पटना, 30 जनवरी (कृषि भूमि ब्यूरो): बिहार के किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ अधिक पारदर्शी, आसान और समयबद्ध तरीके से दिलाने के लिए राज्य सरकार ने बड़ी पहल की है। मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने एग्रीस्टैक (AgriStack) परियोजना की समीक्षा के दौरान निर्देश दिया कि 2 से 6 फरवरी तक पूरे प्रदेश में मिशन मोड में किसान रजिस्ट्री का काम किया जाए। इस विशेष अभियान का लक्ष्य कम से कम समय में अधिक से अधिक किसानों को डिजिटल किसान रजिस्ट्री से जोड़ना है।
मुख्य सचिव ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिलाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि किसान आईडी राज्य की कृषि योजनाओं की रीढ़ बनेगी और इसमें किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
लक्ष्य पूरा करने पर जिलों को मिलेगा इनाम
काम में तेजी और प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए सरकार ने प्रोत्साहन की व्यवस्था भी की है। मुख्य सचिव के अनुसार, जो जिले पीएम-किसान योजना के लाभार्थियों का 50% रजिस्ट्रेशन पूरा कर लेंगे, उन्हें ₹1.5 लाख की पुरस्कार राशि दी जाएगी। वहीं, जिन जिलों के लिए 35% रजिस्ट्रेशन का लक्ष्य तय है, वे लक्ष्य पूरा करने पर ₹50 हजार की प्रोत्साहन राशि के हकदार होंगे।
अब रजिस्ट्रेशन पूरी तरह मुफ्त
किसानों के हित में एक अहम फैसला लेते हुए राज्य सरकार ने किसान रजिस्ट्री को पूरी तरह निशुल्क कर दिया है। अब कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) और वसुधा केंद्रों पर पहले लिए जाने वाले ₹15 के सर्विस चार्ज की वसूली नहीं होगी। इस खर्च को संबंधित विभाग वहन करेगा, जिससे किसानों पर कोई आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा।
हर किसान की बनेगी यूनिक किसान आईडी
बैठक में कृषि विभाग के प्रधान सचिव नर्मदेश्वर लाल ने बताया कि राज्य के प्रत्येक रैयत (छोटे) किसान की यूनिक किसान आईडी बनाना अनिवार्य है।
किसान आईडी बनने के बाद किसानों को भविष्य में पीएम-किसान, फसल बीमा, अनुदान और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी। इससे पूरी व्यवस्था अधिक पारदर्शी और डिजिटल रूप से मजबूत होगी।
इन जिलों ने दिखाया बेहतर प्रदर्शन
मुख्य सचिव ने अब तक बेहतर कार्य करने वाले जिलों की विशेष रूप से सराहना की। वैशाली, शिवहर, बेगुसराय, बक्सर, शेखपुरा और कटिहार को टॉप परफॉर्मिंग जिलों के रूप में चिन्हित किया गया है। अन्य जिलों को भी इसी रफ्तार से काम करते हुए जल्द से जल्द एग्रीस्टैक परियोजना के अगले चरण में प्रवेश करने के निर्देश दिए गए हैं।
सरकार का मानना है कि मिशन मोड में चलने वाला यह अभियान बिहार के किसानों को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा।
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