नई दिल्ली (कृषि भूमि ब्यूरो): भारत के सरकारी गोदामों में चावल और गेहूं का भंडार लगातार बढ़ रहा है। मंगलवार को जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जून की शुरुआत में देश का चावल स्टॉक रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जबकि गेहूं का भंडार पिछले पांच वर्षों के उच्चतम स्तर पर दर्ज किया गया। यह स्थिति सरकार के लिए खाद्य सुरक्षा, मूल्य नियंत्रण और निर्यात नीति के लिहाज से राहत भरी मानी जा रही है।
आंकड़ों के मुताबिक, 1 जून तक चावल (धान सहित) का कुल सरकारी भंडार 68.43 मिलियन मीट्रिक टन रहा। यह पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में लगभग 15 प्रतिशत अधिक है और सरकार द्वारा 1 जुलाई के लिए निर्धारित 13.5 मिलियन टन के बफर लक्ष्य से कई गुना ज्यादा है।
वहीं, गेहूं का सरकारी स्टॉक 53.41 मिलियन टन दर्ज किया गया, जो निर्धारित 27.6 मिलियन टन के लक्ष्य से काफी ऊपर है। यह स्तर वर्ष 2021 के बाद सबसे अधिक माना जा रहा है।
भरपूर उत्पादन और रिकॉर्ड खरीद का असर
विशेषज्ञों का मानना है कि अनाज भंडार में यह वृद्धि मुख्य रूप से पिछले सीजन में हुई रिकॉर्ड पैदावार और सरकार की आक्रामक खरीद नीति का परिणाम है। विशेषकर गेहूं के मामले में सरकार ने किसानों से लगभग 35 मिलियन टन गेहूं की खरीद कर बाजार को चौंका दिया।
मुंबई स्थित एक अनाज कारोबारी के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में देश के पास चावल का पर्याप्त भंडार था, लेकिन गेहूं की उपलब्धता अपेक्षाकृत सीमित रही। इस बार स्थिति अलग है और दोनों प्रमुख खाद्यान्नों का स्टॉक बेहद आरामदायक स्तर पर पहुंच गया है।
उन्होंने कहा कि सरकार अब खुले बाजार में गेहूं की आपूर्ति बढ़ाकर कीमतों को नियंत्रित रखने की स्थिति में है। यदि किसी कारण से बाजार में कीमतों में तेजी आती है तो सरकारी एजेंसियां आसानी से अतिरिक्त स्टॉक जारी कर सकती हैं।

चावल निर्यात को मिलेगा समर्थन
भारत दुनिया का सबसे बड़ा चावल निर्यातक देश है और वैश्विक चावल व्यापार में उसकी हिस्सेदारी लगभग 40 प्रतिशत है। मार्च 2025 में भारत ने चावल निर्यात पर लगी अपनी अंतिम प्रमुख पाबंदियां भी हटा दी थीं।
नई दिल्ली स्थित एक वैश्विक ट्रेडिंग फर्म के डीलर का कहना है कि मौजूदा चावल भंडार जरूरत से कहीं अधिक है। ऐसे में यदि आने वाले महीनों में मानसून सामान्य से कमजोर भी रहता है और उत्पादन पर कुछ असर पड़ता है, तब भी भारत के पास निर्यात जारी रखने के लिए पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध रहेगा।
यह स्थिति विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि मौसम विशेषज्ञों ने अल नीनो प्रभाव के कारण वर्षा को लेकर कुछ चिंताएं जताई हैं। कमजोर मानसून का असर कृषि उत्पादन पर पड़ सकता है, लेकिन वर्तमान भंडार इस जोखिम को काफी हद तक संतुलित करता है।
रिकॉर्ड उत्पादन ने मजबूत की स्थिति
कृषि वर्ष 2025-26 में भारत ने चावल और गेहूं दोनों के उत्पादन में नया रिकॉर्ड बनाया। सरकारी अनुमानों के अनुसार, इस अवधि में:
| फसल | उत्पादन (मिलियन टन) |
|---|---|
| चावल | 154.02 |
| गेहूं | 120.66 |
विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले वर्ष अच्छी मानसूनी बारिश के कारण किसानों ने दोनों फसलों के तहत बोया गया रकबा बढ़ाया, जिससे उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
खाद्य सुरक्षा और महंगाई प्रबंधन को लाभ
विश्लेषकों का मानना है कि चावल और गेहूं के मजबूत स्टॉक से सरकार को कई मोर्चों पर फायदा मिलेगा। एक ओर सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के लिए पर्याप्त अनाज उपलब्ध रहेगा, वहीं दूसरी ओर आवश्यकता पड़ने पर खुले बाजार में अतिरिक्त स्टॉक जारी कर खाद्य महंगाई को नियंत्रित किया जा सकेगा।
खासकर गेहूं और आटे की कीमतों पर नजर रखने वाली सरकार के लिए यह स्थिति राहत देने वाली है। साथ ही, चावल के पर्याप्त भंडार से भारत वैश्विक बाजार में अपनी निर्यात क्षमता बनाए रख सकेगा और अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहेगा।
कुल मिलाकर, रिकॉर्ड चावल स्टॉक और पांच साल के उच्चतम गेहूं भंडार ने भारत की खाद्य सुरक्षा को मजबूत आधार प्रदान किया है। आने वाले मानसून सीजन और वैश्विक बाजार की परिस्थितियों के बीच यह भंडार सरकार को नीति निर्धारण में अधिक लचीलापन और भरोसा देगा।
=====
इन ख़बरों को भी पढ़ें…
प्याज किसानों को राहत; केंद्र ने बढ़ाया न्यूनतम खरीद मूल्य, 16.50 रुपये किलो पर होगी खरीद
खरीफ 2026: जैविक खाद की मांग में रिकॉर्ड उछाल, किसानों ने खरीदी 11.17 लाख टन खाद
देश में बागवानी उत्पादन बनाएगा नया रिकॉर्ड, 2025-26 में 377.78 मिलियन टन उत्पादन का अनुमान