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Middle East War: मिडिल ईस्ट जंग का असर भारतीय रसोई तक, दूध, साबुन, ब्रेड और AC हुए महंगे, आम आदमी पर बढ़ा महंगाई का बोझ

नई दिल्ली (कृषि भूमि ब्यूरो): Middle East War Impact: मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध का असर अब केवल अंतरराष्ट्रीय राजनीति और तेल बाजार तक सीमित नहीं रह गया है। इसकी सीधी आंच भारतीय घरों की रसोई और आम आदमी की जेब तक पहुंच चुकी है। रोजमर्रा की जरूरतों में शामिल दूध, ब्रेड, साबुन, डिटर्जेंट, पेट्रोल-डीजल और यहां तक कि एयर कंडीशनर जैसी वस्तुएं भी महंगी हो गई हैं। लगातार बढ़ती कीमतों ने मिडिल क्लास परिवारों का मासिक बजट बिगाड़ दिया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मिडिल ईस्ट में तनाव (Middle East War) लंबे समय तक जारी रहता है, तो आने वाले महीनों में महंगाई और तेज हो सकती है। कंपनियां पहले ही बढ़ती इनपुट कॉस्ट, फ्यूल प्राइस और सप्लाई चेन संकट का हवाला देकर दाम बढ़ा चुकी हैं, जबकि कई सेक्टर्स में नई कीमत बढ़ोतरी की तैयारी भी चल रही है।

Middle East War Impact: फ्यूल महंगा तो हर चीज महंगी

भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के रूप में आयात करता है। ऐसे में मिडिल ईस्ट में युद्ध बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें ऊपर चली गई हैं। इसका सीधा असर पेट्रोल और डीजल की लागत पर पड़ रहा है।

ईंधन महंगा होने से ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट बढ़ जाती है, जिसका असर खाद्य पदार्थों से लेकर FMCG प्रोडक्ट्स तक हर सेक्टर पर दिखाई देता है। कंपनियों के लिए माल ढुलाई और उत्पादन दोनों महंगे हो रहे हैं, जिसका बोझ आखिरकार ग्राहकों पर डाला जा रहा है।

दूध और ब्रेड ने बिगाड़ा रसोई का बजट

अमूल, मदर डेयरी और सांची जैसे बड़े ब्रांड्स ने दूध की कीमतों में करीब ₹2 प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी की है। कंपनियों का कहना है कि पशु चारे, पैकेजिंग और फ्यूल कॉस्ट में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।

दूध के बाद अब ब्रेड की कीमतों में भी इजाफा देखने को मिला है। गेहूं, ईंधन और लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ने से ब्रेड कंपनियों पर दबाव बढ़ा है। इससे आम परिवारों के नाश्ते का बजट भी प्रभावित हुआ है।

Middle East War
Middle East War: महंगाई ने तोड़ी आम आदमी की कमर, दूध से लेकर साबुन तक सब महंगा, क्या आगे और बढ़ेंगी कीमतें?

साबुन और डिटर्जेंट भी हुए महंगे

घरेलू इस्तेमाल के उत्पाद बनाने वाली कंपनियों ने भी कीमतों में बढ़ोतरी शुरू कर दी है। गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स ने साबुन, डिटर्जेंट और घरेलू कीटनाशकों की कीमतों में 4% से 7% तक की बढ़ोतरी की है। वहीं, मैरिको और हिंदुस्तान यूनिलीवर जैसी कंपनियां भी कीमतें बढ़ा चुकी हैं।

इन उत्पादों में इस्तेमाल होने वाले कई केमिकल्स पेट्रोकेमिकल इंडस्ट्री से आते हैं, जिनकी लागत कच्चे तेल के महंगा होने से बढ़ गई है। यही वजह है कि FMCG सेक्टर पर महंगाई का दबाव लगातार बढ़ रहा है।

AC और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर पर भी असर

एयर कंडीशनर बनाने वाली कंपनियों ने भी दाम बढ़ाने शुरू कर दिए हैं। ब्लू स्टार ने AC की कीमतों में औसतन 5% तक की बढ़ोतरी की है, जबकि कच्चे माल और डॉलर के मुकाबले रुपये में उतार-चढ़ाव के कारण अतिरिक्त बढ़ोतरी की संभावना जताई है।

कॉपर और अन्य धातुओं की कीमतें पहले से ही ऊंचे स्तर पर थीं। अब युद्ध के चलते सप्लाई चेन बाधित होने से लागत और बढ़ गई है। इससे इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर पर भी दबाव बना हुआ है।

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Middle East War Impact: किन चीजों पर सबसे ज्यादा असर?

वस्तु/सेक्टरकीमतों में असरमुख्य कारण
दूध₹2 प्रति लीटर तक बढ़ोतरीचारा, पैकेजिंग, फ्यूल महंगा
ब्रेडकीमतों में इजाफागेहूं और ट्रांसपोर्ट लागत
साबुन-डिटर्जेंट4%-7% तक बढ़ोतरीपेट्रोकेमिकल लागत
AC5%-8% तक महंगेकॉपर और आयात लागत
पेट्रोल-डीजललगातार दबावकच्चे तेल की कीमतें
सोनाड्यूटी और कीमत दोनों बढ़ेआयात लागत

क्या आगे भी बढ़ेगी महंगाई?

इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय हालात नहीं सुधरे, तो आने वाले महीनों में महंगाई और बढ़ सकती है। खासतौर पर रिटेल फ्यूल प्राइस में बढ़ोतरी से खुदरा महंगाई दर में 10 से 25 बेसिस पॉइंट तक का इजाफा हो सकता है।

Middle East War Impact: सोने की इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ने से ज्वेलरी सेक्टर में भी दबाव बढ़ा है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, महंगे सोने की वजह से लोग फिलहाल गैर-जरूरी खरीदारी टाल सकते हैं।

आर्थिक जानकारों का कहना है कि अभी सबसे बड़ी चिंता “कंज्यूमर सेंटिमेंट” को लेकर है। अगर रोजमर्रा की वस्तुएं लगातार महंगी होती रहीं, तो लोगों की खरीदारी क्षमता और खपत दोनों प्रभावित हो सकती हैं। इससे कंपनियों की बिक्री और देश की आर्थिक रफ्तार पर भी असर पड़ सकता है।

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