नई दिल्ली, 03 जनवरी (कृषि भूमि ब्यूरो): भारत में किसानों की फसलों के दाम की सुरक्षा के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की व्यवस्था और उससे जुड़ी मांग को लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं। इसी बीच अमेरिका से आई यह खबर अहम मानी जा रही है। बढ़ती लागत, कमजोर बाजार भाव और कृषि घाटे की भरपाई के लिए अमेरिका इस साल अपने किसानों को करीब 12 अरब डॉलर (एक लाख करोड़ रुपये से अधिक) की सीधी सरकारी मदद देने जा रहा है।
गौर करने वाली बात यह है कि अमेरिका में किसानों की संख्या भारत की तुलना में कहीं कम है और वहां औसत लैंड होल्डिंग हजारों हेक्टेयर में होती है। इसके बावजूद अमेरिकी सरकार ने किसानों को बाजार जोखिम से बचाने के लिए बड़े पैमाने पर वित्तीय सहायता का फैसला किया है।
अमेरिकी कृषि मंत्री ब्रुक एल. रॉलिन्स ने 31 दिसंबर 2025 को किसानों के लिए इस फार्म सहायता पैकेज (FBA) को लागू करने के कार्यक्रम की घोषणा की। इससे पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 2026 के दौरान किसानों को यह सहायता देने का ऐलान कर चुके थे।
अमेरिकी कृषि विभाग (USDA) के अनुसार, यह पैकेज किसानों को बढ़ती उत्पादन लागत, खेती में हो रहे घाटे और उपज कीमतों में गिरावट से राहत देने के उद्देश्य से लाया गया है।
12 अरब डॉलर का पैकेज: किसे कितना?
USDA की सूचना के मुताबिक, कुल 12 अरब डॉलर के इस पैकेज में से 11 अरब डॉलर का एकमुश्त भुगतान सीधे किसानों को किया जाएगा। इसके अलावा 1 अरब डॉलर विशेष फसलों और चीनी (Sugar) क्षेत्र के लिए आरक्षित रहेगा।
यह भुगतान 2025 में बोए गए रकबे, उत्पादन लागत के अनुमानों और वैश्विक कृषि आपूर्ति–मांग के आकलन के आधार पर तय किया गया है। पात्र किसानों के खातों में 28 फरवरी 2026 तक राशि पहुंचने की उम्मीद है।
प्रति एकड़ भुगतान दरें (USDA)
| फसल | सहायता राशि (डॉलर/एकड़) | लगभग रुपये/एकड़ |
|---|---|---|
| चावल | 132.89 | ~12,000 |
| कपास | 117.35 | ~10,500 |
| मूंगफली | 55.65 | ~5,000 |
| मक्का (कॉर्न) | 44.36 | ~4,000 |
| गेहूं | 39.35 | ~3,500 |
| सोयाबीन | 30.88 | ~2,800 |
इसके अलावा जौ, कैनोला, चना, ज्वार, सूरजमुखी, ओट्स, तिल, फ्लैक्स, मसूर, सरसों, मटर और सैफ्लावर जैसी फसलें भी इस कार्यक्रम के दायरे में शामिल हैं।
कृषि मंत्री ब्रुक एल. रॉलिन्स ने कहा कि इस कार्यक्रम का मकसद किसानों को ऊंची लागत और लंबे समय से बनी कृषि अनिश्चितता से उबरने में मदद करना है। उनके शब्दों में, “राष्ट्रपति ट्रंप ने कृषि अर्थव्यवस्था में स्थिरता लाने का वादा किया है। ये भुगतान दरें किसानों को वसंत ऋतु की बुआई की योजना बनाते समय वित्तीय भरोसा देंगी।”
USDA का कहना है कि यह सहायता किसानों को खेती में बने रहने में मदद करेगी। साथ ही ट्रंप प्रशासन अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए नए बाजार खोलने और कृषि सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने की दिशा में भी काम कर रहा है।
भारत के लिए संकेत क्या?
जहां भारत में एमएसपी को लेकर यह तर्क दिया जाता है कि यह बाजार को विकृत करता है, वहीं अमेरिका का यह कदम दिखाता है कि विकसित देश भी किसानों की आय और लागत सुरक्षा के लिए बड़े पैमाने पर सरकारी हस्तक्षेप से पीछे नहीं हटते। भारतीय संदर्भ में यह बहस को नया आयाम देता है कि क्या किसानों की आय सुरक्षा को केवल बाजार पर छोड़ा जा सकता है, या इसके लिए मजबूत सरकारी समर्थन अनिवार्य है।
अमेरिका का ₹1 लाख करोड़ का कृषि सहायता पैकेज इस बात का उदाहरण है कि वैश्विक बाजार की अनिश्चितताओं के दौर में किसान आज भी सरकारी संरक्षण पर निर्भर हैं। भारत में एमएसपी पर चल रही बहस के बीच यह फैसला नीति-निर्माताओं और आलोचकों—दोनों के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ बनकर उभरा है।