नई दिल्ली, 12 मार्च (कृषि भूमि ब्यूरो): भारत में बुधवार को 2026 की पहली बड़ी लू (Heatwave) दर्ज की गई, जिससे गुजरात के सौराष्ट्र और कच्छ क्षेत्रों में भीषण गर्मी का दौर शुरू हो गया। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि सर्दियों और गर्मियों के बीच का समय तेजी से घट रहा है, जो जलवायु परिवर्तन के नए पैटर्न की ओर इशारा करता है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार सौराष्ट्र और कच्छ के कई इलाकों में भीषण लू की स्थिति बनी रही, जबकि विदर्भ के कुछ स्थानों पर भी लू दर्ज की गई। इस महीने की शुरुआत में विदर्भ में सीमित स्तर पर लू देखी गई थी, लेकिन अब पश्चिमी भारत में बड़े पैमाने पर गर्मी का पहला दौर शुरू हो गया है।
राजस्थान के ऊपर बने सिस्टम से बढ़ी गर्मी
मौसम एजेंसी स्काईमेट वेदर के अनुसार राजस्थान के ऊपर बने प्रतिचक्रवात (Anticyclone) के कारण शुष्क और गर्म हवाएं गुजरात की ओर बढ़ रही हैं। इससे हवा नीचे की ओर दब रही है, जिससे तापमान तेजी से बढ़ रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह पैटर्न अब बार-बार देखने को मिल रहा है और मार्च के अंतिम दिनों में पश्चिमी भारत के कुछ हिस्सों में इसी तरह की स्थिति फिर बन सकती है।
मौसम वैज्ञानिकों का एक और महत्वपूर्ण अवलोकन यह है कि वसंत ऋतु लगभग समाप्त होती दिखाई दे रही है, और अब सर्दियों से सीधे गर्मियों में तेज बदलाव देखने को मिल रहा है।
कई राज्यों में 42°C तक पहुंचा तापमान
बुधवार को कई राज्यों में अधिकतम तापमान सामान्य से काफी ज्यादा दर्ज किया गया।
| क्षेत्र / राज्य | अधिकतम तापमान |
|---|---|
| गुजरात (सौराष्ट्र, कच्छ) | 38°C – 42°C |
| पश्चिमी राजस्थान | 38°C – 42°C |
| विदर्भ | 38°C – 42°C |
| मध्य प्रदेश और मराठवाड़ा | 38°C – 42°C |
| दिल्ली | 35°C – 38°C |
मौसम विभाग के अनुसार हरियाणा-दिल्ली, राजस्थान और गुजरात के कई स्थानों पर तापमान सामान्य से 5°C से ज्यादा दर्ज किया गया। वहीं उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम, मध्य महाराष्ट्र और तटीय कर्नाटक के कुछ हिस्सों में तापमान सामान्य से 3°C से 5°C अधिक रहा।
IMD की चेतावनी: 13 मार्च तक जारी रह सकती है लू
IMD के महानिदेशक एम. मोहपात्रा ने कहा, मार्च में इस तरह की लू चलना असामान्य नहीं है और इसका पूर्वानुमान पहले ही जारी किया जा चुका था।
उन्होंने बताया कि गुजरात में 13 मार्च तक लू से लेकर भीषण लू की स्थिति बनी रह सकती है। दूसरी ओर अरुणाचल प्रदेश में 12–14 मार्च और असम-मेघालय में 13–15 मार्च के बीच भारी बारिश की संभावना जताई गई है।
मौसम विभाग के अनुसार मैदानी इलाकों में जब अधिकतम तापमान 45°C तक पहुंच जाए या सामान्य से 4.5°C अधिक हो जाए तो लू की स्थिति मानी जाती है।
बिजली मांग पर पड़ सकता है बड़ा असर
विशेषज्ञों का कहना है कि जल्दी शुरू हुई यह गर्मी भारत के बिजली ढांचे पर गंभीर दबाव डाल सकती है। Grid India की Short Term Resource Adequacy Assessment (2026-27) रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल से जून के बीच बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकती है।
| वर्ष / अनुमान | बिजली की पीक डिमांड |
|---|---|
| मई 2024 | 250 गीगावॉट |
| अनुमान (अप्रैल-जून 2026) | 267 – 280 गीगावॉट |
एनर्जी एक्सपर्ट्स के अनुसार भीषण गर्मी के कारण इस वर्ष बिजली और पानी दोनों की मांग तेजी से बढ़ने वाली है।
ऊर्जा आयात और गैस सप्लाई पर भी असर
गर्मी बढ़ने के साथ ऊर्जा की मांग बढ़ रही है, लेकिन वैश्विक हालात भी चुनौती पैदा कर रहे हैं। भारत अपनी करीब 85% तेल और गैस जरूरत विदेशों से आयात करता है। लेकिन ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच चल रहे संघर्ष के कारण सप्लाई प्रभावित हुई है।
पेट्रोलियम और गैस मंत्रालय के एक अधिकारी के अनुसार देश की मौजूदा गैस जरूरत का लगभग 25% हिस्सा प्रभावित हुआ है।
आगे कैसा रहेगा मौसम?
मौसम विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस साल गर्मी 2024 जितनी या उससे भी अधिक तीव्र हो सकती है, जिसे वैश्विक स्तर पर अब तक का सबसे गर्म वर्ष माना गया था। यदि तापमान इसी तरह बढ़ता रहा तो आने वाले महीनों में देश के कई हिस्सों में लू की तीव्रता और अवधि दोनों बढ़ सकती हैं।
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