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अमेरिका से ट्रेड डील के खिलाफ कई राज्यों में विरोध-प्रदर्शन, संसद परिसर में विपक्ष का जोरदार हंगामा

नई दिल्ली, 13 फरवरी (कृषि भूमि ब्यूरो): अमेरिका–भारत प्रस्तावित व्यापार समझौते और केंद्र सरकार की श्रम व आर्थिक नीतियों के खिलाफ केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर गुरुवार को देश के कई हिस्सों में भारत बंद का मिला-जुला असर देखने को मिला। हालांकि अधिकांश राज्यों में जनजीवन सामान्य रहा, लेकिन कुछ राज्यों में विरोध-प्रदर्शनों और हड़ताल का व्यापक प्रभाव दर्ज किया गया।

कई राज्यों में दिखा हड़ताल का असर

हड़ताल का सबसे ज्यादा असर केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक और ओडिशा में देखने को मिला। ओडिशा में 12 घंटे के बंद के कारण भुवनेश्वर, कटक, बालासोर और संबलपुर जैसे शहरों में सड़क जाम और सार्वजनिक परिवहन बाधित रहा। केरल में 24 घंटे की हड़ताल के चलते केएसआरटीसी और निजी बस सेवाएं पूरी तरह ठप रहीं, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

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तमिलनाडु के तूतीकोरिन और चेन्नई बंदरगाहों पर परिचालन प्रभावित हुआ, जबकि श्रीपेरंबदूर औद्योगिक क्षेत्र में कर्मचारियों ने गेट मीटिंग और प्रदर्शन किए। झारखंड में बैंकिंग, बीमा और कोयला क्षेत्र पर असर पड़ा, वहीं छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीयकृत बैंकों के कर्मचारी हड़ताल में शामिल हुए, हालांकि परिवहन सेवाएं सामान्य रहीं।

किसान संगठनों का विरोध तेज

पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में किसान संगठनों और ट्रेड यूनियनों ने केंद्र के श्रम सुधारों और आर्थिक नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन किए। पटियाला और लुधियाना में अमेरिका से प्रस्तावित व्यापार समझौते के विरोध में रैलियां निकाली गईं। किसान संगठनों ने मनरेगा को समाप्त कर ‘विकसित भारत–रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ योजना लाने के प्रस्ताव पर भी आपत्ति जताई।

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संयुक्त किसान मोर्चा ने दावा किया कि श्रम संहिताओं के खिलाफ देशभर में हुई आम हड़ताल में अभूतपूर्व भागीदारी रही और इसे हाल के वर्षों की सबसे बड़ी हड़तालों में से एक बताया।

विरोध को राजनीति से प्रेरित बताया

मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के कुछ संगठनों ने हड़ताल का विरोध करते हुए इसे राजनीति से प्रेरित करार दिया। उनका आरोप है कि कुछ ट्रेड यूनियनें मजदूरों के हितों की बजाय राजनीतिक एजेंडे के तहत आंदोलन चला रही हैं।

संसद परिसर में विपक्ष का प्रदर्शन

संसद परिसर में अमेरिका–भारत व्यापार समझौते को लेकर विपक्षी दलों ने जोरदार प्रदर्शन किया। मल्लिकार्जुन खरगे , के. सी. वेणुगोपाल, जयराम रमेश, टी. आर. बालू और जया बच्चन समेत कई सांसदों ने ‘ट्रैप डील’ लिखे पोस्टर लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। विपक्ष का आरोप है कि यह समझौता किसानों, मजदूरों और घरेलू बाजार के हितों के खिलाफ है।

“मैं किसानों के लिए लड़ूंगा” – राहुल गांधी

राहुल गाँधी  ने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में ऐसा व्यापार समझौता भारत पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ा सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार किसानों और मजदूरों के हितों की अनदेखी कर रही है। राहुल गांधी ने कहा कि जो भी ट्रेड डील किसानों की रोज़ी-रोटी और देश की खाद्य सुरक्षा को कमजोर करेगी, उसका विरोध किया जाएगा।

शशि थरूर की टिप्पणी

वहीं कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सोशल मीडिया पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह भारत बंद “असल में सिर्फ एक और केरल बंद बनकर रह गया।” उन्होंने विरोध के अधिकार का समर्थन करते हुए कहा कि किसी को भी दूसरों की आवाजाही रोकने का अधिकार नहीं है।

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