नई दिल्ली, 08 अप्रैल (कृषि भूमि ब्यूरो): Monsoon 2026 – भारत में 2026 का मानसून सामान्य से कमजोर रहने की संभावना है। स्काइमेट वेदर ने 2026 के लिए भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून के सामान्य से कम रहने का अनुमान जताया है। एजेंसी के अनुसार, इस वर्ष कुल वर्षा दीर्घकालिक औसत (LPA) का 94% रहने की संभावना है, जो सामान्य से कम मानी जाती है।
Monsoon 2026 – यह अनुमान जून से सितंबर के मानसून सीजन के लिए है, जहां LPA 868.6 मिमी माना जाता है। हालांकि इसमें 5% तक की ऊपर-नीचे की संभावना भी बनी हुई है।
अल नीनो का बढ़ता प्रभाव बना मुख्य कारण
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, इस बार उभरता हुआ एल नीनो मानसून को कमजोर कर सकता है।
जतिन सिंह के मुताबिक, मानसून की शुरुआत सामान्य हो सकती है, लेकिन जैसे-जैसे अल नीनो मजबूत होगा, बारिश में गिरावट और अस्थिरता बढ़ने की संभावना है। विशेष रूप से मानसून के दूसरे हिस्से यानी जुलाई से सितंबर के बीच इसका असर ज्यादा दिखाई दे सकता है।
ENSO और IOD भी निभाएंगे अहम भूमिका
अल नीनो-दक्षिणी दोलन (ENSO) के साथ-साथ हिंद महासागर द्विध्रुव (IOD) भी मानसून को प्रभावित करता है। इस साल IOD के न्यूट्रल से हल्के सकारात्मक रहने की संभावना जताई गई है, जिससे मानसून की शुरुआती स्थिति बेहतर हो सकती है, लेकिन यह प्रभाव अल नीनो के नकारात्मक असर को पूरी तरह संतुलित करने के लिए पर्याप्त नहीं माना जा रहा है।
क्षेत्रवार असर और वर्षा की संभावनाएं
पूर्वानुमान के अनुसार, मानसून का वितरण पूरे देश में असमान रहने की आशंका है। मध्य भारत और उत्तर-पश्चिमी राज्यों जैसे पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में विशेष रूप से अगस्त और सितंबर के दौरान सामान्य से कम वर्षा हो सकती है, जबकि पूर्व और पूर्वोत्तर भारत में अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति बनी रह सकती है।
बारिश के संभावित परिदृश्यों की बात करें तो अत्यधिक वर्षा (LPA के 110% से अधिक) की संभावना लगभग शून्य बताई गई है। सामान्य से अधिक वर्षा की संभावना करीब 10 प्रतिशत और सामान्य मानसून की संभावना लगभग 20 प्रतिशत आंकी गई है। इसके विपरीत, सामान्य से कम वर्षा की संभावना सबसे अधिक यानी लगभग 40 प्रतिशत है, जबकि सूखे जैसी स्थिति (LPA के 90% से कम वर्षा) की आशंका भी करीब 30 प्रतिशत तक जताई गई है।
मासिक ट्रेंड: शुरुआत अच्छी, अंत कमजोर
Monsoon 2026 – मासिक अनुमान के अनुसार जून में लगभग सामान्य वर्षा (101% LPA) के साथ मानसून की अच्छी शुरुआत हो सकती है। जुलाई में वर्षा घटकर लगभग 95% LPA रहने का अनुमान है, जहां सामान्य और कम बारिश की संभावना बराबर हो सकती है। अगस्त में स्थिति और कमजोर होने की आशंका है, जब वर्षा करीब 92% LPA तक सीमित रह सकती है। सितंबर सबसे कमजोर महीना साबित हो सकता है, जहां वर्षा 89% LPA रहने और सामान्य से कम होने की संभावना सबसे अधिक बताई गई है।
Monsoon 2026: कृषि अर्थव्यवस्था पर असर संभव
कमजोर मानसून (Monsoon 2026) का सीधा प्रभाव खरीफ फसलों, जल संसाधनों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। विशेष रूप से वर्षा पर निर्भर क्षेत्रों में किसानों को चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि जून में अच्छी शुरुआत कुछ राहत दे सकती है, लेकिन पूरे सीजन में संभावित अस्थिरता चिंता का विषय बनी हुई है।
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