धान की बेहतर फसल के लिए करें इन किस्मो का प्रयोग, पैदावार के साथ बढ़ेगा मुनाफा

हमारे देश के कृषि वैज्ञानिकों ने धान कई प्रकार की किस्मों का निर्माण किया है। ये सभी धान की उन्नतशील किस्मे हैं। जो प्रायः बेहतर उत्पादन देती हैं। वैज्ञानिकों द्वारा खोजी गई नई किस्मों में कीट पतवार की लगने की सम्भवना कम होती है और पैदावार भी ज्यादा होती है ।

 

जलवायु परिवर्तन के चलते देश में धान की पैदावार किसान और सरकार के लिए सबब बन गया है। बारिश की कमी से घटता जलस्तर चिंता का विषय बना हुआ है। देश की बढ़ती जनसँख्या खाद्य सुरक्षा के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। इस बात के क्याश लगाए जा रहे हैं की अल नीनो के कारण मानसून में बदलाव देखने को मिल सकता हैं। इसका सीधा असर खरीफ के सीजन में की जाने वाली बुवाई पर पड़ सकता हैं। इन हालातों के मद्देनजर केंद्रीय मंत्री ने ख़राब मौसम में सतर्क रहने की सलाह दी हैं।

धान की खेती के लिए कृषि वैज्ञानिकों ने कई प्रकार की नई किस्मे विकसित की हैं जो कम पानी में भी बेहतर उत्पादन दे सकती हैं। तो आइये विस्तार से जानते हैं की नई किस्मे कौन सी हैं जिनकी खोज वैज्ञानिकों ने की हैं।

पूसा 834  बासमती धान ( PUSA 834 Basmati Paddy Variety )

पूसा 834 बासमती चावल की सबसे उन्नतशील किस्म हैं इसमें पैदावार ज्यादा होती हैं, इसे भारतीय कृषि अनुसन्धान संसथान ने विकसित किया है। यह एक ज्यादा उपज देने वाली अर्ध बौनी किस्म है, इसमें फसल 125-130 दिनों में पक जाती है। इसकी फसल में जीवाडु पत्ती झुलसा रोग के प्रति अधिक प्रतिरोधी होती हैं जो धान की फसल के लिए सबसे बड़ी समस्या होती है। यह उच्च लवणता वाली मिट्टी में भी कारगर है। यह किसानो के लिए एक अच्छा विकल्प है जो कम गुणवत्ता वाली मिट्टी और पानी की कमी वाले क्षेत्रो में इसकी बुवाई की जा सकती है । पूसा 834 की उत्पादन छमता ज्यादा है इसमें प्रति हेक्टेयर 6-7 टन धान का उत्पादन किया जा सकता है बासमती चावल की अन्य किस्मों से ज्यादा है।

पंत धान 12 (Pant Paddy-12 Variety)

पंत धन 12 किस्म है जो अधिक उपज देने वाली किस्म है, इस किस्म को भारतीय कृषि अनुसन्धान परिषद ने विकसित किया है । यह 105-110 दिनों में पकने वाली एक अर्ध-बौनी किस्म है और यह उत्तर भारत के सिंचित क्षेत्रों में खेती के लिए अनुकूल है। पंत धान की सबसे बड़ी विशेषता यह है की इसकी उपज अन्य किस्मों से ज्यादा है, किसान धान की इस किस्म की बुवाई करके 7-8 टन प्रति  हेक्टेयर का उत्पादन कर सकते हैं।

PHB 71 (PHB 71 Paddy Variety)

PHB 71 चावल की अधिक उत्पादन वाली किस्म है जिसको फिलीपीन्स के अंतरास्ट्रीय चावल अनुसन्धान ने विकसित किया है। इसकी फसल 110-115  दिनों में पक जाती है। यह फसल दक्षिण पूर्व और दक्षिण एशियाई देशो के सिंचित क्षेत्रो में खेती के लिए उपयुक्त है। PHB 71 का सबसे बड़ा फायदा यह है की इसमें फसल की उपज ज्यादा होती है। किसान इसमें 6-7 टन प्रति हेक्टेयर का उत्पादन कर सकते हैं। जो पारम्परिक चावल के उत्पादन की तुलना में अधिक है। PHB 71 का दूसरा फायदा यह है की इसकी ब्लास्ट रोग प्रतिरोधक छमता ज्यादा है। जो धान की खेती के लिए एक बाधा है। यह बैक्टेरियल लीफ और टुंगो जैसे अन्य वायरसों के प्रति कारगर है जो की धान की फसल के लिए उत्पादन में बाधा बन सकते हैं।

SKST-K धान (SKST-K Paddy Variety)

SKST-K धान भारत में सबसे अधिक उत्पादन और बुवाई की जाने वाली फसल है जिसे भारत के शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञानं और प्रौद्योगिकी विश्ववद्यलय ने विकसित किया था। धान की यह किस्म 135-140 दिनों मे तैयार हो जाती है। यह किस्म जम्मू-कश्मीर के सिंचित क्षेत्रो में खेती करने के लिए उपयुक्त है । SKST-K धान की उच्च विशेषता यह है की इसमें प्रति हेक्टेयर 6-7 टन का उत्पादन किया जा सकता है। यह  पारम्परिक चावल की किस्मो की तुलना में अधिक उत्पादक है।SKUAST-K का एक अन्य लाभ इसकी सहनशीलता है जो सूखा, जलमग्नता और लवणता जैसे विभिन्न तनावों के प्रति होती है। इससे यह उन किसानों के लिए पसंदीदा विकल्प बनता है जा रहा है जो अपने क्षेत्रों में पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।

PUSA-1401 बासमती चावल( Pusa-1401 Basmati Paddy Variety)

PUSA-1401 बस्वटी चावल की अधिक उत्पादन वाली किस्म है जिसको भारतीय कृषि अनुसन्धान ( आईएआरआई) की मदद से भारतीय कृषि अनुसन्धान परिषद ने विकसित किया है। PUSA-1401 प्रायः अर्ध बौनी किस्म है ये 135-140 दिनों में तैयार हो जातीं है। यह फसल उत्तर प्रदेश के खेतों के लिए उपयुक्त है। PUSA-1401 की उत्पादन छमता ज्यादा है इसकी पैदावार छमता 4-5 टन प्रति हेक्टेयर है। यह पारम्परिक बासमती चवल की किस्मों से अधिक उत्पादक है।PUSA-1401 का एक अन्य लाभ यह है कि यह एक उच्च गुणवत्ता वाला अनाज है, इसके दाने लंबे और पतले होते हैं। इसकी खुशबू काफी अच्छी होती है और  पकाने के गुण अच्छे होते हैं। पूसा-1401 को विभिन्न जैविक और अजैविक तनावों के प्रति इसकी सहनशीलता के कारण भी पहचाना जाता है, जैसे कि बैक्टीरियल लीफ ब्लाइट, ब्लास्ट रोग, और लवणता आदि।

 

 

 

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