नई दिल्ली, 24 फरवरी (कृषि भूमि ब्यूरो): भारतीय कपास निगम Cotton Corporation of India (CCI) ने सोमवार को 2025-26 की फसल के लिए कपास के बिक्री रेट में एक और कटौती की घोषणा की है। निगम ने 356 किलो की प्रति कैंडी पर 700 रुपये से लेकर 1100 रुपये तक कीमतें घटाई हैं। यह फैसला मुख्य रूप से बाजार में सुस्त मांग के बीच बिक्री को बढ़ाने के उद्देश्य से लिया गया है।
दूसरी ओर, न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर कपास की सरकारी खरीद लगातार जारी है और यह आंकड़ा अब 98.9 लाख गांठ तक पहुंच गया है।
दो हफ्ते में दूसरी बार कीमतों में कटौती
सोमवार की यह कटौती पिछले दो हफ्तों में सीसीआई द्वारा उठाया गया दूसरा ऐसा कदम है। इससे पहले 10 फरवरी को निगम ने 1400 से 1700 रुपये प्रति कैंडी की बड़ी कटौती की थी। हालांकि, व्यापार और उद्योग जगत की ओर से उस समय भी अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं मिली।
बाजार से जुड़े जानकारों का मानना है कि मिलों और व्यापारियों की कमजोर खरीदारी के कारण ही सीसीआई को इतनी जल्दी दोबारा अपने बिक्री रेट में संशोधन करना पड़ा।
खुले बाजार के भाव कम, इसलिए खरीदारों की बेरुखी
विशेषज्ञों के अनुसार, खुले बाजार में कपास के भाव अभी भी सीसीआई की पेशकश से नीचे चल रहे हैं, जिस वजह से खरीदार सरकारी कपास के बजाय बाजार से खरीद को प्राथमिकता दे रहे हैं। कर्नाटक जैसे कुछ राज्यों में भले ही आवक घट गई हो, लेकिन महाराष्ट्र, गुजरात और तेलंगाना के कई हिस्सों में मंडियों में अभी भी कपास की आवक बनी हुई है।
सीसीआई के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक ललित कुमार गुप्ता ने बताया कि महाराष्ट्र और तेलंगाना जैसे राज्यों में निगम की खरीद जारी है और मौजूदा सीजन में MSP पर कुल खरीद 98.9 लाख गांठ तक पहुंच चुकी है।
मार्च के बाद बिक्री में तेजी की उम्मीद
चेयरमैन गुप्ता के अनुसार, सीसीआई द्वारा कीमतों में की गई कटौती अंतरराष्ट्रीय कीमतों के अनुरूप है और मार्च के बाद ही बिक्री में सुधार आने की संभावना है। सीसीआई ने 2025-26 की फसल की बिक्री 19 जनवरी से शुरू की थी, लेकिन अब तक केवल करीब 5 लाख गांठ की ही बिक्री होने का अनुमान है।
उद्योग जगत का मानना है कि घरेलू बाजार में उपलब्ध कपास और आयातित कपास की कीमतें अधिक आकर्षक होने के कारण सीसीआई की बिक्री पर असर पड़ा है।
विदेशी कपास सस्ती, घरेलू बाजार पर दबाव
रायचूर के सोर्सिंग एजेंट रामानुज दास बूब के मुताबिक, मौजूदा हालात में सीसीआई तब तक बिक्री नहीं बढ़ा पाएगा जब तक वह डिलीवरी अवधि को मौजूदा 30 दिनों से बढ़ाकर 60 या 90 दिन नहीं करता और कीमतों में 500 रुपये प्रति कैंडी की अतिरिक्त कटौती नहीं करता।
उन्होंने बताया कि फिलहाल बाजार भाव सीसीआई की कीमतों से 500 से 1000 रुपये नीचे चल रहे हैं।
घरेलू और आयातित कपास के ताजा भाव
| बाजार / स्रोत | कीमत |
|---|---|
| महाराष्ट्र–गुजरात (घरेलू) | ₹7,600 – ₹7,700 प्रति कैंडी |
| ब्राजील (आयातित, पोर्ट डिलीवरी) | ₹52,000 – ₹54,000 प्रति गांठ |
रिकॉर्ड आयात से बढ़ा सरप्लस का अनुमान
Cotton Association of India (CAI) के अनुसार, 2025-26 सीजन के लिए कपास उत्पादन 317 लाख गांठ रहने का अनुमान है, जबकि खपत 305 लाख गांठ आंकी गई है। जनवरी के अंत तक खपत 104 लाख गांठ तक पहुंच चुकी थी।
सीएआई ने सीजन के अंत में 122.59 लाख गांठ के सरप्लस का अनुमान जताया है, जो पिछले साल के मुकाबले करीब 56 प्रतिशत अधिक है। इसका प्रमुख कारण इस साल 50 लाख गांठ का रिकॉर्ड कपास आयात बताया जा रहा है। जनवरी के अंत तक आयात 35 लाख गांठ और निर्यात 6 लाख गांठ दर्ज किया गया था।
कुल मिलाकर, बाजार में सस्ती आयातित कपास, कमजोर मांग और ऊंचे स्टॉक के चलते सीसीआई को बार-बार कीमतों में कटौती करनी पड़ रही है। हालांकि MSP पर मजबूत खरीद किसानों को सहारा दे रही है, लेकिन वास्तविक बिक्री में सुधार मार्च के बाद ही देखने को मिल सकता है।
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