मुंबई, 4 दिसंबर, 2025 (कृषि भूमि डेस्क): भारत के चीनी उद्योग और गन्ना किसानों के लिए निर्यात बाजार से कुछ राहत भरी खबरें आ रही हैं। हाल ही में, 1 लाख टन चीनी निर्यात का सौदा अंतिम रूप दिया गया है, जिसने उद्योग में थोड़ी आशा जगाई है। हालांकि, देश में चीनी के पर्याप्त स्टॉक और गिरती कीमतों को देखते हुए, नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज़ लिमिटेड (NFCSF) ने सरकार से निर्यात नीति को लेकर एक बड़ी और महत्वपूर्ण मांग की है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सीमित कोटा के बावजूद, भारतीय चीनी मिलों ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हुए 1 लाख मीट्रिक टन (LMT) चीनी के निर्यात सौदे को अंतिम रूप दिया है। यह निर्यात ऐसे समय में हुआ है जब सरकार ने घरेलू आपूर्ति सुनिश्चित करने और कीमतों को स्थिर रखने के उद्देश्य से चीनी निर्यात पर मात्रात्मक प्रतिबंध (Quantitative Restrictions) लगा रखा है। यह सौदा दर्शाता है कि भारतीय चीनी की अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में अभी भी मांग बनी हुई है, जो मिलों को कुछ हद तक नकदी प्रवाह (Cash Flow) प्रदान करने में मदद करेगा।
NFCSF की सरकार से बड़ी मांग
जहां एक तरफ सीमित मात्रा में निर्यात शुरू हुआ है, वहीं दूसरी तरफ चीनी उद्योग बंद स्टॉक (Closing Stock) और उत्पादन लागत (Cost of Production) में वृद्धि से जूझ रहा है। इसी पृष्ठभूमि में, NFCSF ने सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है।
1. अतिरिक्त 10 लाख टन निर्यात की अनुमति
NFCSF के अनुसार, मौजूदा सीज़न में चीनी का उत्पादन अनुमानित रूप से 315 लाख मीट्रिक टन रहने वाला है (इथेनॉल डायवर्जन के बाद)। घरेलू खपत लगभग 290 लाख मीट्रिक टन है। इसके बावजूद, गोदामों में लगभग 75 लाख टन चीनी का बड़ा स्टॉक बचने की आशंका है।
समस्या: भारी स्टॉक के कारण चीनी मिलों का पैसा फंसा रहता है, जिससे उन पर ब्याज का बोझ बढ़ता है और गन्ना किसानों के बकाया भुगतान में देरी होती है।
मांग: NFCSF ने सरकार से अनुरोध किया है कि घरेलू बाजार को प्रभावित किए बिना, मिलों को अतिरिक्त 10 लाख टन (10 LMT) चीनी निर्यात करने की अनुमति दी जाए। उनका तर्क है कि इससे घरेलू कीमतों में थोड़ी मजबूती आएगी और मिलों को राहत मिलेगी।
2. न्यूनतम विक्रय मूल्य (MSP) में संशोधन
NFCSF की एक और प्रमुख मांग चीनी के न्यूनतम विक्रय मूल्य (Minimum Selling Price – MSP) में संशोधन को लेकर है।
वर्तमान MSP: चीनी का MSP वर्ष 2018-19 से ₹31 प्रति किलोग्राम पर स्थिर बना हुआ है।
विरोध: जबकि गन्ने का उचित एवं लाभकारी मूल्य (FRP) लगातार बढ़ रहा है (2025-26 के लिए ₹355 प्रति क्विंटल), चीनी की उत्पादन लागत भी बढ़कर लगभग ₹40.24 प्रति किलोग्राम हो गई है।
मांग: उद्योग का कहना है कि MSP को वर्तमान उत्पादन लागत के अनुरूप संशोधित करके ₹41 प्रति किलोग्राम किया जाना चाहिए, ताकि मिलें अपनी लागत वसूल कर सकें और किसानों को समय पर भुगतान कर सकें।
संतुलन की आवश्यकता
NFCSF की मांगें गन्ना किसानों के भुगतान और चीनी मिलों के वित्तीय स्वास्थ्य से जुड़ी हुई हैं। सरकार के सामने अब दोहरी चुनौती है: एक तरफ घरेलू उपभोक्ताओं के लिए चीनी की कीमतों को नियंत्रित रखना है, और दूसरी तरफ उद्योग और किसानों को वित्तीय स्थिरता प्रदान करना है। अतिरिक्त निर्यात और MSP में वृद्धि, दोनों ही कदम चीनी उद्योग के लिए संजीवनी का काम कर सकते हैं, लेकिन सरकार को कोई भी निर्णय लेने से पहले घरेलू बाज़ार पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों का बारीकी से मूल्यांकन करना होगा।
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