लखनऊ कृषि भूमि ब्यूरो): यूपी में भारी बारिश का अलर्ट: उत्तर प्रदेश में मानसून एक बार फिर सक्रिय होता दिखाई दे रहा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 24 सितंबर को जारी अपने ताजा पूर्वानुमान में पूर्वी उत्तर प्रदेश में 24 सितंबर को भारी बारिश और 25-26 सितंबर को बहुत भारी बारिश की चेतावनी दी है। 27 सितंबर को भी पूर्वी यूपी में भारी बारिश की संभावना है। वहीं पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 25 से 27 सितंबर के दौरान भारी बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं का अनुमान है।
मौसम में यह बदलाव ऐसे समय आया है, जब प्रदेश के कई इलाकों में खरीफ की फसलें खेतों में खड़ी हैं। खासकर धान की फसल कई क्षेत्रों में पकने की अवस्था की ओर बढ़ रही है। ऐसे में लगातार या तेज बारिश किसानों के लिए राहत के साथ-साथ चुनौती भी बन सकती है।
लखनऊ और मौसम विभाग से जुड़े ताजा अपडेट के अनुसार बंगाल की खाड़ी की ओर बने मौसम तंत्र के प्रभाव से 24 से 27 सितंबर के बीच उत्तर प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में बारिश का दौर तेज हो सकता है। प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर, आजमगढ़, देवरिया, मिर्जापुर, चंदौली सहित पूर्वी यूपी के कई जिलों में बारिश की संभावना जताई गई है। कुछ इलाकों में तेज झोंकेदार हवाएं भी चल सकती हैं।
धान की खड़ी फसल को सबसे ज्यादा चिंता
इस समय किसानों की सबसे बड़ी चिंता खेत में खड़ी धान की फसल को लेकर है। लगातार बारिश होने पर खेतों में पानी जमा हो सकता है। जिन खेतों में पहले से पर्याप्त नमी है, वहां अतिरिक्त पानी की निकासी नहीं होने पर फसल की जड़ों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
औरैया में स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार बारिश और मौसम में उतार-चढ़ाव के बीच धान और बाजरे की फसल को लेकर किसानों की चिंता सामने आई है। यह स्थिति बताती है कि बारिश का असर केवल वर्षा की मात्रा पर नहीं, बल्कि फसल की अवस्था और खेत में जल निकासी की स्थिति पर भी निर्भर करेगा।
गन्ने और दूसरी खरीफ फसलों पर भी असर
धान के अलावा गन्ना, बाजरा, मक्का और अन्य खरीफ फसलों के लिए भी तेज बारिश और हवा की स्थिति महत्वपूर्ण है। जहां खेतों में पानी लंबे समय तक जमा रहता है, वहां फसल की बढ़वार प्रभावित हो सकती है। तेज हवाओं के साथ बारिश होने पर ऊंची या कमजोर तनों वाली फसलों के गिरने का जोखिम भी बढ़ सकता है।
हालांकि बारिश का असर सभी जिलों और सभी फसलों पर एक जैसा नहीं होगा। जिन क्षेत्रों में अब तक बारिश कम रही है, वहां यह वर्षा मिट्टी में नमी बढ़ाने और फसल के लिए उपयोगी साबित हो सकती है। उदाहरण के लिए बस्ती में इस वर्ष अब तक 636 मिलीमीटर बारिश दर्ज होने और धान को पर्याप्त पानी मिलने की रिपोर्ट है, जिससे वहां किसानों को बेहतर उत्पादन की उम्मीद है।
किसानों को जल निकासी पर देना होगा ध्यान
मौसम विभाग के अलर्ट को देखते हुए किसानों के लिए खेतों से अतिरिक्त पानी की निकासी की व्यवस्था पर ध्यान देना जरूरी होगा। खासकर निचले खेतों में पानी जमा होने की स्थिति में निकासी के रास्ते खुले रखना उपयोगी रहेगा।
किसानों को तेज हवा और गरज-चमक के दौरान खेतों में जाने से भी बचना चाहिए। IMD ने पूर्वी यूपी में बारिश के साथ गरज, बिजली और तेज हवाओं की चेतावनी जारी की है।
27 सितंबर तक मौसम पर नजर जरूरी
IMD के मौजूदा पूर्वानुमान के अनुसार अगले कुछ दिन उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए महत्वपूर्ण हैं। पूर्वी यूपी में 25 और 26 सितंबर को बहुत भारी बारिश की संभावना सबसे प्रमुख चिंता है, जबकि पश्चिमी यूपी में 25 से 27 सितंबर तक भारी बारिश का दौर रह सकता है।
ऐसे में किसानों को स्थानीय मौसम अपडेट और कृषि विभाग की सलाह पर नजर रखनी चाहिए। बारिश की मात्रा, खेत की जल निकासी और फसल की वर्तमान अवस्था—इन तीनों के आधार पर नुकसान का स्तर अलग-अलग हो सकता है। फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती यह है कि तेज बारिश खेतों में खड़ी खरीफ फसलों के लिए लाभ से नुकसान में न बदल जाए।
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