नई दिल्ली (कृषि भूमि ब्यूरो): Cotton Prices: वैश्विक बाजार की दिशा और घरेलू बाजार में मिलों की मजबूत मांग के चलते कपास की कीमतों में लगातार तेजी आ रही है। बाजार जानकारों के अनुसार, मिलों के पास पुराने स्टॉक की कमी और नई फसल के बाजार में आने में हो रही देरी को देखते हुए कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) ने कपास की कीमत में 700 रुपये प्रति गांठ (एक गांठ 356 किलो के बराबर) का इजाफा किया है। पिछले दो हफ्तों में सीसीआई की कीमतों में कुल मिलाकर लगभग 1,400 रुपये प्रति कैंडी की बढ़ोतरी हो चुकी है।
कपास की बुवाई और राज्यवार आंकड़े
शुरुआती सुस्ती के बाद देश में कपास की बुवाई ने रफ्तार पकड़ ली है और कुल रकबा 106 लाख हेक्टेयर को पार कर गया है। प्रमुख राज्यों में बुवाई की स्थिति इस प्रकार है:
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सकारात्मक बढ़त वाले राज्य: गुजरात (20.87 लाख हेक्टेयर), तेलंगाना (19.05 लाख हेक्टेयर), मध्य प्रदेश (5.81 लाख हेक्टेयर), आंध्र प्रदेश (3.46 लाख हेक्टेयर), तमिलनाडु (0.5 लाख हेक्टेयर) और ओडिशा (2.24 लाख हेक्टेयर)।
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मामूली गिरावट वाले राज्य: महाराष्ट्र (37.84 लाख हेक्टेयर), कर्नाटक (6.97 लाख हेक्टेयर) और राजस्थान (5.53 लाख हेक्टेयर)।
Cotton Prices: वर्तमान में प्रेस्ड कपास गांठ की कीमतें 67,500 से 68,500 रुपये प्रति गांठ के बीच चल रही हैं, जबकि अन्य व्यापारी सीसीआई की कीमतों से लगभग 1,000 रुपये ज्यादा का भाव मांग रहे हैं।

Cotton Prices: बिक्री और स्टॉक की स्थिति
कीमतें बढ़ने के बावजूद सीसीआई की रोजाना बिक्री मजबूत बनी हुई है। सीसीआई अब तक कुल 91.5 लाख गांठें बेच चुका है और उसके पास लगभग 14 लाख गांठों का स्टॉक बचा है। कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के सिंचित क्षेत्रों (जैसे रायचूर, बेल्लारी और नलगोंडा) में अगेती कपास की आवक शुरू हो गई है, जहां इसका भाव 8,800 से 9,000 रुपये प्रति क्विंटल चल रहा है।
वैश्विक स्तर पर खपत और उत्पादन का अनुमान
कपास की कीमतों (Cotton Prices) को अंतरराष्ट्रीय बाजार से भी समर्थन मिल रहा है। कमजोर डॉलर और अमेरिका के प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में खराब मौसम के कारण वैश्विक कीमतें मजबूत हैं। अमेरिकी कृषि विभाग (USDA) के अनुमान के मुताबिक, वर्ष 2026-27 में वैश्विक स्तर पर कपास की खपत उत्पादन से अधिक रहने की संभावना है।
घरेलू और निर्यात बाजारों में सूती धागे की मांग सुधरने से भारतीय बाजार को भी मजबूती मिल रही है। सितंबर के अंत तक भारत में कपास का क्लोजिंग स्टॉक घटकर 75 से 80 लाख गांठ तक आने की उम्मीद है।
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