नई दिल्ली (कृषि भूमि ब्यूरो): हल्दी बाजार: भारतीय मसाला बाजार में इन दिनों हल्दी की कीमतों में जोरदार तेजी का दौर जारी है। बाजार में कम सप्लाई, पिछले स्टॉक की कमी और मौसमी अनिश्चितताओं के कारण हल्दी के दाम लगातार ऊंचे बने हुए हैं। देश की प्रमुख हल्दी मंडियों—ईरोड (तमिलनाडु) और निजामाबाद (तेलंगाना)—में हल्दी की कीमतों में बड़ा उछाल दर्ज किया गया है, जिससे यह मसाला किसानों के लिए तो फायदेमंद साबित हो रहा है, लेकिन आम उपभोक्ताओं और व्यापारियों की चिंताएं बढ़ गई हैं।
हल्दी बाजार: प्रमुख मंडियों में हल्दी के भाव
व्यापारिक रिपोर्टों के अनुसार, हल्दी के वायदा और हाजिर बाजारों में कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव के बीच मजबूती बनी हुई है। ईरोड और निजामाबाद जैसी प्रमुख मंडियों में बेहतरीन गुणवत्ता वाली फिंगर हल्दी और डबल पॉलिश वैरायटी के दाम ऊंचे स्तर पर ट्रेड कर रहे हैं। कम सप्लाई के कारण थोक बाजारों में हल्दी औसतन 16,000 से 20,000 रुपये प्रति क्विंटल के दायरे के आसपास बनी हुई है।

किसानों ने बढ़ाया रकबा, लेकिन कम बारिश बनी चुनौती
हल्दी की मिल रही बेहतरीन कीमतों से आकर्षित होकर इस खरीफ सीजन में किसानों ने इसकी खेती का दायरा (रकबा) बढ़ाया है। जानकारों का अनुमान है कि इस बार हल्दी के रकबे में अच्छी खासी बढ़ोतरी हुई है।
हालांकि, जानकारों का यह भी मानना है कि फसल के विकास के शुरुआती दौर में यदि मानसूनी बारिश का वितरण समान नहीं रहा या कम बारिश हुई, तो इससे प्रति एकड़ पैदावार पर बुरा असर पड़ सकता है।
हल्दी बाजार: सप्लाई और मांग का गणित
बाजार के आंकड़ों पर नजर डालें तो देश में हल्दी की कुल मांग और बचे हुए स्टॉक के बीच बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है:
| विवरण | अनुमानित आंकड़े |
| कुल संभावित उत्पादन | लगभग 95 लाख बोरी (प्रत्येक 50 किलो) |
| कुल वार्षिक मांग (निर्यात सहित) | लगभग 110 लाख बोरी |
| बाजार में बचा पुराना स्टॉक | 15 से 20 लाख बोरी |
मांग और आपूर्ति के इस असंतुलन के कारण आने वाले महीनों में हल्दी बाजार में सप्लाई सुस्त रहने की पूरी संभावना है।
निर्यात पर भू-राजनीतिक तनाव का असर
एग्रीवॉच की रिपोर्ट के अनुसार, साल के शुरुआती महीनों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खासकर पश्चिम एशिया (अमेरिका-ईरान तनाव) में पैदा हुए गतिरोध के कारण समुद्री व्यापार और निर्यात पर आंशिक असर पड़ा है। हालांकि बीच-बीच में कुछ महीनों में निर्यात में सुधार भी देखा गया है, लेकिन भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं वैश्विक बाजार में भारतीय हल्दी के निर्यात को प्रभावित कर रही हैं।
नई फसल तक राहत की उम्मीद कम
कृषि विशेषज्ञों का साफ कहना है कि जब तक हल्दी बाजार में नई फसल की भरपूर आवक शुरू नहीं होती, तब तक हल्दी की कीमतों में किसी बड़ी गिरावट की उम्मीद करना मुश्किल है। वर्तमान में मानसून की चाल, वर्षा की स्थिति और आगामी उत्पादन के आंकड़े ही तय करेंगे कि आने वाले दिनों में हल्दी बाजार किस दिशा में आगे बढ़ेगा।
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