नई दिल्ली (कृषि भूमि ब्यूरो): सोयाबीन बीज अंकुरण: महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में इस खरीफ सीजन के दौरान सोयाबीन उत्पादक किसानों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। पहले कमजोर और विलंबित मॉनसून के कारण बुवाई प्रभावित हुई, वहीं अब बुवाई के बाद सोयाबीन बीजों के अपेक्षित अंकुरण नहीं होने की शिकायतें तेजी से सामने आ रही हैं। कृषि विभाग को अमरावती संभाग के पांच जिलों से अब तक 907 शिकायतें प्राप्त हुई हैं। किसानों का कहना है कि महंगे प्रमाणित बीज खरीदने के बावजूद खेतों में केवल 10 से 20 प्रतिशत तक ही अंकुरण हुआ है, जिससे उन्हें दोबारा बुवाई करनी पड़ रही है।
यह स्थिति किसानों की लागत बढ़ाने के साथ-साथ खरीफ फसल की शुरुआती वृद्धि और उत्पादन पर भी असर डाल सकती है।
कम अंकुरण से बढ़ी किसानों की चिंता
विदर्भ के कई किसानों का आरोप है कि उन्होंने अधिक कीमत पर प्रमाणित सोयाबीन बीज खरीदे थे, लेकिन बुवाई के बाद बीजों का अंकुरण बेहद कम हुआ। कई खेतों में अंकुरण दर 10 से 20 प्रतिशत तक सीमित रहने के कारण किसानों को पुनः बीज खरीदकर दोबारा बुवाई करनी पड़ रही है।
पहले ही देर से पहुंचे मॉनसून के कारण बुवाई का समय प्रभावित हुआ था। बारिश शुरू होने के बाद किसानों ने तेजी से बुवाई की, लेकिन अब अंकुरण की समस्या ने उनकी आर्थिक चिंता और बढ़ा दी है।
अमरावती संभाग के पांच जिलों से मिलीं 907 शिकायतें
कृषि विभाग के अनुसार, अमरावती संभाग के पांच जिलों से सोयाबीन बीजों के खराब अंकुरण की 907 शिकायतें दर्ज की गई हैं। विभाग का कहना है कि शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए प्रत्येक मामले की जांच कराई जा रही है।
अधिकारियों के अनुसार, प्रारंभिक जांच में यह पता लगाया जाएगा कि समस्या बीज की गुणवत्ता, मौसम की स्थिति, मिट्टी की नमी या अन्य कृषि तकनीकी कारणों से हुई है।
जांच के लिए बनाई गई विशेष समितियां
सोयाबीन बीजों के खराब अंकुरण की शिकायतों की जांच के लिए कृषि विभाग ने तालुका स्तर पर विशेष जांच समितियों का गठन किया है।
इन समितियों को प्रभावित खेतों का निरीक्षण करने, किसानों के बयान दर्ज करने और बीजों के नमूने एकत्र कर परीक्षण के लिए प्रयोगशालाओं में भेजने के निर्देश दिए गए हैं। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
किसानों से साक्ष्य सुरक्षित रखने की अपील
कृषि विभाग ने प्रभावित किसानों से अपील की है कि वे बीज खरीद का बिल, बीज पैकेट पर लगा टैग और यदि संभव हो तो बचा हुआ बीज नमूना सुरक्षित रखें। इन दस्तावेजों और नमूनों के आधार पर शिकायतों की पुष्टि और जिम्मेदारी तय करने में सहायता मिलेगी।
दूसरी ओर, किसानों का आरोप है कि कुछ बीज कंपनियां उनकी शिकायतों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे रही हैं। प्रभावित किसानों ने दोषी कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और हुए नुकसान का मुआवजा देने की मांग की है।

महाराष्ट्र के सोयाबीन उत्पादन पर पड़ सकता है असर
महाराष्ट्र देश के प्रमुख सोयाबीन उत्पादक राज्यों में शामिल है और विदर्भ का अमरावती संभाग सोयाबीन उत्पादन का महत्वपूर्ण क्षेत्र माना जाता है। ऐसे में यदि अंकुरण की समस्या व्यापक स्तर पर बनी रहती है तो किसानों की उत्पादन लागत बढ़ सकती है और फसल की शुरुआती वृद्धि प्रभावित होने से उपज पर भी असर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि दोबारा बुवाई से किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है, क्योंकि उन्हें दोबारा बीज, श्रम और अन्य कृषि कार्यों पर खर्च करना पड़ता है। यदि बारिश का समय भी प्रभावित हो जाए तो उत्पादन में कमी आने की आशंका बढ़ जाती है।
पहले भी सामने आ चुका है ऐसा मामला
महाराष्ट्र में सोयाबीन बीजों की गुणवत्ता और खराब अंकुरण का मुद्दा नया नहीं है। वर्ष 2020 में राज्यभर के किसानों ने 50 हजार से अधिक शिकायतें दर्ज कराई थीं। उस समय कृषि विभाग ने जांच के बाद कई बीज कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई भी की थी।
हालांकि, इस वर्ष शिकायतों की संख्या अभी उस स्तर तक नहीं पहुंची है, लेकिन खरीफ सीजन की शुरुआत में ही 907 शिकायतों का सामने आना कृषि विभाग के लिए गंभीर संकेत माना जा रहा है। अब किसानों की नजर जांच रिपोर्ट और सरकार द्वारा संभावित राहत एवं कार्रवाई पर टिकी हुई है।
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