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भारत-ओमान CEPA आज से लागू, 99% भारतीय निर्यात को मिलेगी शुल्क-मुक्त पहुंच; कृषि, ऊर्जा और उर्वरक सुरक्षा को बड़ा बल

भारत-ओमान CEPA

नई दिल्ली (कृषि भूमि ब्यूरो): भारत-ओमान CEPA: भारत और ओमान के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (Comprehensive Economic Partnership Agreement-CEPA) सोमवार, 1 जून 2026 से आधिकारिक रूप से लागू हो गया है। यह पिछले पांच वर्षों में लागू होने वाला भारत का पांचवां मुक्त व्यापार समझौता (FTA) और कुल मिलाकर 15वां व्यापार समझौता है। इस समझौते के तहत भारतीय निर्यातकों को ओमान के लगभग 99 प्रतिशत बाजार तक शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी, जबकि भारत को कच्चे तेल, एलएनजी, उर्वरकों और औद्योगिक कच्चे माल की अधिक सुगम और भरोसेमंद आपूर्ति सुनिश्चित होगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता केवल व्यापार बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि पश्चिम एशिया में बदलते भू-राजनीतिक हालात के बीच भारत की ऊर्जा और आपूर्ति श्रृंखला सुरक्षा को भी मजबूत करेगा।

ओमान की रणनीतिक स्थिति बढ़ाती है समझौते का महत्व

हालांकि ओमान की आबादी लगभग 55 लाख और उसकी अर्थव्यवस्था करीब 110 अरब डॉलर की है, इसलिए प्रत्यक्ष व्यापारिक लाभ अन्य बड़े एफटीए की तुलना में सीमित हो सकते हैं। लेकिन इसकी भौगोलिक स्थिति इस समझौते को बेहद महत्वपूर्ण बनाती है।

ओमान का बड़ा तटीय क्षेत्र सीधे अरब सागर और ओमान की खाड़ी से जुड़ा है तथा यह होर्मुज जलडमरूमध्य के बाहर स्थित है। यही कारण है कि सलालाह और दुक्म जैसे प्रमुख बंदरगाह क्षेत्रीय तनाव या समुद्री मार्गों में व्यवधान की स्थिति में भी सक्रिय रह सकते हैं।

हाल के वर्षों में खाड़ी क्षेत्र में बढ़े तनाव और समुद्री व्यापार से जुड़े जोखिमों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत को वैकल्पिक और सुरक्षित व्यापारिक मार्गों की आवश्यकता है। ऐसे में ओमान भारत के लिए एक विश्वसनीय साझेदार और रणनीतिक प्रवेश द्वार के रूप में उभर रहा है।

भारत-ओमान CEPA: निर्यातकों को मिलेगा फायदा

थिंक टैंक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के अनुसार, ओमान ने अपनी लगभग 98 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर तत्काल शुल्क-मुक्त पहुंच प्रदान की है, जो मूल्य के आधार पर भारत के करीब 99 प्रतिशत निर्यात को कवर करती है।

वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का ओमान को निर्यात लगभग 4 अरब डॉलर रहा। इसमें रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पाद, नैफ्था, कैल्साइंड एल्युमिना, लौह एवं इस्पात उत्पाद, मशीनरी और चावल प्रमुख निर्यात वस्तुएं थीं।

भारत-ओमान CEPA
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भारत-ओमान CEPA से निम्न क्षेत्रों को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है:

  • कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद
  • समुद्री एवं मरीन उत्पाद
  • इंजीनियरिंग वस्तुएं
  • दवा उद्योग
  • वस्त्र एवं परिधान
  • रसायन एवं पेट्रोकेमिकल्स
  • इलेक्ट्रॉनिक्स
  • प्लास्टिक उत्पाद
  • रत्न एवं आभूषण

विशेषज्ञों का कहना है कि कई उत्पादों पर पहले 100 प्रतिशत तक आयात शुल्क लगता था। अब इन शुल्कों के हटने से भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी और निर्यातकों को नए अवसर मिलेंगे।

ओमान को भी मिलेगा बड़ा आर्थिक लाभ

भारत-ओमान CEPA, ओमान के लिए भी काफी लाभकारी माना जा रहा है। भारत ने लगभग 78 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर शुल्क समाप्त करने या उनमें कटौती करने पर सहमति जताई है।

वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने ओमान से करीब 7.2 अरब डॉलर मूल्य के उत्पाद आयात किए थे।

प्रमुख आयातित वस्तुआयात मूल्य (अरब डॉलर)
कच्चा तेल1.6
एलएनजी1.2
उर्वरक0.84
मीथेनॉल0.46
अमोनिया0.42

ओमान भारत के लिए ऊर्जा और उर्वरक क्षेत्र में पहले से ही एक महत्वपूर्ण आपूर्तिकर्ता है। CEPA लागू होने के बाद इन क्षेत्रों में आपूर्ति अधिक स्थिर और प्रतिस्पर्धी कीमतों पर उपलब्ध होने की संभावना है।

भारत-ओमान CEPA से ऊर्जा व खाद्य सुरक्षा को मिलेगा समर्थन

भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए ओमान से कच्चे तेल और एलएनजी की आसान उपलब्धता महत्वपूर्ण मानी जा रही है। वहीं उर्वरकों, अमोनिया और मीथेनॉल जैसे औद्योगिक कच्चे माल की आपूर्ति में सुधार से कृषि और विनिर्माण क्षेत्र को भी लाभ मिलेगा।

कृषि क्षेत्र के लिए यह समझौता (भारत-ओमान CEPA) विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि शुल्क-मुक्त पहुंच मिलने से भारतीय चावल, मसाले, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ और समुद्री उत्पादों की मांग बढ़ सकती है। इससे किसानों, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग और निर्यातकों को सीधे लाभ मिलने की उम्मीद है।

भारत-ओमान CPCA: आर्थिक संबंधों में नया अध्याय

भारत-ओमान CEPA केवल एक व्यापार समझौता नहीं, बल्कि दोनों देशों के बीच रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी को नई दिशा देने वाला कदम है। यह समझौता भारतीय निर्यात को बढ़ावा देने, ऊर्जा एवं उर्वरक आपूर्ति को सुरक्षित बनाने और पश्चिम एशिया में भारत की आर्थिक उपस्थिति को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, क्षेत्रीय अनिश्चितताओं के बीच यह समझौता भारत के लिए व्यापार विविधीकरण और आपूर्ति श्रृंखला सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित हो सकता है।

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