लखनऊ कृषि भूमि ब्यूरो): 11% से घटकर 6% हुई ब्याज दर: उत्तर प्रदेश के लघु और सीमांत किसानों के लिए कृषि ऋण को लेकर राज्य सरकार ने नई योजना शुरू की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 23 सितंबर को लखनऊ से मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना का शुभारंभ किया। योजना के तहत उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम्य विकास बैंक (LDB) के माध्यम से किसानों को खेती और कृषि से जुड़ी गतिविधियों के लिए दीर्घकालीन ऋण उपलब्ध कराया जाएगा।
योजना की सबसे बड़ी खासियत ऋण की ब्याज दर में कमी है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, LDB से मिलने वाले दीर्घकालीन कृषि ऋण की प्रभावी ब्याज दर 11 प्रतिशत से घटाकर 6 प्रतिशत कर दी गई है।
इस योजना का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में करीब 5 लाख लघु और सीमांत किसानों तक ऋण सुविधा पहुंचाना है। किसानों को कृषि एवं कृषि आधारित गतिविधियों में दीर्घकालीन निवेश के लिए वित्तीय सहायता देने की योजना बनाई गई है।
किसानों को 6 लाख रुपये तक का दीर्घकालीन ऋण
योजना के तहत पात्र लघु और सीमांत किसानों को 6 लाख रुपये तक का दीर्घकालीन ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। यह ऋण खेती के साथ कृषि से जुड़ी गतिविधियों और कृषि क्षेत्र में निवेश के लिए इस्तेमाल किया जा सकेगा। विभिन्न जिलों में योजना के शुभारंभ के बाद जारी स्थानीय रिपोर्टों में भी 6 लाख रुपये तक के ऋण और 6 प्रतिशत की प्रभावी ब्याज दर की पुष्टि की गई है।
योजना का उद्देश्य किसानों को कृषि क्षेत्र में दीर्घकालीन निवेश के लिए अपेक्षाकृत कम लागत वाला संस्थागत ऋण उपलब्ध कराना है। इससे कृषि मशीनरी, खेती से जुड़ी गतिविधियों और अन्य पात्र निवेश के लिए किसानों को वित्तीय संसाधन जुटाने में मदद मिल सकती है।
समय पर किस्त चुकाने पर ब्याज अनुदान
योजना से जुड़े विवरणों के अनुसार, समय पर ऋण की किस्त चुकाने वाले किसानों को ब्याज अनुदान का लाभ भी मिल सकता है। इसका उद्देश्य किसानों को ऋण की नियमित अदायगी के लिए प्रोत्साहित करना है।
हालांकि किसानों के लिए यह समझना जरूरी होगा कि योजना की पात्रता, ऋण की स्वीकृति, अधिकतम राशि और ब्याज अनुदान की वास्तविक शर्तें संबंधित बैंक और योजना के निर्धारित नियमों के अनुसार लागू होंगी।
किन किसानों को मिलेगा लाभ?
मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना मुख्य रूप से लघु और सीमांत किसानों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में योजना के शुभारंभ कार्यक्रमों के दौरान किसानों को इसकी जानकारी दी गई। गोंडा की एक रिपोर्ट में पांच लाख किसानों तक योजना का लाभ पहुंचाने के लक्ष्य का उल्लेख किया गया है, जबकि अन्य जिलों की रिपोर्टों में भी 6 लाख रुपये तक के दीर्घकालीन ऋण और 6 प्रतिशत की ब्याज दर की जानकारी दी गई है।
यह योजना ऐसे समय शुरू की गई है जब खेती की लागत, कृषि मशीनरी और अन्य कृषि निवेश किसानों के लिए महत्वपूर्ण खर्च बने हुए हैं। कम ब्याज दर पर दीर्घकालीन संस्थागत ऋण उपलब्ध होने से पात्र किसानों को इन निवेशों के लिए वित्तीय विकल्प मिल सकता है।
कृषि निवेश पर सरकार का फोकस
मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना को राज्य में कृषि क्षेत्र से जुड़े दीर्घकालीन निवेश को बढ़ावा देने की पहल के रूप में देखा जा सकता है। योजना के तहत ऋण का इस्तेमाल केवल सामान्य कृषि खर्च तक सीमित नहीं है, बल्कि कृषि और उससे जुड़ी गतिविधियों में निवेश के लिए भी सुविधा देने की बात कही गई है।
किसानों के लिए योजना का वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि पात्रता प्रक्रिया कितनी आसान रहती है, ऋण कितनी तेजी से स्वीकृत होता है और किसान उपलब्ध राशि का इस्तेमाल किस तरह कृषि उत्पादकता बढ़ाने वाले निवेश में करते हैं।
फिलहाल सरकार ने अगले पांच वर्षों में 5 लाख किसानों तक इस योजना का लाभ पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। 11 प्रतिशत से 6 प्रतिशत की प्रभावी ब्याज दर में प्रस्तावित कमी और 6 लाख रुपये तक के दीर्घकालीन ऋण की सुविधा इसे उत्तर प्रदेश की कृषि ऋण व्यवस्था से जुड़ी प्रमुख घोषणाओं में शामिल करती है।
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