नई दिल्ली, 14 अप्रैल (कृषि भूमि ब्यूरो): Edible Oil Import March 2026 – भारत में खाद्य तेल का आयात मार्च 2026 में सालाना आधार पर 12 प्रतिशत बढ़कर 11.73 लाख टन हो गया। इंडस्ट्री बॉडी साल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया (SEA) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह कच्चे पाम तेल (Crude Palm Oil) की ज्यादा शिपमेंट रही है।
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में आयात में कमी देखी जा सकती है, क्योंकि वैश्विक कीमतें ऊंची बनी हुई हैं और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के चलते माल ढुलाई की लागत भी बढ़ रही है।
कच्चे पाम तेल का आयात दोगुना
SEA के अनुसार, मार्च में कच्चे पाम तेल का आयात बढ़कर 6.73 लाख टन हो गया, जो पिछले साल इसी महीने 3.43 लाख टन था। यह लगभग दोगुनी वृद्धि है, जो कुल आयात वृद्धि का प्रमुख कारण बनी।
वहीं, नॉन-एडिबल ऑयल का आयात घटकर 13,401 टन रह गया, जो पिछले वर्ष 27,742 टन था।
भारत मुख्य रूप से पाम ऑयल Indonesia और Malaysia से आयात करता है, जबकि सोयाबीन तेल Argentina और Brazil से आता है।
कुल वनस्पति तेल आयात में भी बढ़ोतरी
मार्च 2026 में कुल वेजिटेबल ऑयल (Edible Oil और Non-Edible Oil दोनों) का आयात 11 प्रतिशत बढ़कर 11.86 लाख टन हो गया, जो पिछले साल इसी अवधि में 10.73 लाख टन था।
नीचे तालिका में प्रमुख आंकड़े दिए गए हैं:
| श्रेणी | मार्च 2025 (टन) | मार्च 2026 (टन) | बदलाव |
|---|---|---|---|
| खाद्य तेल | 10,45,281 | 11,73,168 | +12% |
| कच्चा पाम तेल | 3,43,949 | 6,73,965 | +~96% |
| नॉन-एडिबल ऑयल | 27,742 | 13,401 | -52% |
| कुल वेजिटेबल ऑयल | 10,73,023 | 11,86,569 | +11% |
महीने-दर-महीने गिरावट का संकेत
दिलचस्प बात यह है कि मार्च में आयात फरवरी 2026 के मुकाबले 10 प्रतिशत घटा है। फरवरी में आयात 12.92 लाख टन था।
SEA का कहना है कि यह गिरावट संकेत देती है कि ऊंची अंतरराष्ट्रीय कीमतों, रुपये में कमजोरी और घरेलू उपलब्धता—विशेषकर सरसों की नई फसल—की वजह से मांग में सुधार हुआ है।
ग्लोबल फैक्टर्स का असर
पिछले कुछ महीनों में आयात में तेजी को ‘फ्रंट-लोडिंग’ रणनीति माना जा रहा है। आयातकों ने संभावित सप्लाई बाधाओं के डर से पहले ही ज्यादा खरीदारी की।
इन बाधाओं में Russia-Ukraine conflict के कारण सूरजमुखी तेल की सप्लाई प्रभावित होना शामिल है, जबकि दक्षिण-पूर्व एशिया में पाम ऑयल की उपलब्धता को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
इसके अलावा पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने शिपिंग लागत को और ऊंचा कर दिया है, जिससे आयात महंगा पड़ रहा है। साथ ही, बायोफ्यूल की बढ़ती वैश्विक मांग ने खाद्य तेलों की कीमतों को मजबूत बनाए रखा है। इन सभी कारणों के चलते भारतीय रिफाइनर फिलहाल सतर्क रुख अपनाते हुए “वेट-एंड-वॉच” रणनीति पर काम कर रहे हैं।
Edible Oil आउटलुक
SEA के अनुसार, जब तक वैश्विक कीमतों में नरमी नहीं आती या रुपये की स्थिति सुधरती नहीं है, तब तक शॉर्ट टर्म में आयात दबाव में रह सकता है।
लंबी अवधि में भारत घरेलू तिलहन उत्पादन बढ़ाने और आयात स्रोतों में विविधता लाने पर ध्यान केंद्रित कर सकता है, ताकि भू-राजनीतिक जोखिमों को कम किया जा सके।
भारत अपनी खाद्य तेल (Edible Oil) जरूरतों का आधे से ज्यादा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है, जिससे वैश्विक बाजार की हलचल का सीधा असर घरेलू कीमतों और महंगाई पर पड़ता है।
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