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Crude Oil: ईरान पर US हमले की आशंका कम, 2 दिन में 6% गिरावट के बाद तेल कीमतें स्थिर

नई दिल्ली, 16 जनवरी (कृषि भूमि ब्यूरो): अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में बड़ी गिरावट के बाद अब स्थिरता देखने को मिल रही है। अमेरिका द्वारा फिलहाल ईरान पर सैन्य कार्रवाई टालने के संकेत दिए जाने से सप्लाई बाधित होने की आशंका कम हुई है। इसी वजह से दो कारोबारी सत्रों में करीब 6 प्रतिशत की गिरावट के बाद तेल की कीमतें संभलती नजर आईं।

यह जून के बाद कच्चे तेल में आई सबसे बड़ी गिरावट मानी जा रही है। गुरुवार को 4.6 प्रतिशत की तेज गिरावट के बाद वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 59 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता दिखा, जबकि ब्रेंट क्रूड 64 डॉलर प्रति बैरल से नीचे फिसल गया। बाजार में यह गिरावट उस समय आई जब भू-राजनीतिक जोखिम अचानक कम होते नजर आए।

US-ईरान तनाव में आई नरमी

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से ईरान पर हमले की योजना को फिलहाल टालने का अनुरोध किया है। इसके बाद यह संभावना कमजोर पड़ गई कि अमेरिका ईरान में जारी हिंसक विरोध प्रदर्शनों पर तुरंत सैन्य प्रतिक्रिया देगा।

अगर ऐसा हमला होता, तो शिपिंग रूट्स और तेल उत्पादन में बड़ी रुकावट आ सकती थी, जिससे कीमतों में तेज उछाल देखने को मिलता।

मिडिल ईस्ट में US की सैन्य मौजूदगी बरकरार

हालांकि हमले की संभावना फिलहाल टली है, लेकिन अमेरिका मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य मौजूदगी लगातार बढ़ा रहा है। आने वाले दिनों में और सैन्य उपकरणों की तैनाती की उम्मीद है और कम से कम एक एयरक्राफ्ट कैरियर पहले से ही क्षेत्र की ओर रवाना है। इससे यह साफ है कि भू-राजनीतिक जोखिम पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।

सप्लाई साइड की हलचल जारी

इसी बीच, ट्रैफिगुरा ग्रुप लैटिन अमेरिकी देश से अपना पहला ऑयल कार्गो कुराकाओ की स्टोरेज फैसिलिटी में उतारने की तैयारी में है। यह कदम बैरल की मार्केटिंग को लेकर अमेरिकी सरकार की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

कैरिबियन क्षेत्र में अमेरिका प्रतिबंधित जहाजों के इस्तेमाल को लेकर दबाव बढ़ा रहा है। हाल ही में अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला के पास छठे ऑयल टैंकर को जब्त किया है, जिससे क्षेत्रीय सप्लाई पर असर पड़ सकता है।

तेल बाजार की दिशा क्या होगी

तेल की कीमतों में आई तेजी अब थमती दिख रही है। बाजार को पहले इस बात की चिंता थी कि अमेरिका OPEC के चौथे सबसे बड़े उत्पादक को निशाना बना सकता है, जिससे रोजाना 3 मिलियन बैरल से ज्यादा उत्पादन खतरे में पड़ जाता।

इसके अलावा, वेनेजुएला में राजनीतिक उथल-पुथल और ब्लैक सी क्षेत्र से कजाखस्तान के निर्यात में रुकावट ने हाल के हफ्तों में कीमतों को सहारा दिया था। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि कमजोर डिमांड ग्रोथ के मुकाबले सप्लाई बढ़ने का जोखिम अब भी बना हुआ है, जिससे तेल बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

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