नई दिल्ली (कृषि भूमि ब्यूरो): Jute Prices Crash: पश्चिम बंगाल में कच्चे जूट के बाजार में इन दिनों भारी हलचल मची हुई है। महज एक महीने के भीतर कच्चे जूट की कीमतों में 50 प्रतिशत तक की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। इस अचानक और तेज गिरावट ने जूट आधारित बोरियों की कीमत तय करने की पूरी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जूट उद्योग से जुड़ी संस्थाओं ने रोजाना बाजार भाव तय करने के तरीकों और इस मॉडल की पारदर्शिता पर आपत्ति जताई है।
Jute Prices Crash: तीन हफ्तों में ₹9,000 की गिरावट
जूट बेलर्स एसोसिएशन (JBA) के आंकड़े इस बात की गवाही देते हैं कि कीमतों में कितनी तेजी से उतार-चढ़ाव आया है। आंकड़ों के मुताबिक, दक्षिण बंगाल में TD-5 ग्रेड के कच्चे जूट का औसत भाव जो 9 जुलाई को 18,300 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया था, वह 1 अगस्त को गिरकर सीधे 9,100 रुपये प्रति क्विंटल पर आ गया। यानी महज तीन हफ्तों के भीतर जूट की कीमतों (Jute Prices) में 9,000 रुपये की भारी गिरावट आई है। उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि जब बाजार में अभी पूरी तरह से नई फसल पहुंची ही नहीं है, तो कीमतों में इतनी बड़ी गिरावट आना जांच का विषय है।
जूट मिलों के आरोप और IJMA का पक्ष
इस स्थिति को लेकर इंडियन जूट मिल्स एसोसिएशन (IJMA) ने 14 जुलाई को जूट बेलर्स एसोसिएशन को एक पत्र लिखा। IJMA का आरोप है कि JBA द्वारा जारी किए जाने वाले रोजाना के भाव वास्तविक कारोबारी कीमतों को नहीं दर्शाते हैं। मिलों का कहना है कि उन्हें भौतिक डिलीवरी के लिए प्रकाशित दरों से अधिक कीमत चुकानी पड़ती है, और इसके बावजूद कई बार पूरा माल समय पर नहीं पहुंच पाता है।

सरकारी बोरियों की कीमत तय करने के मॉडल पर विवाद
Jute Prices: विवाद की मुख्य वजह यह है कि जूट कमिश्नर द्वारा हर महीने सरकारी बोरियों (Jute Bags) का दाम तय करने के लिए JBA के इन्हीं रोजाना के भावों को मुख्य आधार बनाया जाता है। चूंकि बोरी बनाने की कुल लागत में लगभग 66 प्रतिशत हिस्सा अकेले कच्चे जूट का होता है, इसलिए इन आंकड़ों में कोई भी विसंगति पूरी कीमत निर्धारण प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवालिया निशान लगाती है।
जूट बेलर्स एसोसिएशन (JBA) की सफाई
मिलों के इन आरोपों का जवाब देते हुए JBA के अध्यक्ष मदन गोपाल माहेश्वरी ने स्पष्ट किया कि उनकी पांच सदस्यीय समिति हर कार्य दिवस पर मिलों और खरीदारों से मिलने वाले भावों को पूरी पारदर्शिता के साथ दर्ज करती है।
माहेश्वरी के अनुसार, यह समिति 7 से 10 दिन के मानक डिलीवरी समय के आधार पर एक समान कीमतों का मूल्यांकन करती है। इसमें उन विशेष सौदों को शामिल नहीं किया जाता, जिनके डिलीवरी या भुगतान के नियम सामान्य से अलग होते हैं। JBA का दावा है कि उनके द्वारा प्रकाशित किए जाने वाले भाव बाजार का एक निष्पक्ष और सटीक अनुमान होते हैं और इस स्थापित प्रक्रिया का पालन पिछले कई सालों से लगातार किया जा रहा है।
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