नई दिल्ली, 30 दिसंबर (कृषि भूमि ब्यूरो): भारतीय कमोडिटी बाजार में सोमवार को उस वक्त हड़कंप मच गया, जब चांदी की कीमतों में एक ही कारोबारी सत्र में भारी गिरावट दर्ज की गई। MCX पर चांदी करीब ₹31,000 प्रति किलो टूट गई और रिकॉर्ड ऊंचाई से सीधे तेज करेक्शन के दौर में चली गई। हाल के हफ्तों में लगातार नई ऊंचाइयों पर पहुंच रही चांदी के लिए यह गिरावट निवेशकों के लिए बड़ा झटका मानी जा रही है।
सोमवार को चांदी ने गिरावट से पहले ₹2,54,174 प्रति किलो का ऑल-टाइम हाई बनाया था, लेकिन कुछ ही घंटों में यह फिसलकर ₹2,22,504 प्रति किलो तक आ गई। यही नहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी चांदी पहली बार $80 प्रति औंस के ऊपर गई, लेकिन वहां टिक नहीं पाई और अमेरिकी सेशन में 10% से ज्यादा टूटकर $71 के आसपास आ गई।
2025 में रॉकेट बनी चांदी, अब ब्रेक क्यों?
साल 2025 में अब तक चांदी करीब 180% से ज्यादा चढ़ चुकी है, जबकि सोने की तुलना में इसका प्रदर्शन कहीं बेहतर रहा है। तेज रैली के पीछे कई कारण रहे। अमेरिका में चांदी को Critical Mineral का दर्जा, सीमित सप्लाई और घटते वैश्विक स्टॉक्स, सोलर, EV और इलेक्ट्रॉनिक्स में बढ़ता इंडस्ट्रियल डिमांड, ETF और फ्यूचर्स में जबरदस्त निवेश ने चांदी को मजबूती दी। लेकिन बाजार में यह माना जा रहा था कि इतनी पैराबॉलिक तेजी के बाद करेक्शन होना ही है – और वही अब सामने आया है।
चांदी क्रैश के 7 बड़े कारण
1️⃣ रिकॉर्ड ऊंचाई के बाद मुनाफावसूली: जब चांदी ₹2.50 लाख के पार पहुंची, तो बड़े निवेशकों और प्रो ट्रेडर्स ने आक्रामक मुनाफावसूली शुरू कर दी। तेज बिकवाली ने गिरावट को और गहरा कर दिया।
2️⃣ ग्लोबल मार्केट में 80 डॉलर से रिवर्सल: अंतरराष्ट्रीय बाजार में $80 का स्तर मनोवैज्ञानिक और टेक्निकल दोनों था। इस लेवल से टिकाव न मिलते ही एल्गो ट्रेडिंग और स्टॉप-लॉस ट्रिगर हुए, जिससे ग्लोबल सेलऑफ तेज हुआ और असर सीधे MCX पर दिखा।
3️⃣ भू-राजनीतिक तनाव में नरमी: रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर शांति वार्ता की संभावनाओं और अमेरिका-यूक्रेन बातचीत में प्रगति के संकेत मिले।
जैसे ही जियोपॉलिटिकल रिस्क कम हुआ, सेफ-हेवन एसेट्स से पैसा निकलने लगा।
4️⃣ मार्जिन बढ़ने से जबरन बिकवाली: CME ग्रुप ने सिल्वर फ्यूचर्स पर मार्जिन बढ़ा दिया। इससे छोटे और मिड-साइज ट्रेडर्स पर दबाव बढ़ा और मजबूरन पोजिशन कट करनी पड़ी।
5️⃣ पैराबॉलिक रैली के बाद करेक्शन तय: पिछले एक साल में चांदी के भाव लगभग तीन गुना हो चुके थे। इतनी तेज रैली के बाद करेक्शन “अगर” नहीं, बल्कि “कब” का सवाल होता है—और इस बार करेक्शन अचानक और तेज आया।
6️⃣ टेक्निकल ओवरबॉट कंडीशन: टेक्निकल चार्ट्स के मुताबिक चांदी अपने 200-दिन के मूविंग एवरेज से करीब 85–90% ऊपर ट्रेड कर रही थी। RSI और अन्य इंडिकेटर भी ओवरबॉट ज़ोन में थे। ऐसे में हल्का सा ट्रिगर भी बड़ी गिरावट की वजह बन जाता है।
7️⃣ मनोवैज्ञानिक फैक्टर और “टॉप वाला डर”: जब कीमतें बहुत तेजी से ऊपर जाती हैं, तो बाजार में “टॉप बन गया क्या?” का डर पैदा होता है। इसी डर में रिटेल और हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडर्स एक साथ बेचने लगते हैं, जिससे गिरावट और तेज हो जाती है।
अमेरिकी फाइनेंशियल सर्विसेज फर्म BTIG ने पहले ही चेतावनी दी थी कि चांदी की रैली अब “पैराबॉलिक स्टेज” में है। BTIG के मुताबिक: “पैराबोला का अंत धीरे नहीं, बल्कि तेज और गहरी गिरावट के साथ होता है। यह करेक्शन समय के साथ नहीं, बल्कि झटके में आता है।”
1979 के Hunt Brothers स्क्वीज को छोड़ दें, तो जब भी चांदी 200-DMA से 60% ऊपर गई है अगले 20–40 दिनों में बड़ी गिरावट देखने को मिली है। BTIG का मानना है कि भले ही इस बार फंडामेंटल मजबूत हों, लेकिन साल की शुरुआत से अब तक की 174–180% तेजी में ज्यादातर पॉजिटिव फैक्टर्स पहले ही कीमतों में शामिल हो चुके हैं।
एक्सपर्ट्स की राय
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि शॉर्ट टर्म में चांदी में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। रिकॉर्ड तेजी के बाद आया यह करेक्शन बाजार को संतुलन की ओर ले जा सकता है। हालांकि, इंडस्ट्रियल डिमांड और सप्लाई की स्थिति को देखते हुए लंबी अवधि में चांदी की बुनियादी कहानी अभी भी मजबूत मानी जा रही है। रिकॉर्ड रैली के बाद आई यह तेज गिरावट साफ संकेत देती है कि चांदी अब हाई-वोलैटिलिटी ज़ोन में प्रवेश कर चुकी है। निवेशकों के लिए आने वाले सत्रों में सतर्कता और रणनीतिक कदम बेहद जरूरी होंगे।
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