नई दिल्ली, 12 मार्च (कृषि भूमि ब्यूरो): वैश्विक तेल बाजार में गुरुवार को बड़ा उछाल देखने को मिला जब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास कार्गो जहाजों पर हमलों की खबर सामने आई। इन घटनाओं के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 7% उछलकर 99.03 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जबकि US क्रूड 7.5% बढ़कर 93.80 डॉलर प्रति बैरल हो गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और तेल आपूर्ति को लेकर बढ़ती अनिश्चितता ने बाजार में घबराहट पैदा कर दी है। इससे ऊर्जा की कीमतें बढ़ने के साथ वैश्विक महंगाई का खतरा भी गहरा गया है।
IEA के रिकॉर्ड ऑयल रिलीज फैसले से भी नहीं मिली राहत
तेल की कीमतों में उछाल उस समय आया जब International Energy Agency (IEA) ने अपने इतिहास का सबसे बड़ा कदम उठाते हुए 400 मिलियन बैरल तेल इमरजेंसी रिजर्व से रिलीज करने की योजना का ऐलान किया।
अमेरिका ने भी इस योजना के तहत अगले सप्ताह से 172 मिलियन बैरल तेल बाजार में छोड़ने की घोषणा की है। इसका उद्देश्य वैश्विक बाजार में आपूर्ति बढ़ाकर कीमतों को नियंत्रित करना है।
हालांकि बाजार पर इसका असर सीमित ही रहा और भू-राजनीतिक जोखिम के कारण कीमतों में तेजी जारी रही।
इराक के पास तेल टैंकरों पर हमला
इराकी सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार गुरुवार सुबह इराकी जलक्षेत्र में दो फ्यूल टैंकरों पर विस्फोटकों से लदी ईरानी नावों ने हमला किया। एक इराकी अधिकारी ने बताया कि सुरक्षा कारणों से तेल बंदरगाहों ने अपने ऑपरेशन अस्थायी रूप से रोक दिए हैं।
IG के मार्केट एनालिस्ट टोनी साइकामोर के मुताबिक, बसरा तट के पास फारस की खाड़ी में कई तेल टैंकर जलते हुए देखे गए और जलता हुआ तेल समुद्र में फैल रहा है। उन्होंने कहा कि यह कदम संभवतः IEA द्वारा बड़े पैमाने पर तेल रिलीज की घोषणा के जवाब में उठाया गया है।
होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ा तनाव
ईरान पहले ही होर्मुज स्ट्रेट में व्यापारिक जहाजों पर हमले तेज कर चुका है और दुनिया को 200 डॉलर प्रति बैरल तेल के लिए तैयार रहने की चेतावनी भी दे चुका है।
रिपोर्ट्स के अनुसार खाड़ी क्षेत्र में तीन जहाजों के नष्ट होने की खबर है। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दावा किया कि उनकी नौसेना ने उन जहाजों पर गोलीबारी की जिन्होंने उनके आदेशों का पालन नहीं किया।
इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की कि ईरान के खिलाफ युद्ध जीत लिया गया है, लेकिन मिशन पूरा करने के लिए सैन्य कार्रवाई जारी रहेगी। इससे बाजारों में अनिश्चितता और बढ़ गई है।
तेल कीमतों से वैश्विक शेयर बाजार पर असर
ऊर्जा कीमतों में उछाल का असर वैश्विक शेयर बाजारों पर भी दिखाई दिया। एशिया-पैसिफिक क्षेत्र के शेयरों का MSCI इंडेक्स 0.8% गिर गया। जापान का निक्केई इंडेक्स 1.6% नीचे आया। जापान जैसे देश, जो तेल और गैस के बड़े आयातक हैं, वहां बाजारों पर दबाव ज्यादा देखने को मिला।
अमेरिका में जारी आंकड़ों के अनुसार फरवरी में कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) 0.3% बढ़ा, जो जनवरी के 0.2% से ज्यादा है। हालांकि मध्य पूर्व में बढ़ते युद्ध और तेल कीमतों में उछाल ने महंगाई के जोखिम को और बढ़ा दिया है।
बॉन्ड मार्केट की स्थिति
| इंडिकेटर | ताजा स्थिति |
|---|---|
| US 10-Year Treasury Yield | 4.2472% |
| रातभर में बढ़ोतरी | लगभग 6 बेसिस पॉइंट |
| गुरुवार को अतिरिक्त बढ़त | 4 बेसिस पॉइंट |
बढ़ती महंगाई की आशंका से दुनिया भर में बॉन्ड यील्ड ऊपर जा रही हैं।
करेंसी मार्केट में डॉलर मजबूत
ऊर्जा संकट के बीच निवेशक सुरक्षित विकल्प के रूप में डॉलर की ओर बढ़ रहे हैं।
| करेंसी | ताजा स्तर |
|---|---|
| यूरो | $1.1536 |
| डॉलर-येन | 159.12 |
| ऑस्ट्रेलियन डॉलर | $0.7127 |
डॉलर की मजबूती से ऊर्जा आयात करने वाले देशों की मुद्राओं पर दबाव बढ़ गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार यदि होर्मुज स्ट्रेट में तनाव और हमले जारी रहते हैं, तो वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। ऐसे में क्रूड ऑयल की कीमतें और ऊपर जा सकती हैं, जिससे दुनियाभर में महंगाई और आर्थिक अस्थिरता बढ़ने का खतरा है।
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