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केज कल्चर के माध्यम से पहली बार भारतीय पोम्पानो मछली की खेती

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उडपी : पोम्पानो मछली बहुत ही प्रसिद्ध और स्वाद में भी बेहतरीन होती है | पहली बार कर्नाटक के आयसीएआर – मरीन मत्स्य अनुसंधान संस्थान मंगलुरु के क्षेत्रीय सेंटर के वैज्ञानिकों ने सफलतापूर्वक इसको विकसित किया है। इस पद्धतिको विकसित करने के लिए केज कल्चर का उपयोग किया गया है |

केज कल्चर के माध्यम से पहली बार भारतीय पोम्पानो मछली की खेती कर्नाटक में सफलतापूर्वक कीपोम्पानो गई है | इस यात्रा की शुरुवात 2009-10 के दौरान हुई जब अनुसंधानकर्ताओं ने कर्नाटक के तटीय जिलों में केज की पद्धति को प्रस्तुत किया था। कई वर्षों के बाद इस तकनीक को मान्यता मिली और अब कर्नाटक के तटीय क्षेत्रों में लगभग 800-900 केज ( मछली पकड़ने वाले जाल) स्थापित किए गए हैं। केज पद्धति की सफलता की वजह से मत्स्य पालन विभाग कर्नाटक, राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड (एनएफडीबी) और अन्य संगठनों द्वारा इस क्षेत्र के 500 से भी अधिक परिवारों को लाभ मिला है |

सीजीपीआर-केंद्रीय मरीन मत्स्य अनुसंधान संस्थान के मंगलुरु क्षेत्रीय सेंटर में समुद्री बास, लाल रैड स्नैपर और स्नबनोज पोम्पानोजैसी प्रजातियों को लगभग दस वर्षों से केज में पाला गया। जिसके फलस्वरूप एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की गई है | पहली बार भारतीय पोम्पानो का उत्पादन सफलतापूर्वक किय गया है। इसका आरम्भ अनुसूचित जाति उपक्रम योजना (एससीएसपी) के तहत उडुपी जिले के पदूथोंसे गांव,स्वर्ण उद्यान में किया गया जिसका मुख्य उद्देश्य समावेशी विकास और पिछड़े समुदायों के आय के अवसरों को बढ़ावा देना है।

भारतीय पोम्पानो के बीज आईसीएआर-सीएमएफआरआई के विशाखा पट्टनम के क्षेत्रीय केंद्र के मरीन फिनफिश हैचरी से मंगवाई गई थी जिनकी लम्बाई 2-3 सेमी हैं। नवंबर 2022 में पदूथों में दो बनावटी केजों में 3-4 ग्राम का औसत वजन वाले 4,000 बीज स्टॉक किए गए थे । जहा फिंगर लिंग्स को स्थानिक स्थितियों में अनुकूलित किया गया था और प्रति क्यूबिक मीटर के लिए 40-50 मछलियों के स्टॉकिंग घनत्व के साथ केजों में डाला गया था । पोम्पानो फिंगर लिंग्स को दिन में दो बार खाना दिया जाता था उनका वजन उनके शरीर के 5 प्रतिशत था।

पांच महीनों के बाद मछलियों का वजन लगभग 400-450 ग्राम हो गया था जिससे कुल मिलाकर 1,300 किलो पोम्पानो का उत्पादन हुआ | सबसे महत्वपूर्ण बात यह नब्बे प्रतिशत मछलिया जीवित थी | बाजार में इन मछलियों का भाव प्रति किलो 450 से 490 रूपये है | इस में खास बात यह है की लाभार्थियों को आय के दुगुना मुनाफा मिला है | इस केज पद्धतिको ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने की संस्थान की पहल है |

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