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किसानों के लिए 25 लाख का दुर्घटना बीमा: राज्यसभा में राष्ट्रीय कृषि जोखिम बीमा प्राधिकरण के गठन की मांग

नई दिल्ली, 10 फरवरी (कृषि भूमि ब्यूरो): किसानों और खेतिहर मजदूरों की सुरक्षा को लेकर संसद में एक अहम पहल सामने आई है। राज्यसभा में किसानों के लिए यूनिवर्सल एक्सीडेंटल इंश्योरेंस से जुड़ा एक महत्वपूर्ण प्राइवेट मेंबर बिल पेश किया गया है। बीजेपी के राज्यसभा सांसद सतनाम सिंह संधू ने ‘किसान जीवन सुरक्षा एवं दुर्घटना प्रतिपूर्ति विधेयक, 2025’ पेश करते हुए किसानों को व्यापक दुर्घटना बीमा कवर देने की मांग की है।

इस बिल का उद्देश्य खेती को एक सुरक्षित पेशा बनाना और ग्रामीण परिवारों को अचानक आने वाले आर्थिक संकट से बचाना है। प्रस्ताव के तहत किसानों और कृषि मजदूरों के लिए अनिवार्य और किफायती यूनिवर्सल एक्सीडेंटल इंश्योरेंस योजना लागू करने की बात कही गई है।

 

 

 

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किसानों की सुरक्षा पर संसद में बड़ा प्रस्ताव

राष्ट्रीय कृषि जोखिम बीमा प्राधिकरण (NARIA) का प्रस्ताव

बिल में राष्ट्रीय कृषि जोखिम बीमा प्राधिकरण (NARIA) के गठन की मांग की गई है। यह एक स्वायत्त संस्था होगी, जो किसानों के लिए दुर्घटना बीमा योजना को डिजाइन करने, लागू करने और उसकी निगरानी का काम करेगी। प्रस्ताव के मुताबिक, यह प्राधिकरण केंद्र और राज्यों के साथ मिलकर योजना को प्रभावी रूप से लागू करेगा।

कितना मिलेगा मुआवजा?

स्थितिप्रस्तावित मुआवजा
दुर्घटना में मृत्यु₹25 लाख
स्थायी विकलांगता₹10 लाख
आंशिक विकलांगता₹1–2 लाख

इस योजना के तहत बीमा प्रीमियम पर केंद्र सरकार 60% और राज्य सरकारें 40% सब्सिडी देंगी, ताकि किसानों पर कोई अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े।

क्यों जरूरी है यह बीमा?

भारत में करीब 46% आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कृषि पर निर्भर है, लेकिन खेती को दुनिया के सबसे खतरनाक पेशों में गिना जाता है। हर साल खेती के दौरान 10,000 से 15,000 लोगों की मौत और हजारों गंभीर चोटें दर्ज की जाती हैं। इनमें हाथ से कटाई, कीटनाशकों का छिड़काव, भारी मशीनरी, पशुओं के साथ काम और अत्यधिक गर्मी या बाढ़ जैसे मौसम संबंधी खतरे शामिल हैं।

ऐसी दुर्घटनाएं अक्सर ग्रामीण परिवारों को कर्ज और गरीबी के चक्र में धकेल देती हैं।

मौजूदा योजनाएं क्यों नहीं हैं पर्याप्त?

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) फसल नुकसान तक सीमित है, जबकि प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY) सामान्य दुर्घटनाओं को कवर करती है। लेकिन कृषि से जुड़े विशिष्ट व्यावसायिक जोखिमों—जैसे खेत में काम करते समय होने वाली दुर्घटनाएं—के लिए कोई समर्पित और व्यापक व्यवस्था अब तक नहीं थी।

किसानों के लिए कितना अहम है यह कदम?

विशेषज्ञों का मानना है कि यह बिल लागू होता है तो यह किसानों और खेतिहर मजदूरों के लिए सामाजिक सुरक्षा की दिशा में बड़ा बदलाव ला सकता है। 25 लाख रुपये तक का दुर्घटना बीमा न केवल परिवारों को आर्थिक स्थिरता देगा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करेगा।

‘किसान जीवन सुरक्षा एवं दुर्घटना प्रतिपूर्ति विधेयक, 2025’ खेती से जुड़े जोखिमों को स्वीकार करते हुए किसानों की सुरक्षा को प्राथमिकता देता है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार इस प्रस्ताव पर आगे क्या रुख अपनाती है।

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