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Maharashtra AI Farming: महाराष्ट्र में AI से बदलेगी खेती की तस्वीर

न्यूज़ पॉइंट्स

  • महाराष्ट्र सरकार पहले चरण में 10 हजार किसानों को AI और Digital Twin Learning आधारित कृषि पायलट में शामिल करेगी।
  • परियोजना में कपास, सोयाबीन, तूर, गन्ना, संतरा, हल्दी, प्याज और मक्का जैसी 8 प्रमुख फसलों पर फोकस रहेगा।
  • गन्ने के शुरुआती परीक्षण में औसत उत्पादन 65.45 से बढ़कर 73.12 टन प्रति एकड़ हुआ।
  • AI आधारित सिंचाई प्रबंधन से औसतन 42% पानी की बचत का दावा किया गया।
  • सैटेलाइट, ड्रोन, IoT सेंसर और मशीन लर्निंग के डेटा से किसानों को उनके खेत के अनुसार मोबाइल पर सलाह देने की योजना है।

मुंबई (कृषि भूमि ब्यूरो): Maharashtra AI Farming – महाराष्ट्र में खेती को तकनीक से जोड़ने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 21 अगस्त को कृषि विभाग को Artificial Intelligence (AI) और ‘Digital Twin Learning in Agriculture’ पर आधारित पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने के निर्देश दिए। शुरुआती चरण में 10 हजार किसानों को इसमें शामिल किया जाएगा।

इस पहल का उद्देश्य केवल खेती में नई तकनीक जोड़ना नहीं, बल्कि खेत से जुड़े अलग-अलग डेटा को एक साथ जोड़कर किसानों को समय पर और फसल-विशेष सलाह उपलब्ध कराना है। परियोजना में सैटेलाइट डेटा, ड्रोन इमेजरी, IoT सेंसर, मौसम और मिट्टी से जुड़े आंकड़ों का इस्तेमाल किया जाएगा।

Digital Twin क्या करेगा?

‘Digital Twin’ को आसान भाषा में समझें तो यह खेत और फसल की डिजिटल तस्वीर तैयार करने की व्यवस्था है। इसमें फसल की स्थिति, मिट्टी की नमी, पानी की जरूरत, मौसम, कीट और रोग जैसी जानकारी लगातार जुटाई जाती है।

इसके बाद मशीन लर्निंग इन आंकड़ों का विश्लेषण कर सकती है और किसान को यह जानकारी दी जा सकती है कि कब सिंचाई करनी है, कितना पानी देना है, खाद की जरूरत कितनी है या फसल में बीमारी का खतरा कहां है।

सरकार के अनुसार, लक्ष्य ऐसा एकीकृत डिजिटल सिस्टम तैयार करना है जिससे अलग-अलग स्रोतों से प्राप्त जानकारी को मिलाकर किसान को उसके खेत और फसल के हिसाब से सलाह दी जा सके।

Maharashtra AI Farming: इन 8 फसलों पर रहेगा फोकस

पहले चरण में परियोजना को राज्य की आठ महत्वपूर्ण फसलों के साथ जोड़ा जाएगा। इनमें कपास, सोयाबीन, तूर, गन्ना, संतरा, हल्दी, प्याज, और मक्का शामिल हैं। कृषि विभाग को इन फसलों और अलग-अलग कृषि क्षेत्रों के हिसाब से परियोजना का अध्ययन करने को कहा गया है। सफल परीक्षण के बाद मॉडल को राज्य के अन्य हिस्सों में विस्तार देने की योजना है।

Maharashtra AI Farmingगन्ने की खेती में मिले शुरुआती नतीजे

बारामती के Agricultural Development Trust (ADT) ने इस तकनीक पर पहले से काम किया है। परियोजना के शुरुआती गन्ना परीक्षण में 200 किसानों के डेटा में से 164 वैध रिकॉर्ड के आधार पर औसत उत्पादन 65.45 टन प्रति एकड़ से बढ़कर 73.12 टन प्रति एकड़ हुआ। यानी औसतन 17.66 टन प्रति एकड़ की वृद्धि दर्ज की गई।

