नई दिल्ली, 24 जनवरी (कृषि भूमि ब्यूरो): रुपये की गिरावट ने बढ़ाया आयात का बोझ – डॉलर के मुकाबले रुपये में तेज गिरावट का असर अब खाद्य तेल आयात पर साफ दिखने लगा है। कमजोर रुपये और ऊंची वैश्विक कीमतों के कारण भारत ने दक्षिण अमेरिका से सोयाबीन तेल की कई शिपमेंट रद्द कर दी हैं। इससे घरेलू और आयातित तेल के दामों के बीच का अंतर और बढ़ गया है, जिससे आयात सौदे घाटे के हो गए हैं।
कितनी मात्रा में रद्द हुई शिपमेंट?
भारत के प्रमुख वेजिटेबल ऑयल खरीदारों में शामिल पतंजलि फूड्स लिमिटेड के वाइस प्रेसिडेंट आशीष आचार्य के अनुसार, ब्राज़ील और अर्जेंटीना से फरवरी और अप्रैल–जुलाई डिलीवरी के लिए बुक की गई करीब 35,000 से 40,000 टन सोयाबीन तेल की खेप रद्द की गई है। बाजार सूत्रों का अनुमान है कि कुल कैंसलेशन 50,000 टन से भी अधिक हो सकता है। इस फैसले की पुष्टि अन्य ट्रेडर्स ने भी की है।
पहले भी टूट चुके हैं बड़े सौदे
यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब दिसंबर में भारतीय खरीदार अर्जेंटीना से 1 लाख टन से ज्यादा सोयाबीन तेल के सौदे रद्द कर चुके थे। यह मात्रा भारत के एक महीने के औसत आयात का लगभग 20 प्रतिशत है। गौरतलब है कि भारत अपनी कुल खाद्य तेल जरूरत का करीब 60 प्रतिशत आयात के जरिए पूरा करता है।
सोया तेल क्यों हुआ गैर-फायदेमंद?
ट्रेडर्स के मुताबिक, कमजोर रुपये और ऊंची अंतरराष्ट्रीय कीमतों की वजह से दक्षिण अमेरिकी सोयाबीन तेल, घरेलू सप्लाई के मुकाबले 25 से 30 डॉलर प्रति टन महंगा पड़ रहा है। यही कारण है कि खरीदार अब इन सौदों से पीछे हट रहे हैं और अपेक्षाकृत सस्ते ट्रॉपिकल ऑयल, खासकर पाम तेल की ओर रुख कर रहे हैं।
सोया बनाम पाम तेल का बढ़ता अंतर
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, साल की शुरुआत से पाम तेल के मुकाबले सोया तेल का प्रीमियम दोगुना होकर करीब 146 डॉलर प्रति टन पहुंच गया है।
| बाजार | साल 2026 में अब तक बदलाव |
|---|---|
| शिकागो सोया तेल | लगभग 11% तेजी |
| कुआलालंपुर पाम तेल | करीब 2.6% बढ़त |
सप्लाई पर चीन का असर
दक्षिण अमेरिका से सोयाबीन तेल की उपलब्धता भी सीमित हो रही है, क्योंकि China ने सोयाबीन की खरीद बढ़ा दी है। इससे तेल निकालने के लिए कच्चे माल की उपलब्धता घट गई है। कमोडिटी डेटा के मुताबिक, अर्जेंटीना के सोया तेल के भाव एक साल से अधिक के उच्च स्तर पर हैं।
जानकारों के मुताबिक, शिकागो में सोया तेल की तेजी के अनुरूप भारतीय बाजार में कीमतें नहीं बढ़ पाईं, क्योंकि रुपया डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर है। इस असंतुलन के चलते आगे और भी सौदे रद्द हो सकते हैं और पाम तेल का आयात बढ़ने की संभावना है।
आगे का आउटलुक
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रुपये में कमजोरी बनी रहती है और वैश्विक सोया तेल महंगा रहता है, तो भारत में पाम तेल का आयात और मजबूत हो सकता है। इसका असर आने वाले महीनों में घरेलू खाद्य तेल बाजार की कीमतों और आयात पैटर्न पर साफ दिखाई देगा।
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