नई दिल्ली, 03 फरवरी (कृषि भूमि ब्यूरो): केंद्र सरकार पर खाद्य सब्सिडी – Food Subsidy – का बोझ अगले वित्त वर्ष में और बढ़ सकता है। सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, भारतीय खाद्य निगम (FCI) के पास तय मानकों से कहीं ज्यादा अनाज का भंडार बना हुआ है, जिसके चलते 2026-27 में खाद्य सब्सिडी के बजट में करीब ₹25,000 करोड़ की अतिरिक्त बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है।
सरकार ने अगले वित्त वर्ष के लिए खाद्य सब्सिडी का शुरुआती अनुमान ₹2.27 लाख करोड़ रखा है, लेकिन यदि अनाज का स्टॉक मौजूदा स्तर पर बना रहता है, तो इस आवंटन को और बढ़ाना होगा। अधिकारियों का कहना है कि अनाज की खरीद, भंडारण और ढुलाई की लागत लगातार बढ़ रही है, जिससे सब्सिडी का दबाव और गहराता जा रहा है।
बढ़ती लागत ने बढ़ाई चिंता
अनुमान है कि 2026-27 में FCI के लिए चावल की आर्थिक लागत (MSP, भंडारण और परिवहन खर्च मिलाकर) ₹4,391 प्रति क्विंटल तक पहुंच जाएगी, जो पिछले वर्ष ₹4,211 प्रति क्विंटल थी। इसी तरह गेहूं की लागत ₹2,968 से बढ़कर ₹3,145 प्रति क्विंटल होने की उम्मीद है। लागत में यह बढ़ोतरी सीधे तौर पर सरकार के सब्सिडी बिल को बढ़ा रही है।
खाद्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में भी सरकार को खाद्य सब्सिडी का बजट ₹2.03 लाख करोड़ से बढ़ाकर ₹2.28 लाख करोड़ करना पड़ा, ताकि FCI को अतिरिक्त कर्ज न लेना पड़े और सरप्लस स्टॉक का प्रबंधन किया जा सके।
तय सीमा से तीन गुना ज्यादा चावल का भंडार
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस समय केंद्रीय पूल में 33 मिलियन टन से ज्यादा चावल मौजूद है, जबकि जनवरी महीने के लिए बफर नॉर्म 7.61 मिलियन टन तय है। यानी चावल का स्टॉक जरूरत से करीब तीन गुना ज्यादा है। इसके अलावा, मिलरों से अभी लगभग 37 मिलियन टन अनाज और प्राप्त होना बाकी है, जिससे भंडार और बढ़ सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, हर साल MSP में 3% से 7% की बढ़ोतरी और किसानों से बड़े पैमाने पर खुली खरीद इस स्थिति की बड़ी वजह है। सरकार हर साल करीब 75 से 80 मिलियन टन अनाज खरीदती है, जिससे स्टॉक लगातार बढ़ता जा रहा है।
अनाज लागत तुलना (₹/क्विंटल)
| फसल | 2025-26 | 2026-27 (अनुमानित) |
|---|---|---|
| चावल | 4,211 | 4,391 |
| गेहूं | 2,968 | 3,145 |
81 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन जारी रहेगा
खाद्य सब्सिडी का बड़ा हिस्सा प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) पर खर्च होता है। इस योजना के तहत देश के करीब 81 करोड़ लोगों को हर महीने 5 किलो मुफ्त अनाज दिया जाता है। सरकार ने इस योजना को 2028 के अंत तक बढ़ा दिया है, जिससे अनुमान है कि पूरी अवधि में सरकारी खजाने पर ₹11.8 लाख करोड़ का खर्च आएगा।
FCI हर साल इस योजना के लिए लगभग 36–38 मिलियन टन चावल और 18–20 मिलियन टन गेहूं की आपूर्ति करता है।
खुले बाजार में रिकॉर्ड बिक्री के बावजूद दबाव
अनाज के बढ़ते भंडार को कम करने के लिए सरकार ने खुले बाजार में बिक्री भी तेज की है। वित्त वर्ष 2026 में अब तक 7.7 मिलियन टन अनाज खुले बाजार में बेचा जा चुका है, जो पिछले साल की 4.63 मिलियन टन की बिक्री से काफी ज्यादा है। इसके बावजूद बंपर खरीद और MSP में लगातार बढ़ोतरी के चलते स्टॉक कम होने के बजाय बढ़ता ही जा रहा है।
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