।
यह बढ़ता वॉल्यूम इस बात का संकेत देता है कि गोल्ड अब सिर्फ लॉन्ग-टर्म होल्डिंग नहीं, बल्कि हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग और शॉर्ट-टर्म बेट्स का भी केंद्र बनता जा रहा है।
डी-डॉलराइजेशन और रणनीतिक खरीद
गोल्ड की मांग के पीछे एक बड़ा रणनीतिक पहलू भी है। चाइना मार्केट रिसर्च ग्रुप के फाउंडर और एमडी Shaun Rein का कहना है कि चीन अमेरिकी आर्थिक और वित्तीय दबाव के जोखिम को कम करने के लिए डी-डॉलराइजेशन की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
अमेरिकी ट्रेजरी के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार नवंबर 2025 में चीन की अमेरिकी ट्रेजरी होल्डिंग्स घटकर $682 अरब रह गईं, जो साल-दर-साल आधार पर 11% की गिरावट है। इसके उलट People’s Bank of China ने लगातार 15 महीनों तक अपने गोल्ड रिजर्व में बढ़ोतरी की है, जो अब करीब 2,300 टन तक पहुंच चुका है।
घरेलू निवेशक क्यों गोल्ड की ओर भाग रहे हैं?
एएनजेड रिसर्च के सीनियर चाइना स्ट्रैटेजिस्ट Zhaopeng Xing के मुताबिक चीन में घरेलू निवेशकों के पास वैकल्पिक निवेश विकल्प सीमित होते जा रहे हैं। बैंक डिपॉजिट्स पर ब्याज दरें करीब 1% के आसपास हैं और रियल एस्टेट बाजार में कीमतें दबाव में हैं।
ऐसे में गोल्ड न केवल सुरक्षित, बल्कि तुलनात्मक रूप से बेहतर रिटर्न देने वाला विकल्प बनकर उभरा है। फिलहाल चीनी हाउसहोल्ड एसेट्स में गोल्ड की हिस्सेदारी करीब 1% है, जिसे आने वाले वर्षों में 5% तक जाने की संभावना जताई जा रही है।
आगे क्या: सेफ हेवन या स्पेक्युलेटिव बबल?
कैपिटल इकोनॉमिक्स के इकनॉमिस्ट Hamad Hussain का मानना है कि फ्यूचर्स और ETFs में बढ़ती भागीदारी ने गोल्ड की अस्थिरता को संरचनात्मक रूप से बढ़ा दिया है। उनका कहना है कि लेवरेज का बढ़ता इस्तेमाल आम तौर पर उन निवेशकों का व्यवहार नहीं होता जो केवल सुरक्षा की तलाश में होते हैं।
उनके अनुसार मौजूदा ट्रेंड पहले के गोल्ड रैलियों से अलग है और अगर यह रफ्तार बनी रही तो स्पेक्युलेटिव बबल बनने का जोखिम बढ़ सकता है।
प्रमुख अपडेटेड आंकड़े
| संकेतक | स्थिति |
|---|---|
| गोल्ड का हालिया रिकॉर्ड | $5,594 प्रति औंस |
| एक दिन की गिरावट | ~10% |
| चाइनीज गोल्ड ETF होल्डिंग्स | 2025 की शुरुआत से >2x |
| चीन की US ट्रेजरी होल्डिंग्स | $682 अरब |
| PBoC का गोल्ड रिजर्व | ~2,300 टन |
| SHFE औसत दैनिक ट्रेडिंग | 540 टन |
कुलमिलाकर, गोल्ड ने अभी भी वैश्विक अनिश्चितता के दौर में अपनी अहमियत पूरी तरह नहीं खोई है, लेकिन हालिया घटनाक्रम साफ संकेत देते हैं कि इसकी कीमतों में स्पेक्युलेटिव एलिमेंट पहले से कहीं ज्यादा हावी हो गया है। चीन की आक्रामक खरीद, फ्यूचर्स और ETFs में बढ़ता लेवरेज तथा अमेरिका की खुली चिंता यह दिखाती है कि गोल्ड अब सिर्फ सेफ हेवन नहीं, बल्कि एक हाई-वोलैटिलिटी एसेट भी बनता जा रहा है। ऐसे माहौल में निवेशकों के लिए जोखिम प्रबंधन और संतुलित रणनीति पहले से ज्यादा जरूरी हो गई है।
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