पानी के इस्तेमाल में भी उल्लेखनीय बदलाव की रिपोर्ट है। ADT के CEO नीलेश नलवडे के अनुसार, AI आधारित सिंचाई प्रबंधन से औसतन 42% पानी की बचत हुई, जिससे प्रति हेक्टेयर प्रतिदिन करीब 90,000 लीटर पानी बचाने की क्षमता बताई गई।

ड्रोन से बीमारी की शुरुआती पहचान

इस परियोजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा ड्रोन और AI का संयोजन है। ड्रोन से खेतों की तस्वीरें लेकर उनका AI और मशीन लर्निंग के जरिए विश्लेषण किया जा सकता है। इससे फसल में कीट या बीमारी के शुरुआती संकेतों की पहचान करने में मदद मिल सकती है।

इसके बाद सिंचाई या छिड़काव से जुड़ी जरूरी जानकारी किसान के मोबाइल फोन तक पहुंचाई जा सकती है। इससे पूरे खेत में एक समान छिड़काव करने के बजाय जरूरत वाले हिस्से पर अधिक सटीक कार्रवाई की संभावना बढ़ती है।

किसानों के मोबाइल तक पहुंचेगी सलाह

इस मॉडल की सबसे अहम बात यह है कि तकनीक का अंतिम फायदा किसान तक पहुंचे। बारामती में विकसित AI कृषि मॉडल में खेत, मौसम और सेंसर से मिलने वाले डेटा को विश्लेषित करके किसानों को व्यावहारिक सलाह देने पर जोर दिया गया है।

बारामती के पहले के AI कृषि प्रयोगों में Microsoft और अन्य तकनीकी साझेदारों के साथ सैटेलाइट, मिट्टी सेंसर और डेटा प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया गया है। किसानों को सिंचाई, उर्वरक और कीट नियंत्रण जैसे फैसलों में सहायता देने के लिए डेटा को सरल सलाह में बदलने का प्रयास किया गया है।

महाराष्ट्र में बड़े पैमाने पर लागू करने की तैयारी

मुख्यमंत्री फडणवीस ने परियोजना को फसल और क्षेत्र के अनुसार जांचने तथा पहले चरण के परिणामों के आधार पर आगे विस्तार करने पर जोर दिया है। इसका मतलब है कि सरकार अभी पूरे राज्य में इसे एक साथ लागू करने के बजाय पहले अलग-अलग फसलों और क्षेत्रों में मॉडल की उपयोगिता का आकलन करेगी।

कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे ने भी AI आधारित खेती को राज्य सरकार की प्राथमिकता बताया है। सरकार का लक्ष्य ऐसी तकनीक विकसित करना है जो अधिक से अधिक किसानों तक पहुंच सके और खेती की लागत कम करने के साथ उत्पादकता तथा किसानों की आय बढ़ाने में मदद करे।

Maharashtra AI Farmingक्या AI सच में बदल सकती है महाराष्ट्र की खेती?

महाराष्ट्र में पानी की कमी, अनियमित मौसम, मिट्टी की गुणवत्ता, बढ़ती इनपुट लागत और कीट-रोग जैसी समस्याएं किसानों के लिए बड़ी चुनौती हैं। ऐसे में अगर AI खेत की वास्तविक स्थिति के आधार पर सही समय पर सिंचाई, पोषण और रोग नियंत्रण की सलाह दे सके, तो खेती में संसाधनों के अधिक कुशल इस्तेमाल की संभावना है।

हालांकि, 10 हजार किसानों का पायलट पूरे महाराष्ट्र की खेती में सफलता की गारंटी नहीं है। अलग-अलग जिलों की मिट्टी, मौसम, फसल पद्धति और किसानों की तकनीकी पहुंच अलग है। इसलिए राज्यव्यापी विस्तार से पहले क्षेत्रवार परिणामों और वास्तविक लागत-लाभ का मूल्यांकन महत्वपूर्ण होगा।

फिलहाल शुरुआती आंकड़े यह संकेत जरूर देते हैं कि AI, Digital Twin, ड्रोन और सेंसर आधारित खेती महाराष्ट्र के कृषि क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण अगला कदम बन सकती है। अब नजर इस बात पर होगी कि 10 हजार किसानों वाला पायलट कितना प्रभावी साबित होता है और सरकार इसे कितनी तेजी से राज्य के छोटे और सीमांत किसानों तक पहुंचा पाती है।

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