कटाई के करीब धान की फसल खेतों में बिछी
लखनऊ (कृषि भूमि ब्यूरो): उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में लगातार बारिश और तेज हवाओं ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। पिछले तीन दिनों से जारी बारिश के कारण कटाई के करीब पहुंच चुकी धान की फसल कई इलाकों में खेतों में गिर गई है। तेज हवाओं से गन्ने की फसल भी प्रभावित होने की सूचना है। खेतों में पानी भरने से दलहन, तिलहन और सब्जियों में सड़न तथा फंगस का खतरा भी बढ़ गया है।
फसल नुकसान की सूचनाओं के बाद कृषि विभाग ने विकासखंड स्तर पर सर्वे कराने के निर्देश दिए हैं। आज, सोमवार 28 सितंबर से कृषि विभाग की टीमें गांव-गांव जाकर खेतों में फसलों की स्थिति का आकलन करेंगी। अधिकारियों के मुताबिक सर्वे पूरा होने के बाद ही बारिश से हुए वास्तविक नुकसान का आंकड़ा सामने आएगा।
लक्ष्य से अधिक हुई धान की बुवाई
बरेली में इस खरीफ सीजन में धान की बुवाई निर्धारित लक्ष्य से अधिक हुई है। उप कृषि निदेशक कार्यालय के अनुसार जिले में धान के लिए 1,58,592 हेक्टेयर का लक्ष्य रखा गया था, जबकि वास्तविक बुवाई 1,58,627.44 हेक्टेयर में हुई।
इसमें करीब 53,010.60 हेक्टेयर में सुगंधित धान, 58,005.80 हेक्टेयर में सामान्य धान और 47,611.04 हेक्टेयर में अन्य श्रेणी का धान लगाया गया है। बारिश उस समय हुई है जब बड़ी मात्रा में धान की फसल पकने और कटाई के करीब पहुंच चुकी है।
खेत में गिरी हुई पकी फसल के लंबे समय तक पानी में रहने से दाने खराब होने और गुणवत्ता प्रभावित होने का खतरा बढ़ सकता है। हालांकि, कितने क्षेत्र में वास्तव में कितना नुकसान हुआ है, यह सर्वे के बाद ही स्पष्ट होगा।
1.25 लाख हेक्टेयर गन्ने पर भी असर
धान के अलावा गन्ना भी बारिश और तेज हवाओं की चपेट में आया है। जिले में करीब 1.25 लाख हेक्टेयर में गन्ने की खेती है और कई स्थानों पर तेज हवा के कारण गन्ने के गिरने की सूचनाएं मिली हैं। बरेली में धान और गन्ना प्रमुख फसलों में शामिल हैं और जिले में 5.44 लाख से अधिक किसान हैं। ऐसे में फसल नुकसान का दायरा बढ़ने पर किसानों की आय पर असर पड़ सकता है।
दलहन-तिलहन में सड़न और फंगस का खतरा
बारिश का असर केवल धान और गन्ने तक सीमित नहीं है। खेतों में लगातार नमी और जलभराव से उड़द, मूंग, तिल और अरहर जैसी फसलों में सड़न और फंगस का खतरा बढ़ गया है।
बरेली में इस सीजन में करीब 15,063.51 हेक्टेयर उड़द, 6,365.64 हेक्टेयर तिल, 1,398.14 हेक्टेयर मूंग और 360.04 हेक्टेयर अरहर बोई गई है। इसके अलावा बाजरा 7,761 हेक्टेयर, ज्वार 4,124 हेक्टेयर और मक्का 946 हेक्टेयर में बोया गया है। सब्जी उत्पादक भी खेतों में जलभराव को लेकर चिंतित हैं।
किसानों को जलनिकासी और बीमा सूचना की सलाह
कृषि विभाग ने किसानों से खेतों में पानी जमा न होने देने और तत्काल जलनिकासी की व्यवस्था करने की अपील की है। फसल बीमा कराने वाले किसानों को नुकसान की सूचना निर्धारित प्रक्रिया के तहत 48 घंटे के भीतर देने की सलाह दी गई है।
फिलहाल कृषि विभाग की टीमें खेतों का जायजा लेकर नुकसान का आकलन करेंगी। सर्वे रिपोर्ट के आधार पर आगे की राहत और सहायता की प्रक्रिया तय होगी। इसलिए अभी फसल नुकसान की कोई अंतिम मात्रा या मुआवजे की राशि बताना जल्दबाजी होगी।
बारिश का यह दौर ऐसे समय आया है जब धान की कटाई शुरू होने वाली है। ऐसे में अगले कुछ दिनों में मौसम, खेतों में जलभराव और सर्वे रिपोर्ट यह तय करने में महत्वपूर्ण होंगे कि बरेली के किसानों को कितने बड़े कृषि नुकसान का सामना करना पड़ा है।
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