नई दिल्ली (कृषि भूमि ब्यूरो): Rice Trade: भारत और चीन के बीच कृषि उत्पादों के व्यापार को एक बड़ा झटका लगा है। चीन ने चावल में जेनेटिकली मॉडिफाइड ऑर्गेनिज्म (GMO) पाए जाने का हवाला देते हुए 7 भारतीय चावल निर्यातकों का रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया है। इस सख्त कदम के बाद इन कंपनियों का चीन को होने वाला चावल निर्यात (Rice Trade) पूरी तरह से बंद हो गया है।
Rice Trade: शुरुआती निलंबन से लेकर पूर्ण रद्दीकरण तक
चीन के सीमा शुल्क विभाग (GACC – General Administration of Customs of the People’s Republic of China) ने इस साल की शुरुआत में इनमें से 3 भारतीय चावल निर्यातकों का रजिस्ट्रेशन निलंबित किया था। अब चीन ने उन तीनों कंपनियों समेत कुल 7 कंपनियों के रजिस्ट्रेशन पूरी तरह से रद्द कर दिए हैं, जिसे भारतीय निर्यातकों पर एक बड़े व्यापारिक प्रतिबंध के रूप में देखा जा रहा है।

किन राज्यों की कंपनियों पर गिरी गाज?
जिन भारतीय कंपनियों के रजिस्ट्रेशन रद्द किए गए हैं, वे मुख्य रूप से छत्तीसगढ़, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश राज्यों में स्थित हैं। चीन ने इन कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई का मुख्य आधार चावल में जीएमओ की कथित मौजूदगी को बताया है।
Rice Trade: भारत की ओर से उठाए गए सवाल
भारतीय अधिकारियों ने चीन के इस फैसले पर कड़ा ऐतराज जताया है। एक नाम न छापने की शर्त पर अधिकारी ने दावा किया है कि चीन की मंशा पर सवाल खड़े होते हैं, क्योंकि यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब इस साल चीन की घरेलू चावल की जरूरतें लगभग पूरी हो चुकी हैं। हालांकि, इस दावे पर चीनी अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
द्विपक्षीय व्यापार पर प्रभाव
Rice Trade: भारत और चीन के बीच कृषि और खाद्य उत्पादों का व्यापार दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए अहम है। चावल निर्यात पर लगी इस अचानक रोक से व्यापारिक संबंधों पर असर पड़ना तय है। फिलहाल, भारतीय निर्यातकों और पूरे व्यापार जगत की निगाहें दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत और इस विवाद के समाधान पर टिकी हैं।
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